Search Story:सृष्टि की उत्पत्ति कैसे हुयी? क्या कहते हैं वेद और लेकर आधुनिक विज्ञान ?

अतुल विनोद :

दुनिया की उत्पत्ति अभी भी रहस्य बनी हुई है| ब्रम्हांड की रचना की सारी परतें खुलनी अभी बाकी हैं| हालांकि भारतीय सनातन साहित्य में सृष्टि की उत्पत्ति को लेकर जो बातें कही गई है लगभग वही बातें वैज्ञानिकों ने “बिग-बैंग” थ्योरी  में  मानी है| बिग बैंग थ्योरी को साइंस की भाषा में  डिफाइन किया गया है| जबकि सनातन साहित्य में इसे धार्मिक शब्दावली में व्यक्त किया गया है| लेकिन दोनों ही थ्योरी का मूल अर्थ लगभग समान है| भारतीय सनातन ज्ञान सृष्टि की उत्पत्ति पर क्या कहता है यह जानने से पहले हम विज्ञान की उस थ्योरी को समझ लें, जिसे ब्रह्मांड की उत्पत्ति की सबसे प्रमाणिक थ्योरी माना गया है|

विज्ञान मानता है कि सृष्टि की उत्पत्ति बिगबैंग यानी एक महा विस्फोटसे हुयी | विज्ञान कहता है कि आज से करीब 13 सौ करोड़ साल पहले यह पूरा ब्रह्मांड एक ही बिंदु में समाहित था ,यानी पूरे ब्रह्मांड का सारा द्रव्य कंप्रेस्ड था और एक पॉइंट पर सिमटा हुआ था| इस बेहद गर्म बिंदू में हुए विस्फोट के बाद इसका हर कण फैलता गया और यूनिवर्स बनता गया. आज भी यूनिवर्स में विस्तार जारी है. थ्योरी के मुताबिक, यूनिवर्स के बनने से पहले सारी एनर्जी और फिजिकल एलिमेंट एक बिंदू (प्वाइंट) में सिमटे हुए थे. फिर बिग बैंग हुआ यानी एक ऐसा विस्फोट जिसके बाद उस बिंदू में सिमटे सभी कण एक दूसरे से दूर जाने लगे, ये प्रक्रिया अब भी जारी है.वैज्ञानिकों का मानना है कि बिग बैंग से पहले तो ‘टाइम’ भी नहीं था. सारी एनर्जी और फिजिकल मैटर एक बिंदू पर ही केंद्रित थे.दरअसल पूरा ब्रह्मांड लगातार फैलते चला जा रहा है, इसी के आधार पर वैज्ञानिकों का यह सिर्फ एक अनुमान मात्र है कि  सृष्टि की उत्पत्ति एक महा विस्फोट से हुई इसे लेकर वैज्ञानिक आज भी पूरी तरह से अपनी थ्योरी पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं|

विज्ञान भले ही BIG BANG  से पहले समय और अन्य किसी गतिविधि से इंकार करता है, लेकिन भारतीय सनातन ज्ञान  इस बारे में विज्ञान से एक कदम आगे है| न सिर्फ भारतीय दर्शन ने आधुनिक विज्ञान से हजारों साल पहले सृष्टि की उत्पत्ति की लगभग यही थ्योरी दुनिया के सामने रखी थी, बल्कि उसने यह भी बताया था कि सृष्टि से उत्पत्ति के पहले भी समय और द्रव्यमान का अस्तित्व था|

ऋग्वेद  के नासदीय सूक्त में कहा गया है- -ऋग्वेद 10.129.1

नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमाऽपरोयत्।
किमावरीवः कुहकस्य शर्मन्नभः किमासीद्गहनं गभीरम्।।

यानी सृष्टि की उत्पत्ति से पहले एक सर्वशक्तिमान परमेश्वर मौजूद थे, उस वक्त ना तो आकाश का अस्तित्व था ना ही गुणों का|

ऐतरेय उपनिषद में कहा गया है कि सृष्टि के आरंभ में एकमात्र आत्मा विराट ज्योतिर्मय स्वरूप में विद्यमान थी| बिग बैंग थ्योरी में भी यही कहा गया है सृष्टि की शुरुआत में सिर्फ एक अति संघनित गर्म गोला मौजूद था|

– ऋ. 10.129.2

न मृत्युरासीदमृतं न तर्हि न रात्र्या अह्न आसीत्प्रकेतः।आनीदवातं स्वधया तदेकं तस्माद्धान्यन्न परः किं चनास।।

सृष्टि की उत्पत्ति से पहले न जन्म था न मृत्यु,न दिन था ना रात, सब कुछ मुक्त अवस्था में था, श्लोक में यह भी कहा गया है प्रकृति उस वक्त ऊर्जा के रूप में मौजूद थी | विज्ञान भी यही मानता है कि सृष्टि की शुरुआत में ब्रह्मांड की सारी उर्जा एक ही केंद्र पर कंप्रेस्ड हो गई थी|

