परमाणु पर भारी जीवाणु, महाविनाशक हथियार धरे रह गये: दिनेश मालवीय

परमाणु पर भारी जीवाणु, महाविनाशक हथियार धरे रह गये

कण से छोटे अदृश्य वायरस ने कर दिया दुनिया को हलकान
छोटा स कपड़ा बचाएगा जान

-दिनेश मालवीय

बहुत सालों से सुनते चले आ रहे हैं कि अमेरिका और कई दूसरे देशों के पास ऐसे एडवांस्ड हथियार हैं, जिनसे एक मिनट में दुनिया ख़त्म हो सकती है. एक स्विच दबाने भर की देर है और दुनिया के किसी भी कोने में महाविनाश किया जा सकता है.

कोई किसी को परमाणु बम की धमकी दे रहा था तो कोई किसीका सत्यानाश करने की योजना बना रहा था. पढने-सुनने में तो यहाँ तक आता रहा है कि इन हथियारों के इस्तेमाल के बाद इंसान और जानवर तो क्या पेड़-पौधे तक नष्ट हो जाएँगे. आने वाले कई साल तक कहीं कोई घास का तिनका तक नहीं उगेगा.

लेकिन यह क्या ….! कोरोना नाम के एक कण से भी छोटे वायरस ने ऐसा तांडव मचाया हुआ है कि ये सभी हथियार देशों के  शस्त्रागार की शोभा बनकर रह गये हैं. इस अदृश्य दुश्मन पर किसी का वश नहीं चल रहा.

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इसके अलावा अमेरिका, इटली और इंग्लैंड जैसे देशों में मेडिकल साइंस की तरक्की की बातें इस तरह की जाती थीं, कि वे परीकथाओं की तरह लगती थीं. हमारे देश के नेता और धनवान लोग तो ज़रा-सी छींक आ जाने पर भी इलाज के लिए अमेरिका, इंग्लैंड और इटली दौड़ पड़ते थे.

लेकिन इस मामले में भी इन विकसित देशों की पोल खुल गयी है. वहाँ  लाखों लोग इस वायरस के शिकार होकर अकाल ही काल के गाल में समा गए. सारी मेडिकल फेसिलिटीज कोई काम नहीं आयीं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप और इंग्लैंड के प्रधानमन्त्री तक इसकी चपेट में आ गये थे. गनीमत है कि उनका इलाज हो गया.

पुरानी कहावत है कि जहाँ काम हो सुई का कहा करे तलवार.

सारी सुविधाओं को दरकिनार कर एक छोटा-सा कॉटन के कपड़े का मास्क ही आज जीवनदाता बना हुआ है. दुनिया भर में अपने चेहरे की खूबसूरती पर नाज़ करने वाले लोग मास्क के पीछे मुंह छुपाकर घूम रहे हैं. मौत से नहीं डरने का दावा करने वाले बड़े-बड़े सूरमा घर में बंद होकर बैठे हैं. भारत के लोग अपने बच्चों के विदेशों में रहने पर बहुत गर्व करते रहे हैं. आज वे सोचते हैं कि काश बच्चे घर में ही रहते, तो ज्यादा सुरक्षित होते. ऐसा भी देखा जा रहा है कि कई देशों में जाकर रहने वाले भारतीय अपने देश में वापस आने लगे हैं या आने  की योजना बना रहे हैं.

इस आपदा ने दुनिया का जीने का तरीका ही पूरी तरह बदल दिया है.

इसने दुनिया को यह शिक्षा दी है कि कोई भी अपने को बहुत शक्तिशाली होने के भरम में न रहे. आपस में लड़ने और हथियारों की होड़ करने के बजाय मिलजुलकर इस आपदा से निपटने के उपाय करें. इसके समाप्त होने के बाद भी अपने जीवन को बहुत सद्भावना के साथ बिताएं.

इसके अलावा, विकास के नाम पर कुदरत के साथ खिलवाड़ नहीं करें और जितना संभव हो प्रकृति के निकट जीने का प्रयास करें.  याद रखिये धरती पर लगे सीसीटीवी कैमरे की नज़र से आप बच जाएँ, लेकिन ईश्वर के कैमरे से कभी नहीं बच पाएँगे.


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