जोगणिया माता:नीमच – मां जोगणिया देवी मंदिर : जहाँ चोर-डाकुओं की मन्नत पूरी करती है देवी |

जोगणिया माता:नीमच – मां जोगणिया देवी मंदिर : जहाँ चोर-डाकुओं की मन्नत पूरी करती है देवी |
कहते हैं अगर आस्था मजबूत हो तो भगवान सभी की मदद करते है और उनको उनकी भक्ति की शक्ति के अनुसार वरदान देते हैं। भगवान शिव ने ऐसे दैत्यों को भी मुंहमांगा वरदान दे डाला था, जिन्होंने बाद में देवलोक और भूलोक में तबाही मचाई थी। देव-दानव युद्ध में तो माता दुर्गा ने ऐसे दैत्यों का ही विनाश किया जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश से अमरत्व का वरदान हासिल किए थे। अब आप ताज्जुब करेंगे कि ऐसे भी देवी-देवता हैं, जो आम श्रद्धालुओं की पुकार तो सुनते ही हैं, साथ में चोर डाकुओं की ‘मन्नत’ भी पूरी करते हैं। चोर और डकैत जैसे जघन्य अपराधी भी अपने अभियान की सफलता के लिए इनसे आशीर्वाद मांगते हैं।

हमारे देश में बहुत से ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जो मन्नतें मानने के लिए प्रसिद्ध हैं। मध्य प्रदेश के नीमच के पास स्थित मां जोगणिया देवी के मंदिर की ख्याति चोरों की मन्नतें पूरा करने वाले मंदिर के रूप में है। यह अद्भुत चमत्कारिक मंदिर नीमच से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर कंजर बाहुल्य वाले बीहड़ो में स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही कठिनाई व जोखिम भरा है। इसलिए समान्य व्यक्ति इस मंदिर तक कम ही जाते
हैं।

जोगणिया माता

स्थानीय लोगों के अनुसार बीहड़ के चारों ओर पहाड़ियों से घिरे हुए इस मंदिर में विराजित हैं जोगणिया देवी और काली माता। चोर-डकैत किसी भी वारदात को अंजाम देने से पहले यहां माता का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। यही नहीं, चोर-डकैत यहां माता की आज्ञा लेन भी आते हैं कि वारदात को अंजाम देना है कि नहीं। इसके लिए वे माता के दोनों हाथों में एक-एक फूल चढ़ाते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर अनुमति वाले हाथ का फूल चोर के हाथ में गिरता है, तो वह चोरी-डकैती करके निकल जाएगा और पकड़ा भी नहीं जाएगा। यदि मनाही वाले हाथ से फूल गिरता है तो माना जाता है कि माता ऐसा करने से मना कर रहीं है और वह यह कार्यक्रम टाल दे। चोर-डकैत देवी का आदेश पाकर ही चोरी-डकैती के लिए निकलते हैं और उससे प्राप्त धन का एक हिस्सा माता को भेंट करते हैं। मान्यता है कि ऐसा न करने वाले पर देवी क्रोधित हो जाती हैं और सजा के तौर पर उसे अपंग बना देती हैं।

हालांकि, पुलिस इस मंदिर में छापा मारकर अंजाम देने से पहले ही इन चोर-डकैतों को पकड़ सकती है, पर अंधविश्वास का प्रकोप इतना ज्यादा है कि इलाके की पुलिस भी देवी के कोप से उस मंदिर में जाने का साहस नहीं जुटा पाती। चोरों की मन्नतें पूरे करने वाली माता का मंदिर मानने के पीछे एक कहानी बताई जाती है। किवदंतियों के अनुसार कंजर जाति से संबंधित एक अपराधी हथकड़ी से जकड़े होने के बावजूद पुलिस हिरासत से भाग निकला। पुलिस से बचने के लिए वह बीहड़ के रास्तों को पार करता हुआ जोगणिया माता के मंदिर में जा पहुंचा। मंदिर पहुंचते ही उसकी हथकड़ियां खुल गईं और जब पुलिसकर्मी उसे ढूंढ़ते हुए मंदिर में पहुंचे तो वह खुली हथकड़ियां सांप बनकर उन्हें डसने के लिए आगे बढ़ी। पुलिसकर्मी डर कर भाग गए।

जनश्रुतियों के अनुसार, माता केवल चोर-डकुओं को संरक्षण ही नहीं देतीं, बल्कि दुष्प्रवृत्ति वाले चोर-डाकुओं को दंडित भी करती हैं। वारादात के दौरान बलात्कार, अपहरण, बेवजह खूनखराबा और किसी गरीब अथवा मेहनतकश की दौलत या धन की लूटमार चोरी माता को पसंद नहीं है। जो भी ऐसा करता है माता उसे शारीरिक या मानसिक दंड अवश्य ही देती हैं। माता उन्हीं चोर-डाकुओं की मन्नतें पूरी करती हैं, जो जनता और गरीबों का शोषण करने वाले साहूकारों या रिश्वत की कमाई करने वाले नौकरीपेशा को लटूते हैं

इस मंदिर के रखरखाव के लिए एक पुजारी भी नियुक्त किया गया है, जिसका खर्चा चोर-डकैतों द्वारा देवी को दिए जाने वाले हिस्से से चलता है। अपनी किस्मत सुधारने व माता को प्रसन्न करने के लिए डकैत यहां घंटों बैठकर माता की पूजा-अराधना करते हैं। अगर किसी चोर की पहली बार मुराद पूरी होती है, तो उसको शनिवार के दिन विशाल भंडारा करना होता और परंपरा के अनुसार देवी के मंदिरर में निर्माण कार्य तथा आने-जाने के रास्ते की मरम्मत के अलावा  निकटवर्ती ग्रामीणों को मंदिर की साफ सफाई और रखरखाव के लिए नेग स्वरूप पर्याप्त धनराशि देनी पड़ती है। यह भी सच है वहां के निवासी मंदिर के लिए एक़ित्रत फंड का जरा भी गोलमाल नहीं कर सकते। ऐसा करने वाले पर देवी माता का कहर टूट पड़ता है।

कैसे पहुंचे माता जोगणिया मंदिर-

हवाई मार्ग से इंदौर का अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट यहां नजदीकी एयरपोर्ट है। रेल मार्ग के लिए नीमच रेलवे स्टेशन यहां का करीबी रेलवे स्टेशन है। नीमच से सभी मंदिरों के लिए टैक्सी और टेंपो आदि की व्यवस्था है। आसपास और भी धार्मिक स्थल हैं। नीमच से लगभग 25 किमी की दूरी पर सुखानंदमहादेव और कृष्णा महल नजदीकी दर्शनीय स्थल हैं। इसके साथ आंतरीमाता मंदिर, तिलस्मा महादेव मंदिर, भादवा माता मंदिर, गांधी सागर
बांध, किशोरसागर बांध, कोटा का जगमंदिर, भीमताल टैंक और चित्तोड़गढ़ का किला आदि यहां आसपास के लोकप्रिय दर्शनीय स्थल हैं. लेकिन इन सब में भागवा मन्दिर में सारे साल श्रद्धालुजलन आते रहते हैं जिनमें अधिकांश रोगी और विकलांग होते है।
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Priyam Mishra



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