आईए वैदिक धर्म को जानें –

Let's know Vedic religion-Newspuran-02

आईए वैदिक धर्म को जानें –

 

प्रश्न – हम सभी कोैन हैं?

उत्तर – हम सभी मनुष्य जाति है ।

प्रश्न – मनुष्यों का धार्मिक नाम क्या है?

उत्तर – सभी मनुष्यों का धार्मिक नाम “आर्य” है।

प्रश्न – समस्त मानव जाति के धर्म का नाम क्या है?

उत्तर – सत्य सनातन वैदिक धर्म

प्रश्न – हमारे मुख्य धर्म ग्रंथ क्या हैं?

उत्तर – पवित्र “चार वेद” मानव मात्र के मुख्य धर्म ग्रंथ हैं।

प्रश्न – मानव मात्र के अन्य धार्मिक ग्रंथ कौनसे हैं?

उत्तर – चार उपवेद, चार ब्राह्मण ग्रंथ, छ: वेदांग, ग्यारह उपनिषद, छ: दर्शन शास्त्र, मनुस्मृति, बाल्मिक रामायण, व्यास कृत महाभारत, सत्यार्थ प्रकाश, ऋगवेदादिभाष्यभूमिका।

प्रश्न – ईश्वर का मुख्य नाम क्या है ?

उत्तर – ईश्वर का मुख्य नाम “ओ३म्” है।

प्रश्न – धर्म की प्रथम आज्ञा क्या है?

उत्तर – सत्यं वद धर्मं चर स्वाध्यायान्मा प्रमदः। आचारस्य प्रियं धनमाहृत्य प्रजातन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः॥

अर्थात सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो, स्वाध्याय (स्वयं को धर्म पुस्तकों अनुसार पढने में ) में आलस्य मत करो। अपने श्रेष्ठ कर्मों से साधक को कभी मन नहीं चुराना चाहिए।

प्रश्न –  धर्म का मूल मंत्र क्या है?

उत्तर – वेदों का मूल मंत्र गायत्री हैं –

ओ३म् भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

भावार्थ- उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

प्रश्न – मनुष्य की जीवन यात्रा लक्ष्य क्या है?

उत्तर – योग से मोक्ष तक पहुँचना।

प्रश्न – . धर्म में धार्मिक कर्म क्या है?

उत्तर – ऋषियों ने ये बोध कराने हेतु पाँच महायज्ञों का विधान किया।

  • ब्रह्मयज्ञ = सन्ध्या व वेद स्वाध्याय
  • देवयज्ञ = अग्निहोत्र
  • पितृयज्ञ = माता-पिता की सेवा।
  • अतिथियज्ञ = घर आए विद्वानों की सेवा।
  • बलिवैश्वदेव यज्ञ = सहयोगी प्राणियों पशु आदि की सेवा।

प्रश्न – धर्म का मूल सिद्धांत क्या है?

उत्तर – वसुधैव कुटुम्बकम्‌।

सारी पृथ्वी एक कुटुंब/परिवार के समान।” तथा विश्व का कल्याण हो।

प्रश्न – धर्म के लक्षण क्या है?

उत्तर – दस लक्षण हैं-

  • धर्ति: क्षमा दमोऽस्तेयं शौचम् इन्द्रियनिग्रह धीविर्द्दया सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।
  • धृति- सुख, दुःख , हानि, लाभ, मान, अपमान मे धैर्य रखना।
  • क्षमा- शरीर मेंं सामर्थ्य होने पर भी बुराई का प्रतिकार न करना या बदला न लेना क्षमा है।
  • दम- मन में अच्छी बातों का चिंतन करना बुरी बातों को दबाना हटाना।
  • अस्तेय- बिना दूसरे की आज्ञा के कोई वस्तु न लेना चोरी न करना।
  • शौच- शरीर की आत्मिक और शारीरिक शुद्धि रखना।
  • इन्द्रियनिग्रह- हाथ, पांव, आंख, मुख, नाक आदिको अच्छे कार्यो मे लगाना। इन्द्रियों को संयम में रखना।
  • धी- बुद्धि बढ़ाने हेतु प्रयत्न करना।
  • विद्या- ईश्वर द्वारा बनाये गए प्रत्येक पदार्थ का ज्ञान प्राप्त करना तथा उनसे उपयोग लेना।
  • सत्य- जो हम जानते है उसको वैसा ही अपने द्वारा कहना मानना सत्य कहलाता है। हमेशा सत्य ही बोलना।
  • अक्रोध- इच्छा से उत्पन्न क्रोध।

प्रश्न – धर्म का मूल उदेश्य क्या है?

उत्तर – कृण्वन्तोविश्वमार्यम् जिसका अर्थ है – विश्व को आर्य ( श्रेष्ठ /उत्तम) बनाते चलो।

प्रश्न – हमारा रक्षा सिद्धांत क्या है?

उत्तर – अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च: l”

अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है और धर्म रक्षार्थ हिंसा भी उसी प्रकार श्रेष्ठ है।


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