भारतीय समाज:-संन्यास आश्रम (Sanyas Ashram)

भारतीय समाज:-संन्यास आश्रम (Sanyas Ashram)

जब वानप्रस्थी कठोर तपस्या के माध्यम से स्वयं को संसार से विरक्त कर लेता था तब वह वानप्रस्थ आश्रम का त्याग कर संन्यास आश्रम में प्रवेश करता था। संन्यास आश्रम में प्रवेश से अभिप्राय यह होता था कि व्यक्ति ने अब संसार के साथ सब तरह के संबंध समाप्त कर लिए हैं। उसके लिए न अब कोई परिवार है, न संबंधी, न घर-बार और न ही समाज। इस प्रकार सतत् तप के माध्यम से वह समस्त प्रकार की आवश्यकताओं से भी स्वयं को मुक्त कर लेता था।



 इस अवस्था में आकर वह पूर्णतः एकाकी बन जाता था। यही कारण है कि उसके परिजन यह मानकर कि अब उसका उनके लिए कोई अस्तित्व नहीं रह गया है, सांकेतिक रूप में उसका दाह-संस्कार और तर्पण आदि का संपादन भी कर लिया करते थे। इस प्रकार संन्यास आश्रम वह आश्रम माना जाता था जिसमें व्यक्ति मनुष्य जीवन के चरम लक्ष्य अर्थात् मोक्ष को प्राप्त करता था।


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