वृध्दाश्रमों को मदद के लिये पुराने ईपीओ भेजने पर हुई आपत्ति: डॉ. नवीन जोशी

वृध्दाश्रमों को मदद के लिये पुराने ईपीओ भेजने पर हुई आपत्ति
डॉ. नवीन जोशी
Dr. Navin joshi newspuranभोपाल। राज्य के संचालक सामाजिक न्याय ने वृध्दाश्रमों की मदद के लिये पुराने इलेक्ट्रानिक पेमेण्ट आर्डर (ईपीओ) भेजे जाने पर आपत्ति व्यक्त की है तथा इसे अनुशासनहीनता माना है। संचालक ने अपने सभी संयुक्त एवं उप संचालकों को भेजे पत्र में कहा है कि वरिष्ठजनों के अधिकारों की सुरक्षा के लिये माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 एवं मप्र नियम 2009 के तहत अशासकीय संस्थाओं के माध्यम से निराश्रित निधि से वृद्धाश्रमों का संचालन जिलों में किया जाता है। जिलों से वृद्धाश्रम संचालन के ईपीओ भुगतान की स्वीकृति हेतु संचालनालय को भेजे जा रहे हैं, जिनके परीक्षण उपरांत अपूर्ण जानकारी एवं नियमानुसार नहीं होने के कारण इनको स्वीकृत करने में कठिनाई हो रही है।

संचालक ने पत्र में कहा है कि निर्देशों का पालन किये बिना ही जिला स्तर पर कार्यवाही नहीं की गई है तथा ईपीओ संचालनालय को प्रेषित किये जा रहे हैं। इनमें कई ईपीओ बहुत पुरानी अवधि के भेजे जा रहे हैं, जो कि आपकी अनुशासनहीनता का परिचायक है।


संचालक ने कहा है कि जिलों अन्तर्गत संचालित वृद्धाश्रम के ईपीओ भेजे जाने के पूर्व यह जानकारी भेजी जाये : वृद्धाश्रम में निवासरत हितग्राहियों की जानकारी, समग्र आईडी, आधार नम्बर सहित प्राप्त की जाये। संस्था में निवासरत हितग्राहियों एवं कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी उनको देय मानदेय सहित सूची प्राप्त की जाये। वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में प्रस्ताव स्वीकृति हेतु संस्था की ऑडिट एवं कार्यालय प्रमुख की भौतिक निरीक्षण अंतिम रिपोर्ट संलग्न की जाये। अशासकीय संस्था को पूर्व में स्वीकृत अनुदान प्रदाय राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र अनिवार्यत: प्राप्त किया जाये।

संचालक ने पत्र में कहा है कि यदि पूर्व में प्रदाय राशि शेष है तो वर्तमान वर्ष की आवश्यकता से घटाकर ईपीओ प्रस्ताव भेजें। अशासकीय संस्था का प्रस्ताव प्राप्त होने पर स्थानीय क्षेत्र के समग्र सुरक्षा विस्तार अधिकारी से संस्था का भौतिक निरीक्षण कराकर पुष्टि कराई जावे तथा निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त की जावे। अशासकीय संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाले ईपीओ में मानदेय राशि, भरणपोषण राशि, कार्यालय व्यय (बिजली, पानी, भवन किराया ) आदि की राशि ही देय होगी अन्य मांग देय नहीं होगी। अशासकीय संस्था को स्वीकृत अनुदान की राशि संस्था में पदस्थ कर्मचारियों के बैंक खाते में सीधे जमा कराई जावेगी, तदनुसार ईपीओ तैयार किये जावे।

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Priyam Mishra



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