घर में शंख बजाइऐ…बच्चों को भी सिखाइए होंगे कई फायदे …

भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ और खास अवसरों पर शंख बजाने की परम्परा रही है. कभी घर-घर से सुबह शंख ध्वनि की गूँज सुनाई पड़ा करती थी, लेकिन अब बहुत कम सुनने को मिलती है. इसकी वजह यह है कि संस्कृति से जुड़ी बहुत-सी दूसरी अच्छी बातों के साथ ही हम शंख बजाने के फायदों को भी भूल गये हैं. आइये जानते हैं कि शंख कितने प्रकार के होते हैं और इसे बजाने के क्या फायदे हैं.
शंखों के कई प्रकार होते हैं. उनकी ध्वनियों में भी अपनी-अपनी विशेषताएँ होती हैं. शंख बजाना एक कला भी है. हर कोई ठीक से शंख नहीं बजा पाता. शंख बजाने में माहिर व्यक्ति के प्रति समाज में आज भी एक अलग प्रकार का सम्मान और प्रशंसा का भाव होता है.शंख को नादब्रह्म और इसकी ध्वनि को 'ॐ' की ध्वनि के बराबर माना जाता है. शंखनाद से negative एनर्जी ख़त्म होती है और positive एनर्जी का प्रसार होता है.
महाभारत धर्म-युद्ध था. इसका आरम्भ भी शंखों की ध्वनि से ही हुआ था. सबसे पहले भगवान् श्रीकृष्ण ने अपना लोकप्रसिद्ध पान्चजन्य नामक शंख बजाया था. भगवान् श्रीकृष्ण ने पंचजन नाम के शंखरूपधारी दैत्य को मारकर उसे शंख रूप से स्वीकार किया था. इससे इस शंख का नाम पान्चजन्य हो गया.

अर्जुन ने देवदत्त और भीम ने पौण्ड्र नाम के शंख बजाये थे. अर्जुन को यह शंख इंद्र ने दैत्यों से युद्ध के समय दिया था, जिसका नाद सुनकर शत्रुओं के दिल दहल जाते थे. भीम का पौण्ड्र शंख बहुत भयंकर ध्वनि वाला था और उसे महाशंख कहा जाता था. युधिष्ठिर ने अनन्तविजय और नकुल तथा सहदेव ने क्रमशः सुघोष और मणिपुष्पक नाम के शंख बजाये. चारों तरफ शंख ही शंख की ध्वनियाँ गुंजायमान हो गयीं.
भारतीय संस्कृति में शुभ अवसरों पर शंख बजाये जाने की बहुत प्राचीन परम्परा रही है. भगवान् की कथा हो या आरती, जन्मदिन का अवसर हो या विवाह, बच्चे का जन्म हो या कोई संस्कार, हर अवसर पर शंखध्वनि की जाती थी. इसके लाभों को देखते हुए इस परम्परा को फिर से शुरू करने की ज़रूरत है.

शंख बजाने से लाभ

शास्त्रों के अनुसार शंख बजाने से नकारात्म क ऊर्जा दूर होती है. बुरी शक्तियां घर में फटकती तक नहीं हैं. शंख बजाने से बैक्टीरिया नष्ट होने की बात वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित हुयी है. शंख बजाने से फेफड़ों से सम्बंधित बीमारियों में लाभ होता है. शंख बजाना फेफड़ों के लिए अच्छा व्यायाम है. नियमित रूप से शंख बजाया जाए तो चेहरे, श्वांस और, श्रवण तंत्र कि कई दिक्कतों से निजात मिलती है.
शंख में प्राकृतिक कैल्शियम, गंधक और फॉस्फोरस पाया जाता है. रात को शंख में पानी भरकर सुबह उसको पीने से बोलने में परेशानी दूर जाती है. हड्डियां और दांत भी मजबूत होते हैं. रात को शंख में पानी भरकर रखने और सुबह उससे आँखें धोने से काफी फायदा होता है. शंख बजाने से गले और फेफड़ों के साथ ही प्रोस्टेखट संबधी बीमारियों में लाभ होता है. इसके अलावा किडनी और मसल्स भी मजबूत होते हैं. शंख बजाने के फायदे 5 रोजाना कुछ देर शंख बजाने या शंख की ध्वनि सुनने से दिल की बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है. इसके साथ ही नियमित शंख बजाने से कार्य करने की क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है.

