मध्य प्रदेश की मालवी पहेलियाँ -दिनेश मालवीय

मालवी पहेलियाँ

-दिनेश मालवीय

मध्यप्रदेश के मालवा की समृद्धि बारे में एक कहावत बहुत प्रचलित है कि-“पग-पग रोटी, डग-डग नीर, मालव भूमि गहन गंभीर”. आर्थिक रूप से ही नहीं सांस्कृतिक और बौद्धिक दृष्टि से भी यह अंचल बहुत समृद्ध है. इसकी भाषा-बोली बहुत मीठी है. यहाँ की कहावतें, मुहावरे और पहेलियाँ भी बहुत अद्भुत हैं, जो चकित कर देती हैं. आइये, हम मालवा अंचल की कुछ प्रमुख पहेलियों से परिचित होते हैं, जिनका संकलन श्रीमती निर्मला राजपुरोहित ने किया है.

  1. अगण कुवा में घर कर्यो, पाणी माय करे रे निवास

अजिया सूत को सब्द ले, गज को पाछ्लो अंक.

(कुम्हार का मटका)

  1. वा तरकारी लाव्जो, चतर नार का कंत

(मैथी)

  1. अगवाड़े वाई तूमड़ी जी कई पछवाड़े गई वेल

(कंचुकी, कांचली)

  1. इतरो सो मनीराम, इतरी बड़ी पूँछ

ऊ जई रियो मनीराम बता म्हारी पूँछ.

(सुई-धागा)

  1. ओर पे ओरो, जी का ऊपर घोड़ो

छाती वे तो छोडो, नी तो उब्बा करम फोड़ो.

(बन्दूक)

  1. आम्बा की दारे दिवो बारे काजल पड़े रे खंडार

आँजण वाली पातली ने निरखण वालो गँवार.

(कलम-दावत)

  1. आप कुँवारा बाप कुँवारा और कुँवारी महतारी

पुत्र पिता ने गोद खिला रयो देख्यो ने वेदाचारी.

(हनुमान)

  1. आठ पग नो आँख, तीन सींग दो पूँछ

इको अर्थ बतावे, वांके मूंडे मूछ

(नंदी पर बैठे शिव-पार्वती)

  1. अन्दारा घर में ऊँट अयड़ाय

(घट्टी-चक्की)

  1. आकास ती उतरयो हेमरो, जी ने मांस ने लोई कई नी

(हवाईजाहज)

  1. अन्दारा घर में घीं को तपको

(चाँदी का रुपया)

  1. अन्दारी ओरी में मूँग वेराणा

(मक्खियाँ)

  1. एक अचम्भो में सुन्योजी, बेटी जायो बाप

सिल डूबे बत्तो तरे जी, जल में छायो पाप

(घी, छाछ)

  1. ऊपर तासा नीचे सासा, बीच में लाल तमासा

(मसूर)

  1. एक अचम्भो में सुन्योजी, मुर्दों ऑटो खाय

वतरावे बोले नई, मारे तो चिल्लाय

(मृदंग)

  1. एक कहानी में कूँ सुणले म्हारा पूत

वना परोयो उड़ गयो बाँध गला में सूत

(पतंग)

  1. एक जानवर ऐसो, जिकी दूम पे पैसो

(मोर)

  1. ऊगतो ऊगे तो ताराव भरे. डूबता ऊगे तो काल पड़े

(इन्द्रधनुष)

  1. एक खूँटापे बारा गाय, इन गायां के दो चरवाय

(घड़ी)

  1. एक थाल मोटी से भर्यो, सबका माथे ऊंदो धर्यो

(आकाश)

  1. एक लुगई के बार बोबा

(सुअरनी, शूकरी)

  1. एक नाल का दो रखवाला

(मूँछ)

  1. एक नार दो के लई बेठी

(पजामा)

  1. एक लुगई का भार भर गट्टा

(खजूर का पेड़)

  1. एक पछेणी में सो जणा, सबकी न्यारी सोड़

(लहसुन)

 

 


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