कैसे लोगों की एनर्जी चुरा कर आप भी जीवन की ऊँचाइयों को छू सकते हैं ?


स्टोरी हाइलाइट्स

  कैसे लोगों की एनर्जी चुराकर आप भी जीवन की उंचाईयों को छू सकते हैं।   आइये मित्रों इस रहस्य को समझते हैं। मित्रों अभी कुछ समय पहले मैंने अपने एक लेख में लिखा कि "भगवान् मूर्ती में नही बल्कि आपके मन में होते हैं, और आपके ही मन से "ध्यान" की ऊर्जा पाकर एक पत्थर भी भगवान् बन जाता हैं। मित्रों "दर्शन-शास्त्र" से जुड़ने के बाद मैंने यह पाया कि संसार में आज हमारे साथ जो कुछ भी हो रहा हैं वो हमारे मन के "ध्यान"  की वजह से हो रहा हैं। मन ऊर्जावान हैं और इसको क्रमश: आत्मा और परमात्मा से ऊर्जा प्राप्त होती हैं, और इस मन का निरंतर ध्यान जिस भाव के साथ जिस विषय पर होता हैं, वैसी ही ऊर्जा का प्रवाह उधर होने लगता हैं। मित्रों जैसे भगवान् "राम" की मूर्ती को देखते समय आपके मन में या भाव होता हैं कि ये भगवान् हैं, जो हमारा कल्याण करते हैं। और ये ही नही मित्रों भगवान् "राम" का नाम लेते ही उनसे जुड़े सभी तथ्य हमारे अवचेतन मन से निकलकर चेतन मन पर उजागर हो जाते हैं। मित्रों यह प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से स्वत: ही संपन्न होती हैं और इसके चलते आपके मन के इन्ही भावों के साथ आपका "ध्यान" उस मूर्ती पर बनता हैं। और आपका ध्यान जैसे भाव के साथ होता है वैसी ही ऊर्जा का प्रवाह उस मूर्ती की और हो जाता हैं जिसके चलते उस मूर्ती के चारों और वैसा ही "चुम्बकीय-क्षेत्र" यानी आभामंडल तैयार होता हैं। और जितने अधिक लोगों का ध्यान उस भाव के साथ उस मूर्ती पर होता हैं उसका आभामंडल उतना ही कल्याणकारी और शक्तिशाली होता जाता हैं। मित्रों हमारे मन से ये जो ऊर्जा (Magnetic Waves) निकलती हैं, उसे हम खुली आँखों से नही देख सकते। पर मन से ऊर्जा निकलती हैं ये ही सत्य हैं। आपने "नजर" लगने के बारे में तो सुना ही होगा। हालाँकि नजर तो सबकी एक जैसी ही होती हैं, दिखता तो सबको एक जैसा ही है। नजर ना तो अच्छी होती हैं और ना ही बुरी होती हैं। बस हर नजर के पीछे अच्छा-बुरा भाव जुड़ा होता हैं। किसी ने आपको बुरी नजर से देखा तो उसके मन से निकली नकारात्मक ऊर्जा आपके आभामंडल को खंडित करती हैं, और अच्छे भाव से आपको देखा तो आपका आभामंडल सकारात्मक ऊर्जा से पोषित होता हैं। मित्रों जब एक पत्थर मूर्ती, लोगों के ध्यान की ऊर्जा पाकर भगवान् बन सकती हैं, या लोगों की अच्छी-बुरी नजर आपको प्रभावित कर सकती हैं, तो लोगों के ध्यान की यही ऊर्जा आपको महान भी तो बना सकती हैं। पर कैसे ???    आसान हैं दोस्तों... बस आपको लोगों के समक्ष स्वयं को एक बेहतर इंसान के रूप में प्रस्तुत करना हैं, किसी के भी मन में आपके प्रति किसी भी प्रकार का बुरा भाव ना रहे, ऐसा बनना हैं। लोगों का ध्यान आप पर जितना अच्छा होगा उतना ही उनकी सकारात्मक ऊर्जा से आपका आभामंडल पोषित होगा। मित्रों अगर आपका स्वभाव घमण्डी किस्म का हैं, तो मान के चलिये आपका घमण्ड चूर-चूर होने वाला हैं। क्यों ? क्योंकि जिन लोगों का स्वभाव घमण्डी होता हैं, उनके प्रति लोगों का भाव ये बनता हैं कि "भगवान् इसका घमण्ड चूर-चूर कर देगा"। बस मित्रों लोगों के इसी ध्यान के चलते ब्रह्माण्ड में आपके घमण्ड को चूर-चूर करने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती हैं जिसके चलते आपका ऐसी समस्या से सामना होता हैं जो आपके घमण्ड को चूर-चूर कर देती हैं। मित्रों आप जो भी काम करते हो उस काम की सफलता-असफलता का पता लगाना हैं तो लोगों के नेचर को पकड़ना सीखो, कि आपके इस काम के प्रति लोगों का भाव कैसा हैं। आपके काम के प्रति अधिकतर लोगों की क्या भावना हैं। बस अगर आपने "नेचर" को समझना सिख लिया तो दुनिया में आपसे कोई चीज अछूती ना रहेगी। मित्रों आप आज ये बात भलीभाँति समझ लीजिये कि आज लोगों का जैसा ध्यान आप पर हैं, उनके ध्यान की ऊर्जा पाकर आप वैसे ही परिणामों को प्राप्त होंगे। यह ईश्वरीय कार्यप्रणाली का ही एक हिस्सा हैं जो लोगों के ध्यान के जरिये आप ही के स्वभावनुसार आपको फल तक पहुंचाता हैं। अब अगर आप धनवान बनना चाहते हैं तो अपने और अपने परिवार वालों का रहन-सहन और व्यवहार ऐसा बनाइये की लोगों को लगे की आपका परिवार धनवान और संपन्न हैं। लोगों के लगातार ऐसे ध्यान के चलते उनके मन से निकली वैसी ही ऊर्जा आपको उस परिणाम तक पहुँचा देगी। पर मित्रों ये प्रक्रिया धीरे-धीरे प्रारम्भ करें। और इसमें लोगों को ऐसा भी ना लगे की आप दिखावा कर रहे हैं, नही तो उनका ध्यान अगर ऐसा बन गया की आप दिखावा कर रहे हैं, तो आप जीवन भर दिखावा ही करते रह जायेंगे। तो मित्रों इसे कहते हैं लोगों की ऊर्जा को चुरा कर जीवन की ऊंचाइयों को छूना। मित्रों बड़े-बड़े फिलोसॉफर अपने इसी ज्ञान के सहारे लोगों की एनर्जी चुरा कर अपने अलग-अलग पंथ बनाकर अमर हो गये। और आज भी इस फिलोसोफी को समझने वाले बड़े-बड़े गुरु लोग, लोगों को सम्मोहित कर अपने समागम द्वारा हजारों लोगों के ध्यान को अपनी और आकर्षित कर अपना नाम कमा रहे हैं। आइये दोस्तों आज ही अपने स्वभाव में परिवर्तन की शुरुआत कर, एक सुन्दर जीवन की और कदम बढाइये। सुनहरा भविष्य आपका इन्तजार कर रहा हैं। Good Luck... राधे-राधे... लेखक - गोपाल अरोरा