फिर सृष्टि की उत्पत्ति कैसे हुई, इस पर तैत्तिरीय उपनिषद् का कहना है-

‘सो कामयत। बहुस्यां प्रजायेयेति।

स तपोऽतप्यत। स तपस्तप्त्वा इदं सर्वमसृजत। यदिद किञ्च। तत सृष्टावा तदेवानु प्राविशत्। तदनुप्रविश्य। सच्चत्यच्यामवत्। निरुक्तं चानिरुक्तं च। निलयन चानिलयन च। विज्ञानं चापिज्ञानं च। सत्यं चानृतं च। सत्यमभवत। यदिद किञ्च। तत्सत्यमित्या चक्षते।

-तै.उप. ब्रह्मानन्दवल्ली अनुवाक 6

यह श्लोक गूढ़ वैज्ञानिक अर्थ लिए हुए हैं, इसका अर्थ यह है कि उस ज्योतिर्स्वरूप परमात्मा (जिसे विज्ञान ने उर्जा पिंड कहा) में एक से अनेक होने की कामना पैदा हुयी  | विज्ञान कहता है उस उर्जा पिंड में अचानक विस्फोट की प्रक्रिया हो गयी, लेकिन कैसे जो उर्जा पिंड अनंतकाल से एक जैसा था उसमे विस्फोट किसकी इच्छा से हुआ? वेद कहते हैं उस पिंड में ईश्वरीय चेतना थी, उसी महा चेतना के चलते उस एक पिंड में बहुत हो जाने की इच्छा पैदा हुयी| यह परमात्मा की पहली इच्छा कहलाती है|

इस पिंड को शैव दर्शन में परम शिव कहा जाता है, इस पिंड का आकार ठीक वैसा ही था जैसा आज शिवलिंग का अंडाकार होता है, इस पिंड को वेदों में हिरण्यगर्भः (सोने का अंडा) कहा| वह गर्भ जिससे दुनिया उपजी |

अब सवाल उठता है कि क्या वह पिंड सिर्फ ज्योतिर्मय चेतना थी? स्थूल कण का समूह था  या उर्जा का अति संघनित रूप?  विज्ञान कहता रहा कि सब कुछ पदार्थ से पैदा हुआ है| वेद कहते हैं कि सब कुछ चेतनात्मक स्पन्द से पैदा हुआ| व्यवहारिक ये है कि जैसे मानव में स्थूल, सूक्षम और कारण शरीर होते हैं, उसी तरह उस एक मात्र ब्रम्ह पिंड में भी तीनो शरीर थे स्थूल, सूक्षम और कारण| इन तीन के ऊपर भी एक परम कारण शरीर था जिसे विज्ञान आज गॉड पार्टिकल कहता है|

वेद कहते हैं उस पिंड रुपी ब्रम्ह का पहला ज्ञान था खुद के एक होने का, कि मैं तो सिर्फ एक हूँ| मेरे एक होने में कोई आनंद नहीं| एक से अधिक होने की इच्छा से क्रिया का प्रारंभ हुआ और उस क्रिया से वह पिंड एक से अनेक होकर स्रष्टि की शुरुआत का कारण बना| चूंकी सभी कण उसी पिंड से निकले इसीलिए कण कण में भगवान है कहा गया|

ऋग्वेद के अनुसार सृष्टि उत्पत्ति परमेश्वर ने इस प्रकार की है-

ब्रह्मणस्पतिरेता सं कर्मारइवाधमत्।
देवानां पूर्व्ये युगेऽसतः सद जायत।।
– ऋ. 10.72.2

उन पिंड रुपी परम शिव हिरण्यगर्भ ने सम्पूर्ण द्रव्य/पदार्थ को अपने ताप से धोंका और उसी ताप से पदार्थ पूरे आकाश में बिखर गया| इसी को वैज्ञानिकों ने महा  विस्फोट (बिग बैंग)कहा है। वेद कहते हैं अव्यक्त व असत पदार्थों से ही व्यक्त व सत जगत की उत्पत्ति हुयी |

तैत्तिरीयोपनिषद् में सृष्टि उत्पत्ति का क्रम भी बताया गया है-
तस्माद्वा एतस्मादात्मन आकाशः समभूतः। आकाशाद्वायुः। वायोरग्निः। अग्नेरापः। अद्भ्यः पृथिवी।      पृथिव्या ओषधय। ओषधीयोऽन्नम् अन्नाद् रेतः। रेतसः पुरुषः।

अर्थात् परम पुरुष परमात्मा से पहले आकाश, फिर वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी उत्पन्न हुई है। पृथ्वी से ओषधियाँ, (अन्न व फल फूल) ओषधियों से वीर्य और वीर्य से मनुष्य उत्पन्न हुए|

यदि हम उस पिंड से पहले की स्थिति पर विचार करें तो जो ज्ञान मार्ग हमें बताता है वह यह है पिंड से पहले ब्रह्मांड की सारी ऊर्जा छोटे-छोटे कणों के रूप में पूरे आकाश में बिखरी  हुई थी| धीरे-धीरे सारी ऊर्जा किसी खास आकर्षण में बंधकर संघनित/ एकत्रित/COMPRESSED होने लगी| यूं समझ लीजिए कि पूरी दुनिया की रचना जिन कणों और ऊर्जा के कारण संभव हुई, वह एक छोटे से गेंद जैसी चीज में समाए हुए थे।

