एमएसपी पर खरीदी: भण्डारण क्षमता की कमी बड़ी समस्या -सरयूसुत मिश्र

एमएसपी पर खरीदी: भण्डारण क्षमता की कमी बड़ी समस्या

-सरयूसुत मिश्र
MSPमध्यप्रदेश में एमएसपी पर गेहूं खरीदी शुरू हो गई है। हर साल खुले में एमएसपी पर खरीदा गया गेहूं बरसात में खराब होते हुए सैकड़ों फोटोग्राफ अखबारों में देखे जा सकते हैं। गेहूं की भंडारण क्षमता कम है खरीदा गया गेहूं मजबूरी में खुले में पन्नियों से ढक कर रखना पड़ता है। गेहूं की खरीदी सेंट्रल पूल के लिए की जाती है।

भारतीय खाद्य निगम गेहूं सेंट्रल पूल में उठाता है लेकिन एमएसपी पर गेहूं खरीदी की मात्रा अधिक होने से विभिन्न राज्यों से सेंट्रल पूल का गेहूं उठाने में क्रम और प्राथमिकता डिसाइड की जाती है। मध्यप्रदेश में आज स्थिति यह है कि पिछले साल खरीदे गए गेहूं से ही गोदाम भरे हुए हैं। लगभग 90 लाख टन पुराना गेहूं/धान गोदामों में रखा हुआ है।

गोदामों में रखे गेहूं मैं से औसतन सात लाख टन गेहूं प्रतिमाह केंद्र द्वारा उठाया जा रहा था लेकिन पिछले दो माह से गेहूं का उठाव कम हो गया है। मार्च महीने में तो केवल दो लाख टन गेहूं उठाया गया है। सेंट्रल पूल में गेहूं उठाने की गति ऐसी ही रही तो एमएसपी पर इस साल की जा रही गेहूं की खरीदी के भंडारण की समस्या उत्पन्न हो जाएगी।

msp मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से गेहूं के उठाव की गति बढ़ाने के लिए अनुरोध किया है। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी जहां किसानों के लिए एक बड़ा मुद्दा है वही सरकार के लिए भी किसान हितेषी देखते रहने का यह बड़ा माध्यम है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

पिछले साल मध्यप्रदेश ने रिकॉर्ड गेहूं की खरीदी की थी। मध्यप्रदेश ने पंजाब को पीछे छोड़ते हुए पिछले साल देश में पहला स्थान प्राप्त किया था। इस वर्ष भी समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए जो पंजीयन किसानों द्वारा कराया गया है वह पिछले साल की तुलना में पांच लाख अधिक है। इसलिए अनुमान लगाया जा सकता है कि इस साल भी समर्थन पर गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर रहेगा। पिछले साल तो कोरोना की स्थिति और भी गंभीर थी। 


bhandaranयद्यपि आज भी कोरोना की स्थिति कमोबेश उसी तरह की बनी हुई है लेकिन मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी का फुलप्रूफ सिस्टम बना लिया है इस कारण मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी बिना किसी व्यवधान के सहजता से की जाती है। गेहूं की खरीदी किसानों के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन गेहूं को सुरक्षित भंडारण सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।

बरसात में खुले में भीगते हुए जो गेहूं नष्ट होता है वह राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान है। सरकार या तो भंडारण क्षमता बढ़ाएं या केंद्र सरकार के साथ ऐसा समन्वय  स्थापित करें की सेंट्रल पूल का गेहूं खरीदी के साथ ही सेंट्रल पूल में पहुंचा दिया जाए। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए चल रहे आंदोलन का एक मुद्दा है।

मध्य प्रदेश के सरसों उत्पादक किसानों द्वारा इस भ्रम को तोड़ा है की समर्थन मूल्य किसानों के लिए एक अस्त्र है। इस साल चंबल के किसानों में समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव में सरसों बेची है। बाजार में सरसों का दाम ज्यादा होने के कारण किसान व्यापारियों को बेच रहे हैं इसका लाभ मंडी को भी मिल रहा है। कृषि को लाभकारी धंधा बनाने के लिए जरूरी है कि भंडारण क्षमता बढ़ाई जाए। कोल्ड स्टोरेज की संख्या भी बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकें। उचित मूल्य मिलने पर ही उसका विक्रय कर सके।

Priyam Mishra



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