शंखों के प्रकार

शंखों के अनेक प्रकार होते हैं. इनके अलग-अलग नाम हैं और इन्हें बजाने तथा घर में रखने के शास्त्रों में अनेक लाभ बताए गये हैं.ऐरावत नाम का शंख साधकों को सिद्धि देने वाला माना गया है. इसे बजने से रंग-रूप निखरता है.इसमें चौबीस घंटे पानी भरकर उस पानी को पीने से चेहरे का तेज बढ़ता है.

दक्षिणावर्ती शंख की बहुत महिमा है.इस शंख का पेट दायीं ओर खुलता है.इसके पूजन से समृद्धि आती है. इसे घर में रखने भर से कई रोगों का नाश होता है.
गणेश शंख : समुद्र मंथन में सबसे पहले मिला था. इसकी आकृति गणेशजी जैसी होती है. शंख में सूंड का रंग अद्भुत रूप से सुन्दर होता है. यह शंख दरिद्रता को दूर करने में सहायक है.
महालक्ष्मी को कुदरती रूप से बना श्रीयंत्र भी कहा जाता है. यह महालक्ष्मी का प्रतीक है. इस शंख की जिस भी घर में पूजा होती है, वहां देवी लक्ष्मी का वास होता है.
कामधेनु शंख कामधेनु गाय के मुख जैसी आकृति का होता है. कामधेनु शंख से तर्कशक्ति बढती है. सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
कौरी शंख बहुत दुर्लभ है. जिसके भी घर में होता है उसका भाग्य खुल जाता है. प्राचीनकाल मं् इसका उपयोग आभूषण, मुद्रा और पांसे बनाने में किया जाता था. हीरा शंख का उपयोग तांत्रिक लोग देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए करते हैं. यह पहाड़ों में पाया जाता है. इसकी खोल पर स्फटिक जैसा चमकीला पदार्थ लगा होता है. यह बहुत ही बहूमुल्य माना जाता है. मोती शंख घर में सुख और शांति लाता है. मोती शंख हृदय रोगनाशक भी माना गया है. मोती शंख को सफेद कपड़े पर विराजमान करके पूजाघर में इसकी स्थापना कर हरदिन पूजन किया जाता है. व्यापार-व्यवसाय और उद्यम में यह बहुत लाभकारी माना गया है.
मणि पुष्पक और सुघोषमणि शंख की पूजा-अर्चना से यश कीर्ति, मान-सम्मान प्राप्त होता है.
वीणा शंख वीणा की आकृति का होता है. माना जाता है कि इसके जल को पीने से मंदबुद्धि व्य क्ति भी बुद्द्धिमान हो जाता है.इसके पानी से वाणी के दोष भी दूर होते हैं.
अन्नपूर्णा शंख को रखने से घर में बरकत रहती है. यह धन और समृद्धि बढ़ाता है. गृहस्थ को हरदिन इसके दर्शन करना चाहिए। विष्णु शंख उपयोग निरंतर प्रगति और असाध्य रोगों राहत के लिए किया जाता है. इसे घर में रखने भर से घर रोगमुक्त रहता है.रोजाना इस शंख का पानी पीने से कई रोग मिट जाते हैं।
गरूड़ शंख की आकृति गरुण के सामान होती है. यह शंख भी सुख और समृद्धि देने वाला है. इस शंख को घर में रखने से विपत्ति नहीं आती.
इसके अलावा भी अनेक प्रकार के शंख मिलते हैं, जिनमें देव शंख, चक्र शंख, राक्षस शंख, शनि शंख, राहु शंख, पंचमुखी शंख, वालमपुरी शंख, बुद्ध शंख, केतु शंख, शेषनाग शंख, कच्छप शंख, शेर शंख, सुदर्शन शंख शामिल हैं.
इनमें से कई शंख बहुत दुर्लभ हैं, लेकिन इन्हें पाना असंभव नहीं है. आप जब भी किसी बड़े तीर्थ स्थल पर जाएँ तो वहाँ शंखों के बड़े शोरूम होते हैं. इनमें से बहुत से शंख वहाँ आपको मिल सकते हैं. इसके अलावा सच्चे साधू-संतों और योगियों के पास भी इनके मिलने की संभावना होती है. तो आइए, हमारे ज्ञानवान पूर्वजों की शंख बजाने की परम्परा को हम अपने घरों में फिर से शुरू करें. बच्चों को भी शंख बजाने का अभ्यास करवाएं, जो जीवनभर उनके लिए लाभदायी होगा.


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