कैसे कोरोना से ज्यादा वेरियंट बदल रही है महाराष्ट्र की वसूली महामारी -सरयूसुत मिश्रा

कैसे कोरोना से ज्यादा वेरियंट बदल रही है महाराष्ट्र की वसूली महामारी

-सरयूसुत मिश्रा
Anil deshmkh npमहाराष्ट्र में एंटीलिया के सामने विस्फोटक कांड के इतने वेरियंट सामने आ रहे हैं कि कोरोना के वेरियंट भी इनसे पीछे हो गए हैं. इस अपराध का पहला वेरियंट तब पता लगा जब यह बात सामने आयी कि विस्फोटक और गाड़ी पुलिस ने ही रखी थी. चोरी की गाड़ी होने की रिपोर्ट होने के बाद दूसरा वेरियंट तब आया, जब पता लगा कि इस गाड़ी का मालिक पुलिस के साथ मिलकर काम कर रहा था. बाद में पुलिस ने ही मालिक की हत्या का उपक्रम रचा. तीसरा वेरियंट तब आया जब पुलिस कमिश्नर रहे अधिकारी ने ही अपने गृह मंत्री पर वसूली का टारगेट देने का आरोप लगा दिया.

सर्वोच्च न्यायालय होते हुए उच्च न्यायालय में पहुंचे इस मामले में सीबीआई जांच का वेरियंट आते ही गृहमंत्री पद से हट गए और अब सचिन वाझे के अदालत में दिए पत्र से एक नया वेरियंट सामने आ गया है. एक और मंत्री अनिल परब इस वेरियंट की चपेट में आ गए हैं. 



Paramveer Singh IPSअनिल परब के माध्यम से यह वेरियंट उनकी पूरी पार्टी को चपेट में ले सकता है. जितनी तेजी से इस केस में वेरियंट बदल रहे हैं, उतनी तेजी से तो करोना भी अपना वेरियंट नहीं बदल पा रहा है. सचिन वाझे ने अपने पत्र में यह कहा है कि गृह मंत्री ने उन्हें पद पर बने रहने के लिए उनसे दो करोड़ रुपए मांगे थे. 

शरद पवार भी इस रिश्वतखोरी के प्रस्ताव में शामिल थे, ऐसा पत्र में बताया गया है. उच्च न्यायालय मुंबई के निर्देश अनुसार सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है. जैसे ही बीमारी पता लगे वैसे ही जांच कराना चाहिए, यह बात सभी नेता, अभिनेता कोरोना के मामले में जनता से कह रहे हैं. 

लेकिन मुंबई कांड की जांच उच्च न्यायालय के आदेश पर न हो इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ही सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे पर पहुंच गई है. पूर्व गृहमंत्री स्वयं जाँच को रुकवाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई हुई है.

HomeMinisterकिसी भी कृत्य की जांच हो, इसमें किसीको क्या आपत्ति हो सकती है? जिनका नाम और जिन की भूमिका इस अपराध में बताई जा रही है वही जांच को रोकने का प्रयास करें, यह बात तो समझ के परे है.

अब इस पूरे मामले में क्या बचा है?

पहले पुलिस कमिश्नर रहे अधिकारी ने वसूली का आरोप लगाया .फिर जो वसूली कर रहा था, उसने भी न्यायालय में पत्र दे दिया कि दूसरे मंत्री भी वसूली करवा रहे थे. इसका मतलब है कि पहले मंत्री के वसूली के आरोप भी उसने स्वीकार कर लिए हैं. सीबीआई जांच शुरू हो गई है, तो क्या इसको सर्वोच्च न्यायालय रोक सकता है? ऐसा लगता है कि शायद सुप्रीम कोर्ट जांच को रोकने का कोई निर्णय नहीं करे. लेकिन महाराष्ट्र सरकार जांच को पूरी तरह बीच के रास्ते पर ले जाने का प्रयास कर रही है. कोरोना महामारी के साथ ही वसूली की महामारी से महाराष्ट्र आज त्रस्त है. कोरोना महामारी देश में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में फैली हुई है. वसूली महामारी किस स्तर तक और कितनी गहराई तक फैली हुई है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा. वैसे महाराष्ट्र सरकार इस जांच को रोकना चाहती है, लेकिन जांच अगर नहीं रुके तब वसूली महामारी का नया वेरियंट सामने आएगा और महाराष्ट्र पुलिस तथा महाराष्ट्र सरकार इस वेरियंट से लहूलुहान होने से बच नहीं पाएंगे।


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