पित्र पक्ष श्राद्ध 2020: 2 सितंबर से हो रही है पित्र पक्ष श्राद्ध की शुरुआत, ऐसे में विधि पूर्वक पितरों का आर्शीवाद प्राप्त करें

पित्र पक्ष श्राद्ध 2020: 2 सितंबर से हो रही है पित्र पक्ष श्राद्ध की शुरुआत, ऐसे में विधि पूर्वक पितरों का आर्शीवाद प्राप्त करें

सितंबर तक... अपने दिवंगत पितरों कि मृत्यु तिथि के अनुसार, इन तिथियों में करें.. तर्पण, पिंडदान व श्राद्ध कर्म।

1- पहला श्राद्ध- 2 सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध- पहले इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई हो। 
2- दूसरा श्राद्ध- 3 सितंबर को प्रतिपदा तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि को हुई हो। ( इस तिथि को नानी-नाना का श्राद्ध भी किया जा सकता है।)
3- तीसरा श्राद्ध- 4 सितंबर को द्वितीया तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु द्वितीय तिथि को हुई हो।
4- चौथा श्राद्ध- 5 सितंबर को तृतीया तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु तृतीया तिथि को हुई हो।
5- पांचवा श्राद्ध- 6 सितंबर को चतुर्थी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु चतुर्थी तिथि को हुई हो।
6- छठा श्राद्ध- 7- सितंबर को पंचमी तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें जिनकी मृत्यु पंचमी तिथि को हुई हो। (इसी तिथि को अविवाहित मृतक पित्रों के निमित्त श्राद्ध किया जाता है।)
7- सातवां श्राद्ध- 8- सितंबर को षष्ठी तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु षष्ठी तिथि को हुई हो।
8- आठवां श्राद्ध- 9- सितंबर को सप्तमी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु सप्तमी तिथि को हुई हो।
9- नौवां श्राद्ध- 10 सितंबर को अष्टमी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु अष्टमी तिथि को हुई हो।
10- दसवां श्राद्ध- 11 सितंबर को नवमी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु नवमी तिथि को हुई हो। (इस तिथि को विशेष रूप से माताओं एवं परिवार की सभी स्त्रियों का श्राद्ध किया जा सकता है। इसलिए इसे मातृनवमी भी कहते हैं।)
11- ग्यारहवां श्राद्ध- 12 सितंबर को दशमी तिथि- इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु दशमी तिथि को हुई हो।
12- बारहवां श्राद्ध- 13- सितंबर एकादशी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु एकादशी तिथि को हुई हो।
13- तेरहवां श्राद्ध- 14 सितंबर को द्वादशी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु द्वादशी तिथि को हुई हो। ( इस तिथि को उन लोगों का श्राद्ध भी किया जाता है जिन्होंने मृत्यु से पूर्व सन्यास ले लिया हो।)
14- चौदहवां श्राद्ध- 15 सितंबर को त्रयोदशी तिथि - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु त्रयोदशी तिथि को हुई हो। (इसी दिन घर के मृत छोटे बच्चों का श्राद्ध भी किया जाता है।)
15- पद्रहवां श्राद्ध- 16 सितंबर को चतुर्दशी तिथि - चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध केवल उन मृतजनों के लिए करना चाहिए जिनकी मृत्यु किसी हथियार से हुई हो, उनका क़त्ल हुआ हो, जिन्होंने आत्महत्या की हो या जिनकी मृत्यु किसी हादसे में हुई हो। (इसके अलावा अगर किसी की मृत्यु चतुर्दशी तिथि को हुई है तो उनका श्राद्ध अमावस्या श्राद्ध तिथि को ही किया जाता है।)
16- सोलहवां श्राद्ध- 17 सितंबर को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या - इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और चतुर्दशी तिथि को हुई हो।


प्रिय मित्रों उपरोक्त तिथियों के अलावा सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या तिथि को वह लोग भी श्राद्ध करें, जिन्हें अपने मृत पित्रों की तिथि याद नहीं हो। क्योंकि अमावस्या तिथि को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या भी कहते हैं।

-श्याम किशोर

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