इन महान लोगों को जीते-जी किसीने नहीं पूछा -दिनेश मालवीय

इन महान लोगों को जीते-जी किसीने नहीं पूछा

-दिनेश मालवीय

जीवन बड़ी विचित्र पहेली की तरह है. इसमें प्याज के छिलकों की तरह परत दर परतें हैं. इसमें सब कुछ भी दो-दुनी-चार की तरह सटीक और स्पष्ट नहीं होता. शायद इसी कारण जानकारों ने जीवन को परम रहस्य कहा है.

 वैसे तो यह बात जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है, लेकिन प्रसिद्धि को लेकर बहुत विचित्रताएँ देखने को मिलती हैं. कोई बहुत महान होकर भी प्रसिद्ध हो जाता है, तो कोई कम या बिल्कुल महान न होकर भी प्रसिद्धि के आकाश को छू लेता है. हमारे देश में इसका कारण प्रारब्ध को बताया गया है- “हानि-लाभ, जीवन-मरण, जस-अपजस विधि हाथ”. कारण जो भी हो, लेकिन इस विषय में ऐसी बातें देखने-सुनने और पढने में आती हैं, जिन पर सहज ही विश्वास नहीं होता.
ven gogh
अब बताइये, कोई कह सकता है या भरोसा कर सकता है कि संसार के महानतम चित्रकारों में एक वेन गॉग ने जीवनभर एक से एक बढ़कर चित्र बनाए, लेकिन उनका केवल एक चित्र खरीदा गया. हालत यह थी कि वह अपने छोटे भाई से सप्ताह भर खाने के लिए पैसे लेते थे. इसमें भी आधे सप्ताह इसलिए भूखे रहते थे, ताकि बचे हुए पैसों से वह रंग और केनवास खरीद सकें. वह इसी तरह फाका करते हुए अवसाद में चले गये और आखिर बहुत बुरी हालत में मरे. मरने के बाद उनकी गणना विश्व के महानतम चित्रकारों में हुयी. उनके बनाये हुए करीब दो हज़ार चित्र मिले जिनका मूल्य करोड़ों रूपये है.

Franz Kafka
जर्मन लेखक फ्रांज काफ्का को आज विश्व के महान अस्तित्ववादी लेखकों में गिना जाता है. उनके लेखन के लाखों दीवाने हैं. लेकिन जीते-जी उन्हें कोई मान्यता नहीं मिली. प्रकाशकों ने उनकी रचनाओं को छपने लायक नहीं माना. वह बदहाली में टीबी के मरीज़ होकर मरे. अपने लेखन की इस तरह बेक़दरी से छुब्ध होकर फ्रांज काफ्का ने मरते वक्त अपने दोस्त मेक्स ब्रोड से कहा कि उनके बाद उनकी सभी रचनाओं को जला दिया जाए. बहरहाल, ब्रोड ने ऐसे नहीं किया. इसके बाद उनकी रचनाओं के छपने का जो दौर आया तो साहित्य के इतिहास में उनका नाम सुनहरी अक्षरों में दर्ज हो गया.
Galileo
क्या कोई आसानी से भरोसा कर सकता है कि मॉडर्न अस्ट्रोनोमी, यानी आधुनिक खगोलविज्ञान के जनक माने जाने वाले इटली के महानखगोलविद गेलीलियो को उनके जीवनकाल में मान्यता नहीं मिली. उन्होंने ही टेलीस्कोप का आविष्कार किया और सूर्य के धब्बों को देखा. धर्म के कट्टरपंथियों ने उन्हें ईश्वरीय मान्यताओं से छेड़छाड़ करने वाला बताकर उनका बहुत तिरस्कार किया. उन्होंने अनेक खगोलीय रहस्यों का उदघाटन किया. शोध करके उन्होंने यह बताया कि धरती सूर्य की परिक्रमा करती है, लेकिन धार्मिक कट्टरपंथियों ने इसे नहीं माना. वह पृथ्वी को स्थिर मानते थे. उन्हें चर्च की मान्यताओं के विरुद्ध बातें करने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी. बाद में उन्हें उनके घर में ही कैद रखा गया और इसी हालत में उनकी मौत हो गयी.
Oscar Wilde
इस बात पर भी भरोसा करना आसान नहीं है कि आयरलेंड के महान लेखक ऑस्कर वाइल्ड कंगाली में मरे. यह अद्भुत नाटक, उपन्यास लेखक और कवि ज़िन्दगी भर क़ानून के पचड़ों में पड़कर वकीलों को फीस दे-दे कर कंगाल हो गया. उन्हें होमोसेक्सुअल होने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था. उनकी मृत्यु के बाद उनकी रचनाएँ बहुत लोकप्रिय हुयीं और उन्हें महान लेखकों में गिना गया. ऐसे और भी अनेक लोग हो गये हैं.

हमारे अपने भारत देश में ऐसे अनेक लोग हुए हैं जिन्हें मरने के बाद तो नहीं, लेकिन जीवनकाल में ही बहुत देर से स्वीकार किया गया. आज युवाओं के चहेते अंग्रेज़ी लेखक अमिष त्रिपाठी की बेस्टसेलर “मेहलुआ” को प्रकाशकों ने यह कहकर प्रकाशित करने से इनकार कर दिया कि यह धार्मिंक पुस्तक है. इसके बाद जब वह छपी तो उसने नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए. महान हिन्दी कवि सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” को छंद में उनके द्वारा किये गये प्रयोगों को नकारा गया. उनके मुक्त छंदों को उस समय के प्रसिद्ध आलोचक पंडित रामचंद्र शुक्ल ने ‘रबड़ छंद” और “केंचुआ छंद” कहकर उनकी खूबखिल्ली उड़ाई. सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को भी प्रारम्भ में बहुत नकारा गया.

दुनिया भर में और भी ऐसे महान लोग हुए हैं, जिन्हें या तो मरने के बाद प्रसिद्धि मिली या जिन्हें शुरूआत में नकारा गया. आज भी ऐसे श्रेष्ट लेखक और कवि हैं, जिन्हें उनकी श्रेष्ठता के अनुरूप प्रसिद्धि नहीं मिल पायी है, जबकि बहुत मामूली प्रतिभा वाले लोग धन और यश कमा रहे हैं.


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