हिंदुस्तान(INDIA) की आज़ादी का लेखा-जोखा, जंग-ए-स्वतंत्रता(Freedom) की मुख्य घटनाएँ

हिंदुस्तान(INDIA) की आज़ादी का लेखा-जोखा, जंग-ए-स्वतंत्रता(Freedom) की मुख्य घटनाएँ

Main accounts of freedom of India (INDIA), Jung-e-Freedom

हिंदुस्तान(INDIA) की आज़ादी का लेखा-जोखा, जंग-ए-स्वतंत्रता(Freedom) की मुख्य घटनाएँ

हम हिंदुस्तान(INDIA) की स्वतंत्रता(Freedom) की 74 वीं वर्षगांठ(anniversary) मना रहे हैं। हमें यह स्वतंत्रता(Freedom) एक मुश्किल राह से गुजरकर और बहुत-सी कुर्बानियाँ देकर हासिल हुई है। इस स्वतंत्रता(Freedom) की कीमत हमने शहीदों के खून और देशवासियों के बलिदान(Life sacrifice) से चुकाई है। यदि गुजरे इतिहास(History) के पन्‍नों को खँगालें तो उन बलिदानों पर से परदा उठता है और उन दिनों की स्‍मृतियाँ ताजा हो उठती हैं।

अँग्रेजों (Britisher)  से पहले हिंदुस्तान(INDIA) पर मुगलों का शासन था और उन्होंने अपने पोलिटिकल और आर्थिक दिग्विजय सिंह के नाम से थर्रा उठते ...फायेदे के लिए हमारी धरती का उपयोग किया। सन् 1600 में जब अँग्रेजों (Britisher)  ने व्यापार के मकसद से हिंदुस्तान(INDIA) में प्रवेश किया था तो मुगल सम्राट को इसका अंदेशा भी नहीं था कि ये अँग्रेज व्यापार के बहाने उन्हें उनके राज्य से बेदखल कर देंगे। व्यापार की आड़ में देश पर अपना अधिकार जमाने की रणनीति धीरे-धीरे कारगर हुई।

जब चालाक मुगल शासक अँग्रेजों (Britisher)  की कुटिल स्ट्रेटजी को नहीं समझ पाए तो भला भोले-भाले लोग उस खतरे को कैसे भाँप पाते कि यह व्यापार उनका सबकुछ लूटने के लिए किया जा रहा है। अत्याचार और लूट-खसोट का यह दौर दो सदियों तक चला और आखिरकार एक लंबी लड़ाई के बाद हमें ब्रिटिश हुकूमत से आज़ादी मिली और हिंदुस्तान(INDIA) स्वतंत्र हो गया।

स्वतंत्रता(Freedom) की लड़ाई की मुख्य घटनाओं जिन्हें जानना ज़रूरी है|

ईस्‍ट इंडिया कंपनी का हिंदुस्तान(INDIA) आगमन:सन् 1600 में ब्रिटेन की रानी ने ईस्‍ट इंडिया कंपनी को हिंदुस्तान(INDIA) में व्‍यापार करने की अनुमति दे दी और इस तरह हिंदुस्तान(INDIA) में ईस्‍ट इंडिया कंपनी का आगमन हुआ।

मुगल साम्राज्य का पतन :

1852 में बहादुरशाह जफर की मृत्‍यु के बाद मुगल शासन का अंत हो गया। आखिरी मुगल बादशाह की मौत के बाद पूरी सत्ता अँग्रेजों (Britisher)  के हाथ में आ गई थी।

बाबर की जीवनी, मुगल साम्राज्य के ...1857 की क्रांति-स्वतंत्रता(Freedom) की पहली अँगड़ाई :

भारतीय इतिहास(History) में इसे सैनिक विद्रोह की संज्ञा दी जाती है, लेकिन वास्तव में यह उत्तर से लेकर मध्य और मध्य हिंदुस्तान(INDIA) से लेकर पश्चिमी

क्षेत्र में फैले व्‍यापक जन-असंतोष का परिणाम था। उस जन-असंतोष का कारण धार्मिक भी था, सैनिक भी और आर्थिक भी। विद्रोह को तो कुचल दिया गया, लेकिन भारतीय इतिहास(History) में 1857 को प्रथम आज़ादी-संग्राम माना जाता है।
खूब लड़ी मर्दानी :

17 जून, 1858 को झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई अँग्रेजों (Britisher)  से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं।

सत्‍ता की बागडोर कंपनी के हाथों में :

1859 को ब्रिटिश कानून के तहत शासन की पूरी बागडोर ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों में चली गई।

भीषण अकाल :

1860-61 में उड़ीसा, बिहार, मद्रास और बंगाल में भयंकर अकाल पड़ा, जिसमें करीब 20 लाख लोगों की जानें(Life) गईं। अकेले उड़ीसा में ही 10 लाख लोग मारे गए।

काँग्रेस(INC) की स्थापना : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ...

