यदि आपमे ये गुण हैं तो आप भी हैं ब्राम्हण?

ब्राह्मण की परिभाषा-
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यदि आपमे ये गुण हैं तो आप भी हैं ब्राम्हण?

शास्त्रों के अनुसार बा्ह्मण को निंदा ,झूठ ,घमंड ,ईर्ष्या ,
हिंसा और मान सम्मान से शून्य होना चाहिये।

ब्राह्मण सत्ता या धन प्राप्ति के लिये नीचे नहीं गिरता .
ब्राह्मण धर्म जीवन का महान आसन है,उससे नीचे नहीं गिरना चाहिये।

कितना ही बडा शासक या छत्रिय (शक्तिशाली ) हो ब्राह्मण. उसको दाहिना हाथ उठाकर ही आशीर्वाद देता है। यही  उसका अभिवादन है ।

क्रोध को जीतना ब्राह्मण का प्रथम कर्तव्य होता है। इस जगत के आकर्षणों का त्याग करना ब्राह्मण का धर्म है।

हजारों वर्षों से देश की श्रद्धा ,ऋषियों ,मुनियों और ब्राह्मणों की शिक्षा पर आधारित है।

सच्चा अपरिग्रही ब्राह्मण अपने पास कुछ नहीं रखता सब कुछ बांट देता है।

जैसा कि परशुराम ने पूरी पृथ्वी को जीतकर कश्यप ऋषि को दान कर दी थी। दान भी उचित पात्र को ही करना चाहिये.

ब्राह्मण संस्कारवान होता है।

संस्कारों से उसका पुुनर्जन्म होता है तभी वह द्विज कहलाता है।

ब्राह्मण निश्पक्ष ,निर्मल ,न्यायकारी ,पक्षपात रहित,
दयावान ,योग्य और बुद्धिशाली होता है ।

ब्राह्मण की जिव्हा सत्य की तलवार होती है। राज्याश्रित ब्राह्मण से न्याय की अपेक्षा करना व्यर्थ है।

जन्म से तो कोई भी ब्राह्मण हो सकता है -“परन्तु कर्म से, मन से और वचन से ब्राह्मण होना उल्लेखनीय है। तभी ब्राह्मण का सम्मान हो सकता है।

हमको ब्राह्मण बनने का प्रयत्न करना चाहिय् ताकि भारत राष्ट्र का नैतिक उत्थान हो।

 


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