सावन के महीने में कीजिए भगवान् भोलेनाथ को प्रसन्न, क्यों है शिवजी को सावन का महीना सबसे प्रिय.. दिनेश मालवीय

सावन के महीने में कीजिए भगवान् भोलेनाथ को प्रसन्न, क्यों है शिवजी को सावन का महीना सबसे प्रिय.. दिनेश मालवीय
dineshआशा है आप सभी लोग हमारी संस्कृति में परम पावन माने जाने वाले सावन के महीने में भूतभावन भगवान् शिवशंकर की आराधना में लींन होंगे. युगों युगों से हमारे पूर्वज सावन के महीने को भगवान् शिव की भक्ति के लिए बहुफ उपयुक्त और लाभदायक मानते चले आ रहे हैं. शिव की साधना के लिए यह सबसे उपयुक्त समय है. चारोंतरफ वनस्पति ने हरियाली चूनर ओढ़ ली है. नदी-नदियाँ, झरने लाबबल भर गये हैं. मौसम न बहुत गरम और न बहुत अधिक ठंडा. भगवान् शिव की भक्ति के लिए इससे अधिक उपयुक्त वातावरण और क्या हो सकता है.


हम आपको बताने जा रहे हैं कि सावन का महीना शिवजी को क्यों विशेष रूप से प्रिय है. इस दौरान उनकी पूजा-आराधना से विशेष फल की प्राप्ति होती है. इसमें कुछ लोग पूरे महीने शिवजी के लिए व्रत-उपवास करते हैं, तो बहुत से लोग सावन के सोमवार पर व्रत-उपवास रखते हैं. आखिर शिवजी को बारह महीनों में सावन ही सबसे अधिक प्रिय क्यों है ?

शिव २



इसके बारे में एक पौराणिक कथा मिलती है. एक बार सनतकुमारों ने शिवजी से पूछा कि आपको सावन का महीना इतना प्रिय क्यों है? शिवजी ने कहा कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर योगशक्ति से अपनी दे का त्याग करने से पहले मुझे हर जन्म में पति रूप में पाने की कामना की. अपने दूसरे जन्म में सती ने राजा हिमाचल की पुत्री के रूप में जन्म लिया और उनका नाम पार्वती हुआ. पार्वती के रूप में उन्होंने सावन के महीने में अन्न,जल त्यागकर निराहार रहकर मुझे पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की. तपस्या के प्रारंभ में उन्होंने पत्तों का सेवन किया, लेकिन फिर यह भी छोड़ दिया. इसीलिये उनका एक नाम अपर्णा भी प्रचलित हुआ. उनके तप से प्रसन्न होकर मैंने उन्हें पत्नी के रूप में वरण किया. देवी पार्वती ने सावन के महीने में यह तपस्या की थी, इसीलिए मुझे यह महीना बहुत प्रिय है.



एक मान्यता और मिलती है कि भगवान् शिव सावन के महीने में धरती पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गये थे. ससुराल में उनका बहुत स्वागत हुआ और उनका जलाभिषेक किया गया. ऐसा माना जाता है कि हर साल सावन के महीने में शिवजी अपनी ससुराल आते हैं. इस दौरान उनके भक्त उनकी भक्ति में लीन रहते हैं. शिवजी उन पर विशेष रूप से कृपा करते हैं.




भगवान् शिव की कुछ रोचक बातें :




हिन्दू धर्म के त्रिदेवों में शिवजी सबसे अद्भुत हैं. उनकी वेश-भूषा, रहनसहन और हर बात बहुत अनूठी है. उन्हें शमशान बहुत प्रिय है. उनके गले में विषैले सर्पों की माला होती है. और भी अनेक लोकप्रचलित मान्यताएँ हैं, जिनके अनुसार वह भांग और धतूरे का सेवन करते हैं. हालाकि ज्ञानी और संत उनके द्वारा भांग-धतूरे के सेवन की बात से इनकार करते हैं. इसका यही सन्देश है कि जीवन में सभी जीवों को जीने का अधिकार है. किसीका भी तिरस्कार नहीं करना चाहिए.



