विश्व हित के लिये हमारी सनातन प्रार्थना

SantanPrayer-Newspuran

विश्व हित के लिये हमारी सनातन प्रार्थना

दुर्जनः सज्जनों भूयात् सज्जनः शान्तिमाप्नुयात्।
शान्तो मुच्येत बन्धेभ्यः मुक्तास्त्वन्यान् विमोचयेत्।।

स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्याय्येन मार्गेण महीं महीशाः।

शुभमस्तु नित्यं गोब्राह्मणेभ्यःलोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥

काले वर्षतु पर्जन्यः: पृथिवी शस्यशालिनी।

देशोऽयं क्षोभरहितो ब्राह्मणाः सन्तु निर्भयाः॥ 

 

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सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाःसर्वे।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥

सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि सर्वः कामानवाप्नोतु सर्वः सर्वत्र पश्यतु। नन्दतु॥

स्वस्ति मात्र उत पत्र नो अस्तु स्वस्ति गोभ्यो जगते पुरुषेभ्यः । विश्वं सुभूतं सुविदत्रं नो अस्तु ज्योगेव दृशेम सूर्यम्॥

‘दुर्जन सज्जन बन जाएँ। सज्जन शान्ति लाभ करें। शान्त पुरुष सब प्रकारके बन्धनोंसे मुक्त हो जाये। मुक्त पुरुष दूसरोंको भी जन्म-मृत्युके बन्धनसे छुड़ाने में समर्थ हों। प्रजाजनोंका कल्याण हो। राजा लोग न्यायोचित मार्ग से पृथ्वी का शासन करें। खेती तथा दूधके लिये गौओंका और ज्ञान-प्रसारके लिये ब्राह्मणों का सदा कल्याण हो सभी लोग सुखी हों। मेघ समयपर वर्षा करें। भूमि सदा हरी-भरी रहे। हमारा यह देश (विश्व) क्षोभरहित हो जाय। ब्राह्मणों को किसी प्रकारका भय न रहे। सभी प्राणी सुखी हों। सब नीरोग रहें। सभी अच्छे दिन देखें। जगत्में कोई भी दुःखका भागी न हो। सभी लोग संकटोंको-कठिनाइयोंको प्यार कर जायें। सब लोग शुभका ही दर्शन करें। सब लोग वाञ्छित भोग प्राप्त करें। सब लोग सर्वत्र प्रसन्न रहें। हमारे पितरोंका कल्याण हो, गौओंका कल्याण हो, जगत्का और मनुष्य मात्र का कल्याण हो, हमारे सभी आत्मीय जन सुखी और मङ्गलकारी ज्ञानवाले हों। हम दीर्घकालतक सूर्यभगवान्के दर्शन किया करें।’

 

 

 


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