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प्रार्थना से ध्यान तक(Prayer to Meditation)

प्रार्थना से ध्यान तक-

ध्यान से पूर्व प्रार्थना कीजिए। वास्तव में ध्यान प्रार्थना का चरम बिन्दु होता है।

प्रार्थना करें और ध्यान करें, प्रार्थना करें और ध्यान करें, जब भी आप कर सकें और उसे अधिकतम सम्भव उत्साह से करें।

ध्यान का अभ्यास ऐसे प्रचुर फल प्रदान कर देगा, जिनसे आप अभी तक अनभिज्ञ हैं।

वास्तव में प्रार्थना का अर्थ (अथवा उद्देश्य) परमात्मा के साथ निरन्तर ही, कभी सचेतन, कभी अचेतन-स्तर पर, नाता जोड़े रहना है।

प्रार्थना करनेवाला मनुष्य स्वयं को कभी अकेला और असहाय अनुभव नहीं करता, क्योंकि वह अपने भीतर निरन्तर दिव्य सत्ता की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करता है।

Prayer to Meditation-

Prayer should precede Meditation. In fact, Meditation is the climactic peak of prayer.

Pray and meditate, pray and meditate, whenever you can and with all the fervor you can.

The practice of Meditation will, in course of time, yield such fruits in abundance as are thus far unknown to you.

In fact, Prayer means holding communion with the Divine all the time, both consciously and unconsciously.

A man of Prayer never feels lonely and helpless because he constantly feels the Sublime Presence of the Divine within himself.

PURAN DESK



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