भगवान् शिव की सबसे बड़ी विशेषता उनका त्रिनेत्र है. उनकी तीसरी आँख बहुत महत्त्व रखती है. यह आज्ञाचक्र की प्रतीक है. योगसाधक जब अपनी चेतना को इस चक्र तक ऊपर ले जाते हैं, तो वे सर्वज्ञ और सर्वसमर्थ हो जाते हैं. शिव तीसरी आँख को बहुत अनिवार्य होने पर ही खोलते हैं.उनकी तीसरी आँख खुलने से सभी को भय होता है.



सभी हिन्दू देवी-देवता अत्यंत सुन्दर आभूषण और वस्त्र पहनते हैं. लेकिन भगवान् शिव अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं. उनके भक्त योगी भी अपने शरीर पर भभूत रमाये रहते हैं.वास्तव में यह भस्म जीवन की नश्वरता की प्रतीक है. यह बताती है कि अंत में शरीर को राख ही हो जाना है. इसके अलावा , भस्म रोमछिद्रों को बंद कर देती है, जिससे शरीर में विपरीत मौसम का प्रभाव नहीं होता. साधक को गर्मी, सर्दी आदि का अनुभव नही होता.



भगवान् शिव के हाथ में त्रिशूल रहता है. इसके तीन शूल सत्व,तम और रजो गुण के प्रतीक हैं. इसका संकेत यह है कि हमें अपने तीनों गुणों को संतुलित रखना चाहिए. शिव का त्रिशूल परम विनाशक है. इससे कोई भी पार नहीं पा सकता. शिवजी के मस्तक पर अर्धचन्द्र स्थित है. चंद्रमा का स्वभाव शीतल होता है. यह इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य को अपने दिमाग को हमेशा शांत रखना चाहिए. चंद्रमा मन का भी प्रतीक है. अर्थात मन को वश में रखने की भी यह प्रेरणा देता है.



ॐ नम: शिवाय है सबसे सरल और चमत्कारी मंत्र :



वैसे तो भगवान् शिव के अनेक मंत्र हैं,लेकिन ॐ नम: शिवाय उनका सबसे सरल और सबसे प्रभावी मंत्र है.

· युगों-युगों से भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है, पांच अक्षरों वाला महामंत्र है- ॐ नम: शिवाय.

· यह सबसे सरल और चमत्कारी मंत्र है. इस मंत्र का अर्थ है कि हे ,शिव! मैं अपने जीवन को आपको समर्पित करता हूँ.

· इसमें पांच अक्षर हैं, इसलिए इसे पंचाक्षरी मंत्र भी कहा जाता है.

· शिव पुराण संहिता के अनुसार सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान शिवजी ने मनुष्यों के मनोरथों की सिद्धि के लिए इस महामंत्र का प्रतिपादन किया.

· इस महामंत्र के पांच अक्षर जीवन के पांच तत्वों- अग्नि, वायु, जल, आकाश और पृथ्वी- के प्रतीक हैं. मानव शरीर इन्हीं पांच तत्वों से बना है. इस मंत्र का हर एक अक्षर इन पाँचों तत्वों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है. नकारात्मकता को नष्ट करता है.

· रोग, शोक, दुःख, क्लेश और कष्ट का मूल कारण चित्त के विकार यानी impuritie of mind हैं. चित्त के शुद्धिकरण से इन सभी का नाश होता है. ॐ नम: शिवाय मंत्र चित्त पर सीधा प्रभाव डालता है. यह चित्त को विकारों से मुक्त कर उसके विशुद्ध रूप को उजागर करता है.चित्त के विकारों से मुक्त होता है यानी mind का purification होने लगता तो मित्रो, आइये सावन के महीने में अपने जीवन को पवित्रता के साथ जीते हुए भगवान् शिव की आराधना करते हुए अपने और अपने परिवार के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें.




हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



न्‍यूज़ पुराण



समाचार पत्रिका


    श्रेणियाँ