किसे प्रणाम नहीं करना चाहिए -दिनेश मालवीय

किसे प्रणाम नहीं करना चाहिए

-दिनेश मालवीय

हमारी संस्कृति में व्यक्ति को सभी का आदर-सम्मान करने की शिक्षा दी गयी है. ऐसा करना भी चाहिए. हमारी ही एक मात्र ऎसी संस्कृति है, जिसने प्रमाण करने और चरण-स्पर्श करने की परम्परा है. किसी को प्रणाम करना सबसे सम्मानजनक अभिवादन है. आप जिसे प्रणाम करते हैं, वह स्वयं को बहुत सम्मानित महसूस करते हुए आपके प्रति अच्छा भाव रखता है.लेकिन प्रणाम करने की विधि और नियम निर्धारित हैं. शास्त्रों में कुछ लोगों को और कुछ स्थितियों में प्रणाम करने की मनाही की गयी है.

शास्त्रों के अनुसार नास्तिक और मर्यादा को न मानने वाले व्यक्ति को प्रणाम नहीं करना चाहिए. नास्तिक से तात्पर्य है, कि जिसे प्रणाम आदि संस्कार से विरोध हो. साथ ही कृतध्न यानी उपकार करने वाले का उपकार न मानने वाले, ग्रामपुरोहित, चोर और दुष्ट व्यक्ति को प्रणाम नहीं करना चाहिए, भले ही वह कोई भी हो.

नास्तिक को प्रणाम आप कर भी लेंगे तो वह न उसका मोल समझेगा और न आपको आशीर्वाद ही देगा. ऐसा भी हो सकता है कि वह आपकी खिल्ली उड़ा दे. जो व्यक्ति मर्यादा तोड़ने वाला, अहसान फरामोश, चोर और दुष्ट हो वह इस योग्य ही नहीं होता कि उसे प्रणाम किया जाए. प्रश्न उठ सकता है कि गाँव के पुरोहित को प्रणाम करने की मनाही क्यों की गयी है. दरअसल वह सब के पापों का भागी होता है. यजमान का पाप आचार्य और पुरोहित को मिलता है. इसलिए उसके चरणस्पर्श करने को मना किया गया है. इसी कारण ब्राह्मण पुरोहिताई को बहुत नीचा मानते हैं. उन्हें यजमानों से दान के साथ उनके पाप भी मिलते हैं. इनसे बचने के लिए उन्हें बहुत कठिन साधनामय जीवन जीना होता है.

स्त्रियों को प्रणाम के मामले में भी कुछ विधि-निषेध निर्धारित किये गये हैं. जिस स्त्री ने अपने पति की ह्त्या की हो, जो किसी अन्य पुरुष से सम्बन्ध रखती हो, जो सूतिका हो, जिसने गर्भपात कराया हो, और क्रोध करने वाली है, उसे कभी प्रणाम नहीं करना चाहिए. शास्त्रों में गर्भपात को महापाप माना गया है. ऐसी स्त्री आपको या तो आशीर्वाद नहीं देगी और अगर देगी तो उसका कोई फल नहीं होने वाला.

जो व्यक्ति पाखंडी हो, संस्कार से भ्रष्ट हो, पागल, पापी और धूर्त हो उसे भी प्रणाम नहीं करने को कहा गया है. किसी को ऐसी अवस्था में प्रणाम नहीं करना चाहिए, जब वह आपको आशीर्वाद देने की स्थिति में न हो. जैसे, वह पानी में खड़ा हो, दांत मंजन कर रहा हो, कुल्ला कर रहा हो, भोजन कर रहा हो, हाथों में भिक्षा का अन्न लिए हुए हो, सोया हुआ हो, तर्पण कार्य कर रहा हो, देव-पूजन या हवन-यज्ञ कर रहा हो आदि. ऐसी स्थितियों में वह प्रणाम करने पर शास्त्रोक्त विधि से आशीर्वाद नहीं दे सकेगा.

जिस व्यक्ति ने स्नान न किया हो, जिसके मुँह-हाथ जूठे हों, जो गीले वस्त्र पहने हो, वजन ढो रहा हो, स्त्री के साथ क्रीड़ा में आसक्त हो, बालक के साथ खेल रहा हो और जिसके हाथ में फूल और कुश हों, ऐसे व्यक्ति को प्रणाम नहीं करना चाहिए, क्योंकि यातो वह प्रणाम करने योग्य नहीं होता या वह विधिवत आशीर्वाद देने स्थिति में नहीं होता.

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