अनंत काल तक ये पिंड एक ही अवस्था में रहा लेकिन एक दिन इस परम शिव में संसार को रचने की इच्छा हुयी| यही दुनिया का रचनाकार है जिसने इस पिंड रुपी ऊर्जा को इस तरह विभाजित किया कि चंद  सेकेण्ड में अनेक ब्रम्हांड, ब्रह्मांड में गैलेक्सी, गैलेक्सीओं में सौर मंडल जैसे अनेक मंडल, सब कुछ व्यवस्थित रूप में आकार लेते चले गए |

विज्ञान क्या कहता है? बिग बैंग या महाविस्फोट के इस धमाके के मात्र 1-43 सेकेंड समय के बाद समय, अंतरिक्ष की मान्यताएं अस्तित्व में आ चुकी थीं। भौतिकी के नियम लागू होने लगे थे। 1-34 वें सेकेंड में ब्रह्मांड 1+30 गुणा फैल चुका था और अब क्वार्क, लैप्टान और फोटोन का गर्म द्रव्य बन चुका था। 1-4 सेकेंड क्वार्क मिलकर मिलकर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बनाने लगे, ब्रह्मांड अब कुछ ठंडा हो चुका था। हाइड्रोजन, हीलियम आदि की शुरुआत होने लगी और तत्व बनने लगे थे। विज्ञान इस सारी घटना को सिर्फ पदार्थ के क्रिया-प्रतिक्रिया मानता है लेकिन वेद कहते हैं कि इन सारी क्रिया-प्रतिक्रिया के पीछे जो शक्ति काम करती है वही शक्ति तो निराकार ब्रम्ह है|

बाद में विज्ञान ने इसी शक्ति को हिग्स बोसोन (गॉड पार्टिकल) कहा| गॉड पार्टिकल के कारण ही क्वार्क आपस में मिलकर इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉन और प्रोटॉन बनाते हैं| भारतीय वैज्ञानिक सत्येन्द्र बोस ने गॉड पार्टिकल की मौजूदगी बताई थी इसलिए इस पार्टिकल के नाम में  उनके सरनेम बोस को भी जोड़ा गया | इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉन और प्रोटॉन मिलकर एटम बनाते हैं|  हमारे ब्रह्मांड में मौजूद सभी चीजें एटम से मिलकर बनी हैं। विज्ञान के सिद्धांत के मुताबिक, बिग बैंग के तुरंत बाद किसी भी कण में कोई वजन नहीं था। जब ब्रह्मांड ठंडा हुआ और तापमान एक निश्चित सीमा के नीचे गिरता चला गया तो शक्ति की एक फील्ड पूरे ब्रह्मांड में बनती चली गई। उस फील्ड के अंदर बल था और उसे हिग्स फील्ड के नाम से जाना गया। उन फील्ड्स के बीच कुछ कण थे जिनको पीटर हिग्स के सम्मान में हिग्स बोसोन के नाम से जाना गया। इसे ही गॉड पार्टिकल भी कहा जाता है। उस सिद्धांत के मुताबिक, जब कोई कण हिग्स फील्ड के प्रभाव में आता है तो हिग्स बोसोन के माध्यम से उसमें वजन आ जाता है।

विज्ञान पहले कहता था कि जड़ से चेतन की उत्पत्ति होती है आज क्वांटम थ्योरी में ये माना जाने लगा है कि हर कण में चेतना है| चाहे उन कणों से बनी आकृति जड़ या निर्जीव नजर आये| यानी निर्जीव में भी जीवन की वेदोक्त बात अब प्रमाणित होने जा रही है| इतने बड़े विश्व की रचना करने वाले को भारतीय दर्शन में निराकार, सर्वव्यापक और सर्वशक्तिमान कहा गया है। ‘सर्वशक्तिमान्’ जो अन्य किसी सहायक की उम्मीद नहीं रखता, उसमें अनन्त शक्ति है, सामर्थ्य असीम है, वह उसी सामर्थ्य से जड़ प्रकृति को प्रेरित करता है, उसकी अनन्त सामर्थ्ययुक्त व्यवस्था सूक्ष्मातिसूक्ष्म तत्त्वों में हर जगह व्याप्त है।

आप खुद उस ब्रम्ह का स्वरूप हैं| आपका शरीर जड़ है लेकिन आपके अंदर एक ऐसी चेतना काम कर रही है| जो आपके मन की मोहताज नहीं है| आप सोचे या न सोचें आपकी सांस चलती रहेगी| आपका हरेक अंग काम करता रहेगा, भले आप बेहोश हो जाएँ|

बिना कारण के कोई कार्य नहीं होता इसी तरह बिना कारण रुपी इश्वर के कार्य रुपी संसार की रचना असंभव है| सत्व रज तम, इच्छा क्रिया ज्ञान, इलेक्ट्रोन प्रोटोन न्यूत्रोन , इन त्रिशक्तियों के पीछे कौन है? वही ईश्वर है|


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