क्‍वाड देशों ने शी चिनफिंग को दिया बड़ा झटका, भारत, अमेरिका, जापान और आस्‍ट्रेलिया से बाहर होंगी चीनी तकनीकी कंपनियां

क्‍वाड देशों ने शी चिनफिंग को दिया बड़ा झटका, भारत, अमेरिका, जापान और आस्‍ट्रेलिया से बाहर होंगी चीनी तकनीकी कंपनियां
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिन पहले क्वाड हेड्स ऑफ स्टेट्स की बैठक में जिस तरह से स्वच्छ प्रौद्योगिकी पर बात की थी, उसका न केवल अन्य तीन सदस्य देशों के प्रमुखों ने स्वागत किया, बल्कि तकनीकी विकास, विकास, डिजाइन, पर एजेंडा भी तय किया। 


भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त रूप से 5G से अन्य सभी अत्याधुनिक तकनीकों में चीन के प्रभुत्व को समाप्त करने के लिए, बल्कि प्रौद्योगिकी विकसित करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। यह ध्यान रखा जाएगा कि किसी अन्य देश की संप्रभुता खतरे में न पड़े।

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दुनिया भर के अधिकांश लोकतंत्रों में चीनी तकनीक पर आधारित कंपनियों के दरवाजे बंद हो सकते हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नेतृत्व ने क्वाड नेताओं और अधिकारियों की बंद कमरे में हुई बैठक में तकनीक के इस्तेमाल और इससे जुड़े खतरों के मुद्दे को सबसे ज्यादा मजबूती से उठाया। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के सामने सुरक्षा चुनौतियों को रेखांकित किया, खासकर 5G तकनीक के बढ़ते उपयोग के बाद।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन, जापानी प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ एक बैठक में मोदी ने राजनीतिक लाभ के लिए 5G तकनीक का उपयोग के खतरों की चेतावनी दी थी।

लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के अलावा, प्रौद्योगिकी को इस तरह से डिजाइन, विकसित, शासित और उपयोग किया जाना चाहिए जो हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करता है और वैश्विक मानवाधिकारों का सम्मान करता है। परिष्कृत और बहुत आवश्यक प्रौद्योगिकी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गोपनीयता की गारंटी देनी चाहिए। इससे समाज में किसी भी तरह का अनुचित भेदभाव नहीं होना चाहिए।

क्वाड देश हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर या प्रौद्योगिकी से संबंधित सेवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने पर सहमत हुए हैं। साथ ही, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक खुला और प्रतिस्पर्धी माहौल बनाने पर सहमति बनी है। चारों देश यह तय करने के लिए एक पारदर्शी और न्यायसंगत प्रणाली विकसित करेंगे कि कौन सी तकनीक अपनाई जाए या किन कंपनियों को प्रौद्योगिकी से संबंधित अनुबंध दिए जाएं।

चार देशों में बड़े पैमाने पर संयुक्त अनुसंधान और अनुसंधान अभियान आयोजित किए जाएंगे। लोकतंत्र में चीनी कंपनियों द्वारा विकसित तकनीक को लेकर चिंता जताई गई है।

पिछले एक साल में, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और कई अन्य लोकतंत्रों ने चीन द्वारा संवेदनशील प्रौद्योगिकी को अपनाने पर कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। चीन की हर बड़ी टेक कंपनी के पीछे चीनी सरकार या उसकी सेना से जुड़े संस्थानों के हाथों ने दूसरे देशों में उसके उत्पादों और सेवाओं को लेकर संदेह पैदा किया है। हाल के महीनों में यह बात सामने आई है कि चीन की सरकार अपनी ही कुछ प्रौद्योगिकी कंपनियों को दबाने का काम कर रही है।


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