पोषण आहार नीति फिर बदली -सरयूसुत मिश्रा


स्टोरी हाइलाइट्स

मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर पोषण आहार बनाने वाले संयंत्रों को स्व-सहायता समूह को सौंप दिया है. मंत्रिपरिषद ने पंचायत विभाग ......

खरीदी के हाथ बदलने से कैसे सुधरेगी व्यवस्था -सरयूसुत मिश्रा मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर पोषण आहार बनाने वाले संयंत्रों को स्व-सहायता समूह को सौंप दिया है. मंत्रिपरिषद ने पंचायत विभाग को सात संयंत्र सौंपने का निर्णय लिया है. विभाग के अंतर्गत आजीविका मिशन संयंत्रों को चलाएगा. कैबिनेट ने आजीविका मिशन को क़र्ज़ चुकाने  की छूट की अवधि बढ़ा दी है. स्व-सहायता समूहको पोषण आहार योजना  सिद्धांत तक बहुत सही और महिलाओं के हित में है. पहले भी सरकार एक बार जिलों में स्व सहायता समूह से पोषण खरीदी की व्यवस्था कर चुकी है. यह व्यवस्था असफल होने के बाद ही एमपी एग्रो को यह काम सौंपा गया था, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिए थे कि स्व सहायता समूह से यह काम कराया जाए. पहले जब जिलों में पोषण आहार खरीदी स्व-सहायता समूह से की जा रही थी, तब भी ठेकेदारों ने ही समूहों में अपने  प्रतिनिधियों को शामिल करा दिया था. दूसरे रास्ते से पोषण आहार की व्यवस्था ठेकेदारों के हाथों में ही बनी हुई थी. जो संस्था क़र्ज़ में है वह पोषण आहार की  व्यवस्था क्षमता के साथ संभाल सकेंगी यह, पक्की तौर पर नहीं कहा जा सकता. ऐसी धारणा है कि पोषण व्यवस्था ठेकेदारों के साथ ही सिस्टम को भी पोषण देने का काम करती है. जब भी नीतियां बदलती हैं तब बहुत गहरे से देखें तो इसके पीछे ठेकेदार ही  होते हैं. जो व्यवस्था सिस्टम में हर महीने करोड़ों रुपए का पोषण देती है उसको कोई भी सिस्टम बदल कर अपना पोषण बंद करेगा ऐसा लगता तो नहीं है. पोषण आहार के ठेकेदार की जीवनशैली और उनके धंधों में पोषण आहार आपूर्ति नीति की सफलता दिखेगी. मध्य प्रदेश के ऊर्जावान मुख्यमंत्री ने विधान सभा में  पोषण आहार नीति पर बहस में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कहा था कि भ्रष्टाचार फाइलों में नहीं पकड़ा जा सकता. भ्रष्टाचार तो लोगों के चेहरों और रहन-सहन में दिखता है. विधान सभा का कोई सत्र ऐसा नहीं होता जहाँ से पोषण आहार की आपूर्ति से जुड़े सवाल जवाब और ध्यानाकर्षण नहीं आते हैं. लेकिन विपक्ष आवाज उठाता है और जब वही विपक्ष सत्ता में आता है तो उस मामले में उसकी भाषा बदल जाती है. कमलनाथ जब विपक्ष में थे. तब सरकार की पोषण नीति की आलोचना करते थे. उन्होंने  सत्ता में आते ही उसको बदलकर नई व्यवस्था कायम कर दी, जो व्यवस्था कमलनाथ सरकार के पहले थी.  उसमें कमलनाथ को गड़बड़ी दिखी और उन्होंने उसको बदल दिया. वर्तमान सरकार को कमलनाथ सरकार की व्यवस्था में गड़बड़ीदिखी और उन्होंने फिर नीति बदल दी. अब हम पोषण आहार के हितग्राही की दृष्टि से विचार करें तो पाएंगे कि मध्यप्रदेश में कुपोषण की स्थिति आज भी चिंताजनक है, खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में कुपोषित बच्चों की भयानक दृश्य दिखते हैं. आए दिन कुपोषित बच्चों की फोटो अखबारों में छपती हैं और इन्हें देख कर मन विचलित हो जाता है. अब तो देश का लगभग हर परिवार जन धन खातों के माध्यम से बैंक से जुड़ गया है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ऐसी नीति पर काम कर रहे हैं जिससे  हितग्राही को सीधे उसके खातों में लाभ पहुंचाया जाए. प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि और अनेक ऐसी योजनाएं हैं जिसमें राशि सीधे खातों में पहुंचती है. पोषण आहार आपूर्ति नीति में क्या कुछ ऐसा नहीं सोचा जा सकता? अभी जो भी व्यवस्था थी या आगे लागू होगी उसमें खरीदी तो कोई न कोई करेगा. खरीदी चाहे एग्रो करें चाहे आजीविका मिशन, खरीदी तो होगी. खरीदी के हाथ बदलने से खरीदी की बुराई खत्म हो जाएगी ऐसा सोचना और मानना गलत ही होगा. मोदी सरकार ने सेवा और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए बुनियादी बदलाव शुरू की है. पोषण आहार की आपूर्ति नीति पर भी ऐसा कुछ सोचना चाहिए ताकि दिल्ली से पैसा जिसके लिए चला है उसके पेट तक  वह चीज पहुंचे और बच्चों का कुपोषण कम हो सके. ये भी पढ़ें: वेश्या, परस्त्रीगमन और मदिरापान शासन के लिए विष समान, आचार्य चाणक्य के सूत्र और शासन व्यवस्था.. सरयूसुत मिश्रा