कलियुग और हनुमानजी के बीच संधि -दिनेश मालवीय

कलियुग और हनुमानजी के बीच संधि

-दिनेश मालवीय

इस वक्त घोर कलियुग का दौर चल रहा है. इसमें मनुष्य के सामने ऐसे संकट उपस्थित हो रहे हैं, जिनसे रक्षा बहुत कठिन है. लेकिन इस युग में सबसे तेज फल देने वाले देवता हनुमानजी के भक्तों पर इन संकटों पर प्रभाव नहीं होता. इसके सम्बन्ध में हनुमानजी और कलि के बीच एक संधि है.

आइये, इस संधि की कथा की चर्चा करते हैं. कलि के सहयोगी शनि हनुमानजी के हाथों पराजित होकर उनके अधीन हो चुके थे. राहु ने भी घबराकर हनुमानजी से कभी नहीं भिड़ने का संकल्प ले लिया. हनुमान जी का प्रभाव बढ़ता जा रहा था. यह देख कलि ने उनसे सीधे टकराने की सोची. सबसे पहले उसने उन लोगों को अपना निशाना बनाया, जो भगवान की भक्ति में लीन थे या यज्ञादि शुभ कर्मों मे लगे थे. धार्मिक अनुष्ठान असफल होने लगे और भक्तोंके सामने अनेक बाधाएं और संकट आने लगे. कलि धर्माचार्यों और शुभ आचरण वाले लोगों को परेशान करने लगा. भक्तगण हनुमानजी की शरण में गये और उनसे सहायता की याचना की.

हनुमानजी तो हनुमानजी ठहरे. उन्होंने धर्म कार्यों में बाधा डालने वाले कलि के सहयोगियों की लपक कर धुनाई शुरू कर दी. हनुमानजी के बल के आगे उनकी क्या बिसात थी. बेचारे भाग खड़े हुए. अपनी मुहिम नाकाम होते देख कलि ने हनुमानजी से सीधे सामना करने का निश्चय किया. एक भक्त की रक्षा में आये हनुमानजी ने कलि को उसे सताते हुए पाया. उन्होंने कलि को एक पंच ऐसा मारा कि बेचारा बेहोश होकर गिर गया. जिन हनुमानजी के मुक्के को रावण और कुम्भकर्ण जैसे महान योद्धा नहीं सह सके थे, तो कलि कहाँ लगता था. बहरहाल उसने पलटकर उन पर वार किया, लेकिन हनुमानजी पर कोई असर नहीं हुआ.

घबराकर कलि ने कहा कि हनुमानजी! मुझे आपकी शक्ति का परिचय मिल चुका है. लेकिन आप मेरी मजबूरी समझिये. मैं युग हूँ. मैं भी भगवान की  रचना हूँ और मुझे भी युग के अनुरूप कुछ कर्तव्य सौंपे गये हैं. आप कृपया मेरे रास्ते में न आयें.

हनुमानजीकहा कि यह बात सही है किमैंयुग को नहीं बदल सकता, लेकिन इस युग में अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना और सुरक्षा का भार भी तो भगवान ने मुझे दिया है. लिहाजा आप भी मेरे मार्ग में बाधा न बनें, तो ही ठीक है.

लिहाजा दोनों के बीच एक संधि हुयी, जिसके अनुसार यह तय किया हुआ कि जो लोग भगवान के प्रति सच्चे मन से समर्पित होकर हनुमानजी के संरक्षण में अनुष्ठान करेंगे, उन्हें कलि बाधा नहीं पहुँचाएगा. जो लोग पाप कर्मों में लगे हैं और कलियुग के असर में काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि दुर्गुणों में फँसे हैं, वे ही उसके ग्रास बनेंगे.

इसी संधि का असर है कि हनुमानजी में सच्ची श्रद्धा और भक्ति रखने वाले लोगों का कलि कुछ नहीं बिगाड़ पाता. उनसे दूर ही रहता है. इस तरह कलियुग में दो विभाग हो गये. जो लोग धर्म और भक्ति के सच्चे अनुयायी हैं, उनके राजा हनुमानजी हैं. वह उनकी रक्षा करते हैं और उन्हें सद्मार्ग पर आगे बढ़ने में सहयोग करते हैं. दूसरी ओर जो लोग पापों में लिप्त हैं, उनके राजा कलि हैं. वह उनके आचरण के हिसाब से उनकी गलत राह पर बढ़ने में मदद करते हैं.

इसलिए, जो लोग अच्छे मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें हनुमानजी की शरण लेना चाहिए. वह तत्काल फल देने वाले देवता हैं. उन्होंने तुलसीदास सहित असंख्य लोगों की मदद कर उन्हें सन्मार्ग तथा मुक्ति-पथ पर आगे बढ़ने में मदद की है और यह क्रम जारी है.

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