मध्यप्रदेश: किसानों के अनुदान की 40 करोड़ की राशि खुर्द-बुर्द करने का ब्लू प्रिंट तैयार गणेश पाण्डेय 

मध्यप्रदेश: किसानों के अनुदान की 40 करोड़ की राशि खुर्द-बुर्द करने का ब्लू प्रिंट तैयार – गणेश पाण्डेय

ganesh pandey

- 2019 से हो रहा है केंद्र की गाइडलाइन का उल्लंघन

- सौ करोड़ के घोटाले में फंस चुके हैं एमपी एग्रो और उद्यानिकी संचालनालय के अफसर

भोपाल. भारत सरकार की गाइडलाइन का उल्लंघन कर किसानों के हिस्से की 40 करोड़ अनुदान राशि को खुर्द-बुर्द करने का ब्लूप्रिंट तैयार हो गया है. उद्यानिकी संचालनालय ने एमपी ट्रेजरी कोड के नियम 284 का उल्लंघन करते हुए भारत सरकार विभिन्न योजनाओं से प्राप्त अनुदान की राशि एमपी एग्रो के खाते में ट्रांसफर कर दी गई है. दिलचस्प पहलू यह है कि इससे पहले भी केंद्र की योजनाओं के 100 करोड़ पर राशि घपले-घोटाले की भेंट चढ़ चुकी है. इस मामले में ईओडब्ल्यू तत्कालीन आयुक्त उद्यानिकी एम काली दुरई और एमपी एग्रो के अफसरों को नोटिस जारी कर जांच कर रही है.

100 करोड़ रुपए के घोटाले में फंसे पूर्व उद्यानिकी आयुक्त एम काली दुरई की तरह ही मौजूदा आयुक्त मनोज अग्रवाल ने भारत सरकार गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए किसानों से जुड़े विभिन्न योजनाओं की 40 करोड़ पर अनुदान की राशि एमपी एग्रो के खाते में अग्रिम भुगतान करने के आरोप हैं . जबकि यह राशि डीबीटी के अंतर्गत किसान हितग्राहियों के खाते में भुगतान किया जाना था. लेकिन एमपी एग्रो और उद्यानिकी संचालनालय के अफसर कमीशन बाजी के फेर में किसानों को सीधे भुगतान नहीं कर रहे हैं.

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मौजूदा आयुक्त उद्यानिकी मनोज अग्रवाल ने प्रधानमंत्री कृषि योजना में लगभग 15 करोड़, नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन मैं 18 करोड़, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत साढे तीन करोड़, राष्ट्रीय औषधि पौधा मिशन के अंतर्गत 4 करोड़ रूपया एमपी एग्रो को अग्रिम भुगतान कर दिया है. जबकि यह राशि सीधे हितग्राहियों के खाते में ट्रांसफर किए जाने चाहिए. सूत्रों ने बताया कि एमपी एग्रो को सीधे भुगतान किए जाने के बाद उद्यानिकी विभाग केंद्र सरकार को उपयोगिता प्रमाण पत्र भी फर्जी तौर पर भेजता रहा है. यह सिलसिला वित्तीय वर्ष 2019-20 से शुरू होकर आज भी जारी है. हालांकि तत्कालीन आयुक्त उद्यानिकी एवं काली दुरई और एमपी एग्रो के अधिकारी 100 करोड़ घोटाले की जद में भी आ चुके हैं. इसके बावजूद भी योजना के क्रियान्वयन का स्वरूप नहीं बदला जा रहा है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि एमपी एग्रो वित्तीय वर्ष 2019-20 में उद्यानिकी संचालनालय से प्राप्त 25 करोड़ रुपए अब तक खर्च नहीं कर पाया.


* उद्यानिकी की राशि से एमपी एग्रो की सेहत सुधरी

भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं से प्राप्ति राशि उद्यानिकी संचालनालय द्वारा डीबीटी का उल्लंघन करते हुए एमपी एग्रो को दिए जाने से निगम की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है. घाटे में चल रहे एमपी एग्रो को अपने अधिकारियों कर्मचारियों को वेतन बांटने के लाले पड़ गए थे. उद्यानिकी से मिलने वाले करोड़ों रुपए एफडी अकाउंट में जमा कर उसके ब्याज से एमपी एग्रो अपने कर्मचारियों के वेतन बांट रही है.

ईओडब्ल्यू कर रही है 100 करोड़ के घोटाले की जांच

उद्यानिकी विभाग में 100 करोड़ के यंत्री के घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू के साथ-साथ लोकायुक्त संगठन भी जांच कर रहा है. जांच कर रही एजेंसी ईओडब्ल्यू ने एमपी एग्रो के आधा दर्जन अधिकारियों एवं पूर्व आयुक्त उद्यानिकी एम काली दुरई के साथ-साथ संचालनालय के एक दर्जन अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ शुरू कर दी है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि जांच प्रारंभ होते ही पूर्व आयुक्त काली दुरई मुख्यालय से लापता है.


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