रामबाई के पति की गिरफ्तारी न होने देने से पुलिस की हो रही छीछालेदर -सरयूसुत मिश्र

रामबाई के पति की गिरफ्तारी न होने देने से पुलिस की हो रही छीछालेदर
-सरयूसुत मिश्र
मध्य प्रदेश में दमोह जिले के हटा से विधायक राम बाई के पति गोविंद सिंह की गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट भी नहीं करा पा रहा है। विधायक के पति की हत्या के जिस आरोप में फरार हैं, वह 2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान ही सामने आया था। देवेंद्र चौरसिया की हत्या हुई थी। राम बाई बसपा विधायक हैं. 

विधानसभा चुनाव के बाद मध्यप्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में जो अल्पमत सरकार बनी थी, उसको बहुमत में लाने के लिए राम बाईं  उस समय की सुपरस्टार थी। उस समय पुलिस की औकात नहीं थी कि राम बाई  के पति को हाथ लगा सके। उस दौर में तो ऐसा था कि. सरकार बचाना था तो राम भाई की हर बात को मानना ही था। देवेंद्र चौरसिया की हत्या 15 मार्च 2019 को हुई थी. इसे राजनीतिक हत्या माना जा रहा था. लेकिन उस समय की सरकार में राम बाई की भूमिका को देखते हुए यह मामला दबाया गया. पूरे मामले को इस ढंग से डील किया गया कि देवेंद्र चौरसिया की हत्या से सही आरोपी का नाम ही आया. मध्यप्रदेश में सरकार बदली और भाजपा की सरकार बनी. तब भी राम भाई का महत्व बरकरार रहा । विधानसभा उपचुनाव के बाद जब सरकार पूर्ण बहुमत में आई तब राम बाई  का महत्व थोड़ा कम हुआ। हत्या के आरोपी पहले तो खुलेआम दादागिरी कर रहे थे. पहले तो हत्या के मामले में आरोपी बनाने में ही पुलिस को पसीने आए. जांच को इधर उधर भटकाया गया। देवेंद्र चौरसिया के परिजन भी लगातार केस के पीछे लगे रहे. अदालतों मैं निरंतर पैरवी करते रहे ।

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अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट ने विधायक के पति की गिरफ्तारी नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की है। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के संबंध में अदालत में जब स्टेटस रिपोर्ट रखी, तब सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस से पूछा अभी तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुयी है. अदालत के सामने यह भी विषय आया कि आरोपी गोविंद सिंह को पुलिस की ओर से गनमेन मिला हुआ है. सर्वोच्च अदालत में इस पर भी ना करते हुए कहा गया कि हत्या के आरोपी को गनमैन क्यों दिया गया? सर्वोच्च न्यायालय ने 5 अप्रैल की डेडलाइन आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दिया है. विधायक का पति कहां छुपा है जो पुलिस उस तक  नहीं पहुंच पा रही है। शुरू में तो विधायक के दबाव में और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकार की भूमिका के कारण जानते हुए भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर रही थी.

अभी क्या यही स्थिति चल रही है? मध्य प्रदेश पुलिस की पहचान एक अच्छे बल के रूप में रही है. इसलिए यह तो नहीं माना जा सकता कि पुलिस जानबूझकर गिरफ्तारी नहीं कर रही है, लेकिन गिरफ्तारी ना होना पुलिस पर सवाल जरूर खड़े कर रही है । सर्वोच्च न्यायालय ने जिस तरह की टिप्पणी की है वह पुलिस और सरकार के लिए बहुत गंभीर है। आरोपी की गिरफ्तारी हर हालत में होना चाहिए। हटा में ऐसा परसेप्शन बना हुआ है कि गिरफ्तारी नहीं होना एक सोचा समझा प्लान है। अगर यह अवधारणा सही है तो बहुत चिंताजनक है। आपराधिक मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप तो हर राज्य में हो रहा है । महाराष्ट्र में पुलिस के काम में हस्तक्षेप पर विवाद पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। अगर विधायक के पति की जल्दी गिरफ्तारी नहीं होती तो मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस को छीछालेदर बढ़ सकती है


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