जानिए बच्चे कहना क्यों नहीं मानते, क्यों बिगड़ गये ? उल्टा क्यों बोलते हैं ? पढ़ाई में क्यों कमजोर हैं ?  अतुल विनोद 

जानिए बच्चे कहना क्यों नहीं मानते, क्यों बिगड़ गये ? उल्टा क्यों बोलते हैं ? पढ़ाई में क्यों कमजोर हैं ?  अतुल विनोद 
आजकल परवरिश से जुड़े हुए अनेक सवाल पैरेंट्स के सामने मुंह बाए खड़े हैं. ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब हम आपको दे रहे हैं.  कुछ बच्चे खूब मेहनत करके भी अच्छा रिजल्ट नहीं ला पाते हैं.  जब देखो तब टीवी/ मोबाइल/ खेल-कूद, जिद बहुत करते हैं, उलटा बहुत बोलते हैं, पढ़ाई में मन्न नहीं लगाते, Exams  में भूल जाते हैं, कैलकुलेशन में अच्छे नहीं हैं, मैथ्स/ साइंस/ इंग्लिश आदि से डरते हैं. खुश होकर पढ़ाई नहीं करते हैं . 

कभी - कभी तो झूठ भी बोलते हैं, समय प्रबंधन की भारी कमी है, एक दूसरे से लडते - झगड़ते रहते हैं, सेहत पर धयान नहीं देते, मॉर्निंग वाक व योगा नहीं करते आदि कई बच्चे पढाई ना करने के बहाने बनाने में उस्ताद होते हैं . ये सब सवाल आज के पेरेंट्स के वो सवाल हैं जिनके जवाब शायद ही उन्हें मिलते हों. पेरेंट्स की शिकायत होती है कि उनके बच्चे कहना नहीं मानते, कोई बच्चा मां बाप के कहने पर सुनता क्यों नहीं है ?  इसके पीछे भी मां-बाप ही हैं. बच्चे जन्म से मां-बाप की अनसुनी का जीन लेकर नहीं पैदा होते, आपके ही बच्चे हैं, वो आज जैसे भी हैं आपके, उनके टीचर्स और आसपास के माहौल की देन है. 

kidsss
बच्चे स्वाभाविक रूप से एक स्वतंत्र आत्मा होते हैं. जब वो छोटे होते हैं तो उनके स्वभाव में लड़कपन, स्वतंत्रता, अल्हड़ता और मौज होती है.  छोटे बच्चों को यदि हम बात-बात पर रोकेंगे तो वो मानने वाले नहीं है|  क्योंकि उनके स्वभाव स्वतंत्र है उन्हें नहीं मालूम कि उन्हें किसकी बात माननी है, किसकी बात नहीं. इसलिए बच्चे पर ज्यादा अनुशासन मत थोपिए,  ना ही अपनी बात को जोर जबरदस्ती मनवाने की कोशिश करें, बच्चों से बात मनवाने के लिए इंस्ट्रक्शंस का सहारा मत लीजिए, उनको आदेशात्मक लहजे में निर्देश मत दीजिए.

यदि बच्चों से आपको कोई काम करवाना है तो सवाल कीजिए ? जैसे आपको किसी बच्चे से पानी मंगवाना है तो आप उससे कहिए कि क्या एक गिलास पानी ला सकते हो ?  जब भी आप उनसे प्रश्न के रूप में किसी काम के लिए कहेंगे तो वो इसके लिए सहज ही तैयार हो जाएंगे.  यदि आप बच्चे से यह कहते हैं कि पानी लेकर आओ.  तो वो आपकी बात मानने से इंकार कर सकता है. बच्चा भले ही कितना छोटा हो हुकूमत पसंद नहीं करता.  ये इंसान का जन्मजात गुण हैं.  यही गुण बच्चे में भी होता है.  जैसे छोटा से छोटा जीव जंतु भी मालकियत पसंद नहीं करता वैसे ही बच्चा भी मालकियत पसंद नहीं करता. 

