दंड देना भी राजा का कर्तव्य है?

 

King John signing Magna Carta

दंड देना भी राजा का कर्तव्य है? 

भारतीय धर्म दर्शन में राजा के कर्तव्य की स्पष्ट व्याख्या है|  राजा प्रजा का  पालक है|  राजा मालिक नहीं लेकिन उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने के लिए इसलिए अधिकृत है क्योंकि वह संसाधन प्रजा को समान रूप से वितरित हो और उनका कोई  दुरुपयोग न कर सके| 

 प्रजा की रक्षा करना भी राजा का प्रमुख कर्तव्य है|  सवाल ये उठता है कि जब राजा प्रजा का रक्षक है तो वह प्रजा को दंड कैसे दे सकता है| 

कहा गया है| 

तस्मात्स्वविषये रक्षा कर्तव्या भूतिमिच्छता। यज्ञेनावाप्यते स्वर्गो रक्षणात्प्राप्यते यथा॥ 

इस श्लोक के अनुसार राजा का कर्तव्य प्रजा की रक्षा और उनका पालन पोषण करना है| 

तब सवाल ये उठता है कि ऐसा है तो फिर राजा दुष्टों को दंड कैसे दे सकता है? 

इस शंका का समाधान यह है कि प्रजा की रक्षा और दुका दमन-ये दोनों ही काम राजा के हैं, परन्तु इनमें से दूसरा (दुष्टों को दण्ड देने का) जो काम है यह दण्ड देने के लिये नहीं है, बल्कि प्रजा की रक्षा रुपी असली राजधर्म की पूर्ति के लिये एक अनिवार्य (unavoidable) अङ्ग या साधनरूपी काम है।

अतएव पाश्चात्य राजनीतिक ग्रन्थकारों ने भी “Doctrine of Vindictive punish mont” (बदला लेने के लिये सजा देने के सिद्धान्त) को छोड़कर अब यह स्वीकार कर लिया है कि “The King’s Punitive Function is there, only as a means towards the adequate fulfilment of his Protective Function.” (अर्थात् दण्ड देना भी प्रजा की रक्षा के अङ्ग रूप से ही राजा का कर्तव्य है।)


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