पुण्य का मूल्य

पुण्य का मूल्य

एक निर्धन व्यक्ति था, वह सरसो के तेल का दीपक जलाकर नित्य गली में रख देता था। चूँकि गली अँधेरी थी इसलिए वहाँ से गुजरने वाले राहगीरों को बहुत लाभ मिलता था। निकट रहने वाला एक धनवान व्यक्ति प्रतिदिन भगवान के मंदिर में एक घी का दीपक जलाया करता था।

मृत्यु होने पर जब दोनो यमलोक पहुँचे तो धनपति को निम्न श्रेणी और निर्धन को उच्च श्रेणी की सुविधा प्रदान की गयी, धनपति को यमराज का यह न्याय ठीक नहीं लगा और उन्होंने यमराज से इस संदर्भ में प्रश्न किया तो यमराज बोले- “पुण्य की महत्ता धन से नहीं कार्य के उपयोगिता सन्निहित भावना के आधार पर होती है, मंदिर तो पहले से ही प्रकाशित था।

उस व्यक्ति ने ऐसे स्थान पर प्रकाश फैलाया, जिससे हजारों अभावग्रस्त (जरूरतमंदों) तक प्रकाश पहुँचा, इसी से वह ज्यादा पुण्य का अधिकारी बना।

पंकज पाराशर


हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



न्‍यूज़ पुराण



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