यदि आप बार-बार बच्चों को निर्देश देते रहेंगे तो वो आपकी बातों को मानना बंद कर देंगे. बच्चा एक दो बार आपकी बात मानेगा लेकिन बार-बार नहीं. खासकर जब वो अपनी मस्ती में मस्त है उसे एक दम से डिस्टर्ब न करें. उसकी मौज में बेवजह खलल न दें, इंसान का सबसे सुखद समय बचपन का ही होता है. इस ऐज में उन पर नजर रखना ज़रूरी है लेकिन इस आड़ उन्हें इस अमूल्य समय का आनंद लेने से रोकना आगे चलकर एडवर्स रिजल्ट देगा. 

जब बच्चे छोटे हो तो उन्हें ऐसा मौका मत दीजिए कि वो आपकी बातों की अवहेलना करने लग जाए.  ये सवाल ही गलत है कि बच्चा आपका कहना नहीं मानते?  क्या बच्चा आपका कहना मानने को बाध्य है ?  इसलिए कि आप उसके माता-पिता हैं, इसलिए कि वो आपके ऊपर निर्भर है, इसलिए कि आप ज्यादा समझदार हैं ? आप मान सकते हैं कि आप उस बच्चे से ज्यादा समझदार हैं और उसे निर्देश देने के लिए स्वतंत्र हैं.  लेकिन आप जब उस बच्चे के रूप में खुदको देखेंगे उसकी जगह पर अपने आप को रखेंगे तो आपको पता चलेगा कि आप का निर्देश देना उसे किस तरह से परेशान करता है. आपके आदेशात्मक शब्द उसे चोट पहुंचाते हैं.  जैसे जैसे वो बड़ा होता है उसका अहंकार और बड़ा होता जाता है.  आपका कहना नहीं मान कर वो मन ही मन प्रसन्न होता है क्योंकि वो आपको पसंद नहीं करता. 

जब बच्चे बड़े होते हैं वो मां-बाप के खिलाफ क्यों जाते हैं ? दरअसल उनके मन में बचपन में मां बाप के प्रति खुन्नस, बदले, और प्रतिशोध का भाव आ जाता है. इसलिए बड़े होने पर वो अपने सबकॉन्शियस माइंड की प्रोग्रामिंग के कारण, माँ बाप को दुखी देखकर खुश होते हैं. उन्हें नहीं मालूम होता कि वे ऐसा बिहेव क्यों कर रहे हैं लेकिन वे ऐसा कर जाते हैं. 

दरअसल बच्चा हो या बड़ा वो एक मन है. एक ऐसा मन जो वही जनता और सोचता समझता है जो उसने सुना, पढ़ा और देखा है. इसलिए बच्चों को दोष देने से पहले 100 बार सोच ले, आप ही तो उसके अनचाहे व्यक्तित्व का कारण तो नहीं.  कुछ बच्चे खूब मेहनत करके भी अच्छा रिजल्ट नहीं ला पाते हैं . इसका कारण भी आपकी परवरिश में छिपा है. उनका स्वतंत्र विकास ही उनकी दक्षता की गारंटी है. जब देखो तब टीवी/ मोबाइल/ खेल-कूद, इसकी आदत भी आप ही लगाते हैं. उनके साथ खेलने या समय बिताने से बचने या खुद मोबाइल सहित दुसरे काम करने के लिए आप उन्हें इस तरह की आदत लगाते हैं. टीवी/ मोबाइल कि आदत गलत है लेकिन खेलकूद उनका स्वभाव है. जिद बहुत करते हैं , जिद करना छूटेगा यदि आप उनकी हर मांग को तुरंत पूरा न करें, कोई मांग पूरी भी करें तो थोड़ा समय लें. 

चाहे बच्चों का उग्र स्वभाव हो या पढ़ाई में कमजोर होने की बात , ज्यादातर मामलों में माता पिता की गलत परवरिश ही ज़िम्मेदार होती है. ज्यादा टीवी, मोबाइल देखने से भी वे चिड़चिडे हो जाते हैं. कमजोर याददाश्त का कारण या तो उन्हें बार-बार कमजोर कहने का नतीजा है, या प्रोत्साहन न मिलने का परिणाम.  कई बार परवरिश के साथ-साथ  उनकी कमजोरियों की वजह हेरेडिटी, गलत खानपान, एटमॉस्फेयर या एक्सीडेंटल ड्रामा भी हो सकते हैं.



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