आसान नहीं होगा केन-बेतवा प्रोजेक्ट साकार करना: गणेश पाण्डेय

आसान नहीं होगा केन-बेतवा प्रोजेक्ट साकार करना

-समझौते के साथ विरोध का उठने लगा है धुआं

गणेश पाण्डेय
GANESH PANDEY 2
भोपाल. 28 साल में ही पन्ना नेशनल पार्क का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. इसकी वजह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना केन-बेतवा प्रोजेक्ट है. परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा भू-भाग पानी में डूब जाने के कारण बाघों के बढ़ रहे खुलने का क्या होगा? पन्ना टाइगर रिजर्व में रह रहे जानवरों का प्राकृतिक आवास फिर जाने के क्या दुष्परिणाम होंगे एवं जैव विविधता पर कितना घातक असर होगा? इन सवालों के बीच विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं. बुंदेलखंड की दबंग नेता पूर्व मंत्री कुसुम मेहेदले ने तो आंदोलन तक की धमकी दे दी है. मेहदेले का कहना है कि इससे गिद्ध और बाघों का रहवास खत्म हो जाएगा. टुरिज्म को भी हानि होगी.यह बात अलग है कि समझौते के बाद भी प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारना आसान नहीं है.

केन-बेतवा प्रोजेक्ट के अंतर्गत 5500 हेक्टेयर एरिया अकेले पन्ना नेशनल पार्क का प्रभावित हो रही है. इसमें 4200 हेक्टेयर कोर एरिया और 1300 हेक्टेयर बफर एरिया है. इसके अलावा 500 हेक्टेयर वन भूमि पन्ना एवं छतरपुर और 17-18 हेक्टेयर जंगल टीकमगढ़ जिले की प्रभावित होगी. कोर एरिया में बाघों और गिद्धों का रहवास भी शामिल है. यानी प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन से बाघ और गिद्ध पूरी तरह से डिस्टर्ब हो जाएंगे. पन्ना नेशनल पार्क के डिस्टर्ब होने होने पर प्रदेश में 2 नेशनल पार्क नौरादेही और दुर्गावती सेंचुरी को नेशनल पार्क में कन्वर्ट करना पर होगा. इसके अलावा उत्तर प्रदेश के रानीपुर सेंचरी को भी नेशनल पार्क के रूप में डेवलप करना पड़ेगा.
Cane Betwa Project

ऐसी मिली प्रोजेक्ट को सशर्त मंजूरी
- 6000 हेक्टेयर भूमि पर बनी करण क्षतिपूर्ति के लिए 3500 करोड़ की आवश्यकता.
- नेट प्रेजेंट वैल्यू के रूप में 4500 करोड़ जमा करने होंगे.
- पार्क के लिए कुल प्रोजेक्ट राशि का 5% हिस्सा जमा करना होगा. 2015 में प्रोजेक्ट की राशि 9000 करोड़ अनुमानित थी. उस समय 450 करोड़ रुपए मांगे गए थे. यह राशि अब बढ़कर एक हजार करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.
- जल ग्रहण क्षेत्र उपचार के लिए केचमेंट एरिया विकसित करना, जिस पर 100 करोड़ रुपए खर्च अनुमानित है.

गांव का विस्थापन सबसे मुश्किल
प्रोजेक्ट को तब तक जमीन पर नहीं उतारा जा सकता जब तक की तेरा गांव का विस्थापन नहीं कर लिया जाता. विस्थापन का कार्य सबसे मुश्किल कार्य होगा. प्रोजेक्ट पर एमपी और यूपी में समझौता होने के साथ ही गांव के लोग आंदोलित होने लगे हैं. ये गांव ऐसे हैं, जिन्हें पन्ना नेशनल पार्क के आकार लेने के बाद भी विस्थापन नहीं किया जा सका था.

मेहदेले की अगवाई में आंदोलन की तैयारी
पूर्व मंत्री कुसुम मेहदेले (जीज्जी) केन-बेतवा प्रोजेक्ट को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे दी है. उनके साथ पन्ना राजघराने की जीतेश्वरी देवी ने भी 'जीज्जी' के आंदोलन में हिस्सा लेने का ऐलान कर दिया है. जीतेश्वरी देवी का कहना है कि जहां यह बांध प्रस्तावित है, वह किंबरलाइट स्टोन पट्टी है. यह बुरी तरह प्रभावित होगी और हीरा बनने की प्रक्रिया थम जाएगी. जीतेश्वरी देवी ने केन-बेतवा लिंक परियोजना को पन्ना वासियों के लिये अभिशाप बताते हुए कहा है कि सरकार बार-बार पन्ना वासियों के साथ छल कर रही है. इस परियोजना के कारण केन नदी का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा और इस जीवनदायिनी नदी के ख़त्म हो जाने के कारण यहां की जीव विविधता पर गहरा असर पड़ेगा.

Priyam Mishra



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