पेरेंट्स का नशा: बच्चों की दुर्दशा- छोड़ें नही तो बस इतना कर लें? 

पेरेंट्स का नशा: बच्चों की दुर्दशा 

छोड़ें नही तो बस इतना कर लें? 

मेरा नाम Y.s. पटेल हैमेरी उम्र 75 साल हो चुकी है| मेरी बेटी की उम्र 50 साल से ज्यादा है| मैं अपनी बेटी के गुस्सैल स्वभाव से पिछले 30 साल से परेशान थामेरी बेटी कविता जैसे-जैसे बड़ी होती गई वैसे-वैसे उसका गुस्सा बढ़ता चला गया|

वो अपनी बुराई बिल्कुल भी सहन नहीं कर पाती, भले ही हम उसके हित की बात कर रहे हों| जरा सी आलोचना से वो इतने गुस्से में आ जाती कि बात हाथापाई तक आ जाती| गुस्से के कारण उसकी वैवाहिक जिंदगी भी बर्बाद हो गईअपने गुस्से से कविता भी परेशान थी

 वो खुद भी नहीं चाहती थी कि उसका एंगर उसकी लाइफ को डिस्प्ले करें लेकिन अपने गुस्से पर काबू पाना उसके बूते की बात भी नहीं थी| अब मैं उसे एक साइकेट्रिस्ट के पास लेकर गयामैंने डॉक्टर को सारी बातें बताई, डॉक्टर ने कई सिटिंग की काउंसलिंग के बाद पाया कि संजना को  अनेक तरह के मनोवैज्ञानिक डिसऑर्डर हैं

उसमें बाइपोलर पर्सनैलिटी डिसऑर्डर होने के साथ-साथ पैनिक अटैक और डिप्रेशन की समस्या भी है| डॉक्टर ने जब कविता की काउंसलिंग की तो पाया कि मेरी बेटी शराब की लत और कंट्रोलिंग स्वभाव के कारण कविता को इतनी सारी समस्याएं हुई|

Wine Addiction
कविता ने डॉक्टर को काउंसलिंग में बताया कि मेरी शराब पीने की आदत से मेरी पत्नी यानी उसकी मां परेशान थीमैं बहुत आक्रामक था इसलिए मेरी पत्नी मुझसे खुलकर नहीं बोल पाती थीमैंने अपनी बेटी को सभी तरह की सुविधाएं दी|

उसकी पढ़ाई लिखाई में जितना खर्चा हो सकता था सब किया, कविता ने भी यह बात मानी| लेकिन ये बात भी सच है कि जितना स्नेह मुझे उसे करना चाहिए था मैंने नहीं किया| मेरे कारण ही उसका पुरुषों पर से विश्वास उठ गया और वो अपने पति पर भी भरोसा नहीं कर पाई इसी वजह से उसकी शादी टूट गई

काश मुझे ऐसा पता होता कि मेरी शराब की लत मेरी बेटी की जिंदगी तबाह कर देगी तो मैं उसे छोड़ देता आखिर मेरी बेटी से बढ़कर शराब थोड़े ही है| यदि नही भी छोड़ता तो लाइफ को ऐसे मेनेज करता कि उस पर ज्यादा असर न हो|

 जी हां  पैरेट्स में ड्रिंक करने की आदत और उसके कारण उनके अंदर पैदा हुआ एग्रेसन और मानसिक विकार उनके बच्चों पर बहुत बुरा असर डालते हैंबच्चों की मनोदशा खराब हो जाती है वो डिप्रेशन में चले जाते हैंजो लोग शराब पीते हैं वो अपने घर में सही ढंग से एडजस्ट नहीं कर पाते अपनी लत को पूरा करने के लिए वो किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं

ऐसे लोगों का घर देखने में घर होता है लेकिन अंदर सब कुछ स्ट्रेसफुल और जटिल होता हैबच्चे post-traumatic स्ट्रेस डिसऑर्डर के शिकार हो जाते हैंबचपन में जो मानसिक आघात उन्हें लगते हैं इससे वो अपने पेरेंट्स के प्रति नफरत से भर जाते हैं उनके अंदर शक भर जाता है

 भय और दहशत का माहौल  आगे चलकर  ऐसे व्यक्ति की फैमिली और प्रोफेशनल लाइफ को बुरी तरह प्रभावित करती हैऐसा शख्स अपने व्यवहार और भावनाओं पर कंट्रोल नहीं कर पाताऐसा व्यक्ति एंगर, कुंठा, निराशा, हताशा, जलन जैसे नेगेटिव इमोशंस से घिरा रहता है इनके जीवन में खुशी और आनंद के क्षण शायद ही कभी आते हैं

 यदि आपके बच्चों के साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा है तो आप अपनी आदतों और  अपने बिहेवियर  थोड़ा ध्यान दीजिएएक्सपर्ट की सलाह लीजियेगलत आदतों को तुरंत छोड़ दीजिए| यदि आप शराब भी छोड़ पा रहे हैं तो आपको इतने प्रयास तो करने ही होंगे जिससे बच्चों पर उसका असर कम से कम पड़े|

 यदि आप शाराब की आदि हैं तो इन बातों का ख्याल रखें| अल्कोहल का सेवन करने वाले माता पिता के बच्चों में जन्म के साथ ही कई  बीमारियाँ घर कर जाती हैं| उन्होंने कभी शाराब नही पी लेकिन अल्कोहल पीने वालों के जैसे नुक्सान उन्हें झेलने होते हैं|

 बेहतर है बच्चे की प्लानिंग से कई साल पहले ही आप अल्कोहल छोड़ दें या बहुत कम कर दें| जो लोग बहुत अधिक शराब पीते हैं वो बच्चा पैदा करने का ख़याल छोड़ दें तो ज्यादा बेहतर है| जिनके बच्चे हो गये हैं वे या तो अल्कोहल का सेवन छोड़ दें या बहुत कम कर दें| अल्कोहल का सेवन अकेले में करें| अल्कोहल लेने के बाद बच्चों के सामने कभी ना आयें|


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