दिसंबर 1885 में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस(INC) की स्थापना हुई। ए.ओ. ह्यूम इसके पहले अध्यक्ष मनोनीत हुए। काँग्रेस(INC) का पहला अधिवेशन मुंबई में डब्लू.सी. बनर्जी के नेतृत्व में आयोजित हुआ।




बंगाल विभाजन :

20 जुलाई, 1905 को बंगाल को दो हिस्सों में विभक्त कर दिया गया। पश्चिमी और पूर्वी बंगाल नाम से दो अलग-अलग क्षेत्र हो गए।

मुस्लिम लीग की स्‍थापना :
All-India Muslim League - Wikipedia
30 दिसंबर, 1906 को ढाका में मुस्लिम-लीग नामक संगठन की स्थापना हुई। यह पहली बार था, जब इतने बड़े पैमाने पर मुस्लिम नेता एकजुट हुए। सलीम उल्लाह खान ने पहली बार यह प्रस्ताव रखा था, जिसमें एक ऐसे संगठन कही गई थी, जो मुस्लिमों के हित की बात कहे।

खुदीराम बोस को फाँसी:

1908 में खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने मुजफ्फरपुर में बम फेंका। गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रफुल्ल चाकी ने खुद को गोली मार ली, लेकिन खुदीराम बोस को उस कृत्य के लिए फाँसी की सजा दी गई।

इंडियन कौंसिल एक्ट:

1909 में संवैधानिक सुधारों की घोषणा के साथ ही इंडियन कौसिंल एक्ट लागू किया गया। यह कानून मोर्ले-मिंटो के नाम से जाना गया, जो मुख्य रूप से नरमपंथियों को खुश करने की कोशिश थी।

बंगाल का विभाजन| Bengal Partition Day 2018बंगाल का एकीकरण: 

1911 में ब्रिटिश सरकार ने बंगाल विभाजन को समाप्त कर दिया गया। पश्चिमी और पूर्वी बंगाल को मिला दिया गया। साथ ही बिहार और उड़ीसा को अलग राज्य बना दिया गया।

गदर पार्टी की स्थापना:

1913 में अमेरिका और कनाडा में बसे भारतीय क्रांतिकारियों ने 'गदर पार्टी' की स्थापना की। ‍लाला हरदयाल इस पार्टी के संस्थापकों में से एक थे।

होम रूल लीग:

1914 में प्रथम विश्वयुद्ध का कहर भारतीयों पर भी टूटा। उसी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए 1915-16 में लोकमान्य तिलक और एनी बेसेंट के नेतृत्व में दो होमरूल लीगों की स्थापना की गई। तिलक का नारा था- ‘स्‍वराज्‍य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।’

गाँधीजी की वापसी:

9 जनवरी, 1915 को गाँधीजी दक्षिण अफ्रीका से वकालत की डिग्री लेकर हिंदुस्तान(INDIA) वापस लौटे।

नरमपंथ-गरमपंथ एकता:

1916 में काँग्रेस(INC) के लखनऊ अधिवेशन के बाद एक ऐतिहासिक घटना हुई, जिसमें नरमपंथ और गरमपंथ फिर एक हो गए। अहमदाबाद में साबरमती आश्रम की स्थापना की गई।

सांडर्स की हत्या:

लाला लाजपत राय मौत से बौखलाए भगत सिंह ने 17 दिसंबर को अँग्रेज पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या कर दी।
किसानों का बारदोली आंदोलन (movement):

1929 में वल्लभाभई पटेल के नेतृत्व में बारदोली के किसानों ने आंदोलन (movement) चलाया।

जवाहर लाल नेहरू अध्यक्ष:

- लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू को काँग्रेस(INC) का अध्यक्ष चुना गया।

- 31 दिसंबर को स्वाधीनता का स्वीकृत झंडा फहराया गया।

चंद्रशेखर आजाद की शहादत:

27 फरवरी को इलाहाबाद के एल्‍फ्रेड पार्क में अँग्रेजों (Britisher)  की गिरफ्तारी से बचने के लिए चँद्रशेखर आजाद ने खुद को गोली मार ली और इस तरह स्वतंत्रता(Freedom) का एक वीर सिपाही शहीद हो गया।

दांडी यात्रा और नमक-कानून:

12 मार्च 1930 को गाँधीजी और उनके 78 अनुयायी दांडी की 200 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर समुद्र तट पर पहुँचे और नमक-कानून तोड़ा। यह दूसरा अवज्ञा आंदोलन (movement) माना जाता है।

असेंबली में बम:

8 अप्रैल को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने असेंबली में बम फेंका। उनका उद्देश्य किसी को मारना नहीं था, बल्कि लोगों तक अपनी आवाज पहुँचाना था।

ऐतिहासिक भूख-हड़ताल:

जतीन दास और उनके साथियों ने लाहौर में कैद के दौरान जेल प्रशासन के अत्याचार के खिलाफ भूख हड़ताल रखी। यह भूख-हड़ताल 63 दिनों तक चली, जिसमें जतीन दास की मृत्यु हो गई।

तीन वीरों को फाँसी :

31 मार्च, 1931 को भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को फाँसी पर लटका दिया गया और ये तीनों वीर ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ गाते हुए खुशी-खुशी फाँसी के फंदे पर झूल गए।

कैदियों को छोड़ने का प्रस्ताव :

मार्च में ही गाँधी-इरविन समझौता हुआ। इसके तहत यह प्रस्ताव रखा गया कि अहिंसक व्यवहार करने वाले कैदियों को छोड़ने की अनुमति सरकार दे।

गोलमेज सम्मेलन :

1930 में लंदन में भारतीय नेताओं और प्रवक्ताओं का पहला गोलमेज-सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य साइमन-कमीशन की रिपोर्ट पर विचार करना था।

- 1931 में गाँधीजी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने इंग्लैंड पहुँचे।

- नवंबर, 1932 में काँग्रेस(INC) तीसरे गोलमेज सम्मेलन में सम्मिलित नहीं हुई। इस सम्मेलन का परिणाम 1935 के हिंदुस्तान(INDIA) सरकार कानून के रूप में सामने आया।

पहला सत्याग्रह - चंपारण:

1917 में गाँधीजी के नेतृत्व में सबसे पहले बिहार के चंपारण जिले में सत्याग्रह आंदोलन (movement) की शुरुआत हुई। नील की खेती करने वाले किसानों पर हो रहे घोर अत्याचार के विरोध में यह सत्याग्रह शुरू किया गया था।

हिंदुस्तान(INDIA) सरकार कानून:

1918 में ब्रिटिश सरकार के हिंदुस्तान(INDIA) मंत्री एडविन मांटेग्यू और वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने संवैधानिक सुधारों की प्रस्तावना रखी, जिसके आधार पर 1919 का हिंदुस्तान(INDIA) सरकार कानून बनाया गया।

रौलेट एक्ट: CARNAGE AS 'ENLIGHTENED DESPOTISM' AT JALLIANWALA BAGH-1919 ...

मार्च, 1919 में रौलेट एक्ट बना। इस कानून के तहत यह प्रावधान था कि किसी भी भारतीय पर अदालत में मुकदमा चलाया जा सकता है और बिना दंड दिए उसे जेल में बंद किया जा सकता है। इस एक्‍ट के विरोध में देशव्यापी हड़तालें, जूलूस और प्रदर्शन होने लगे। ‍गाँधीजी ने व्यापक हड़ताल का आह्वान किया।

जलियाँवाला बाग :

13 अप्रैल को डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में जलियाँवाला बाग में लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। अमृतसर में तैनात फौजी कमांडर जनरल डायर ने उस भीड़ पर अंधाधुंध गोलियाँ चलवाईं। हजारों लोग मारे गए। भीड़ में महिलाएँ और बच्‍चे भी थे। यह घटना ब्रिटिश हुकूमत के काले अध्‍यायों में से एक है।


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