महाराष्ट्र में हिली सरकार: राजनीतिक उलटफेर की पूरी जमीन तैयार

News Puran ने सबसे पहले यह बताया था कि मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के सामने विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो रखने का मामला चंदे और वसूली से जुड़ा हुआ है| पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह का मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजा गया पत्र हमारी सूचनाओं को पुष्ट करता है|

हमने अपने पहले वीडियो में बताया था कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख तक कार्रवाई की जद में आएंगे| अपराध और राजनीतिक गठजोड़ के इस पूरे मामले में सबसे पहली तलवार महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लटकी हुई है| अनिल देशमुख को गृह मंत्रालय से हटाना ही पड़ेगा| बैठकों का दौर चल रहा है|

शरद पवार भले ही कह रहे हो कि कोई सबूत नहीं है, लेकिन सबूत भी सामने आएंगे और राजनीतिक उलटफेर भी सामने आएगा| चंदा और हफ्ता वसूली का खेल कोई नया नहीं है| अपराध और राजनीति का गठजोड़ भी कोई नया नहीं है| लेकिन यह सब कुछ दबे छुपे ढंग से चलता रहता है| 

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ऐसा कम होता है की कि किसी से भी बड़ी रकम लेने के लिए उसे आतंकवादियों के नाम पर धमकाने का नाटक रचा जाए और जांच के नाम पर पैसा भी वसूला जाए और उसे उपकृत करने का एहसान भी बताया जाए| यह भी देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के साथ किया जाए|

वो अंबानी जिसके बारे में राजनेता ही आरोप लगाते हैं कि मुकेश अंबानी तो देश की सरकार चला रहे हैं| अभी तो इस पूरे मामले छोटे-छोटे मोहरे सामने आ रहे हैं, असल चेहरे सामने आने बाकी हैं| जो संकेत मिल रहे हैं उसमें बड़े पुलिस अफसरों की गर्दन भी फंसती नजर आ रही है|

महाराष्ट्र सरकार की कश्ती भी डावाडोल हो रही है| गृह मंत्रालय और महाराष्ट्र पुलिस की इज्जत तार तार हो रही है| महाराष्ट्र पुलिस पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है| पूर्व पुलिस कमिश्नर जो अभी भी होमगार्ड कि डीजीपी है ने अपने पत्र में साफ-साफ कहा है कि उन्होंने सारे मामले की ब्रीफिंग मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शरद पवार को दे दी थी|

इस पत्र से कई सवाल खड़े हो रहे हैं| जब मुख्यमंत्री को यह बता दिया गया था तो वह चुप क्यों थे? सचिन बाजे शिव सेना में रहते हुए उद्धव ठाकरे का बहुत नजदीकी रहा है| पूर्व पुलिस आयुक्त भी कटघरे में है कि उन्होंने यह जो भी पत्र में लिखा है| उसको पद पर रहते हुए क्यों नहीं उजागर किया? उनकी भी किसी न किसी रूप में भागीदारी तो बनती ही है|
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सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या होती है कि वह मनमाफिक पदस्थापना पर रहना चाहते हैं| इसी का राजनीतिक लोग दुरुपयोग करते हैं और यहीं से वसूली का राजनीतिक हस्तक्षेप का खेल शुरू हो जाता है| हस्तक्षेप का विरोध नहीं होता तो उसका कोई प्रमाण नहीं होता| राजनीतिक दल, बड़े नेता, और सरकार में बैठे बड़े लोग अफसरों को मौखिक निर्देश देते हैं, इसीलिए राजनीतिक लोग बच निकलते हैं|

जिस सरकार और पुलिस पर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है वहीं सरकार और पुलिस अगर हफ्ता वसूली के लिए अपराध का क्रिएशन करें तो फिर तो कुछ भी नहीं बचा है| चोर और सिपाही का खेल बचपन में खेला जाता है| लेकिन महाराष्ट्र में चोर और सिपाही का खेल पुलिस स्वयं खेल रही है| महाराष्ट्र की राजनीतिक आकाश पर जो बादल मंडरा रहे हैं| वह बरसने के लिए बेताब हैं|

मुकेश अंबानी को धमकाने के लिए रचे गए आपराधिक घटनाक्रम में जैसे-जैसे जांच बढ़ती जा रही है कई चेहरे पर नकाब होते जा रहे हैं| अब तो अब तो केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी भी सामने आ गई है| राजनीतिक उलटफेर की पूरी जमीन तैयार है|

Priyam Mishra



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