MP: शासकीय सेवकों की सेवा पुस्तिकाओं का संधारण करने के नये निर्देश जारी..डॉ. नवीन जोशी

MP: शासकीय सेवकों की सेवा पुस्तिकाओं का संधारण करने के नये निर्देश जारी..डॉ. नवीन जोशी
डॉ. नवीन जोशी
Dr. Navin joshiभोपाल: राज्य के वित्त विभाग ने प्रदेश सरकार के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका का संधारण करने के नये निर्देश जारी किये हैं. निर्देश में कहा गया है कि सेवा पुस्तिका गुम होने, कांट-छांट होने एवं डुप्लीकेट सेवा पुस्तिका का संधारण नियमानुसार नहीं करने से पेंशन प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलम्ब होने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। सेवा पुस्तिका के संधारण एवं सुरक्षित रखने का उत्तरदायित्व संबंधित कार्यालय का नियत है, लेकिन इसके संधारण में आवश्यक सतर्कता एवं ध्यान नहीं दिये जाने के कारण प्रतिकूल स्थिति निर्मित हो रही है.


अब संधारण के लिये यह करना होगा :


एक, सेवा पुस्तिका का भौतिक सत्यापन राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रत्येक कार्यालय में प्रतिमाह किया जाये जिससे सेवा पुस्तिका गुमने की संभावना कम रहेगी एवं प्रविष्टियां भी समय-समय पर होगी. दो, प्रत्येक शासकीय सेवक की कार्यालय में डुप्लीकेट पुस्तिका अनिवार्यत: रखी जाये तथा किसी अन्य कार्यालय को भेजे जाने के पूर्व यह सुनिश्चित किया जाये कि उसकी सेवा पुस्तिका की डुप्लीकेट कॉपी में प्रविष्टियां पूर्ण हो गई हैं. तीन, सेवा पुस्तिका डिजिटल रिकार्ड के रुप में भी रखी जायें और प्रत्ये कर्मचारी की पूर्ण जानकारी कम्प्यूटर में दर्ज की जाये जिससे सेवा पुस्तिका गुम होने की स्थिति में उसके पुनर्निर्माण करने में सुविधा हो. चार, सेवा पुस्तिका गुम होने पर संबंधित शासकीय सेवक जिनके प्रभार में रखी जाती है, की जिम्मेदारी निर्धारित की जाये एवं समयावधि में जांच पूर्ण करके त्रुटिपूर्णकत्र्ता शासकीय सेवक को दण्डित किया जाये. पांच, नियंत्रण कर्ता अधिकारी द्वारा प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान सेवा पुस्तिकाओं के संधारण की स्थिति को निरीक्षण टीप में आवश्यक रुप से शामिल किया जाये. छह, वेतन वृध्दि स्वीकृत करने पर शासकीय सेवक की सेवा पुस्तिका में प्रविष्टि पर संबंधित शासकीय सेवक के हस्ताक्षर लिये जायें जिससे सेवा पुस्तिका गुम होने की संभावना कम रहेगी.

एमपी MLA के सीबीआई केसों की भी अब भोपाल न्यायालय में होगी सुनवाई 


सीबीआई में दर्ज एमपी-एमएलए के केसों की भी सुनवाई अब भोपाल जिला न्यायालय में होगी. यह सुनवाई 21 वें अपर सत्र न्यायाधीश करेंगे जिन्हें विशेष न्यायालय घोषित किया गया है. राज्य के विधि विभाग ने यह कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट की रिट पिटिशन में 14 दिसम्बर 2017 को आये निर्णय पर की है. विशेष न्यायालय में मप्र के सांसदों एवं विधायकों पर दर्ज सीबीआई केसों की सुनवाई की जायेगी. सीबीआई अपने केसों की जांच दिल्ली पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 के तहत करती है.


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