तंत्र, मन्त्र, यंत्र – में यन्त्र क्या है?

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यंत्र है क्या कैसे काम करते है, क्या प्रयोग है इनका तंत्रो, मंत्रो की दुनिया में आखिर क्या उपयोग या दुरुपयोग है इनका?

साधारण भाषा में यंत्र का तात्पर्य मशीन से होता है। यंत्र एक प्रकार कि मशीन है जो किसी काम को करने कि गति को बढ़ा देती है, अर्थात मान लीजिये किसी कार्य विशेष को करने में एक आम इंसान को अगर १० दिन लगते हो तो उसी काम को मशीनों के जरिये शायद १ या दो दिन में ही ख़त्म कर सकते है, उसी प्रकार से किसी प्रकार के तांत्रिक या मांत्रिक प्रयोगों को अतिरिक्त गति प्रदान करने के लिए यंत्रो का प्रयोग किया जाता है, यंत्र है क्या, रेखाओ के अनेको प्रकार के मिश्रण से बनी विभिन्न आकृतिया ही यंत्र है, जैसे आज कि मशीनों में कोई पुर्जा सही न जुड़ा हो तो वो मशीन सही से काम नहीं करेगी, उस प्रकार यदि यंत्रो में रेखाओ, वृत्तों इत्यादि का सही समिश्रण न हो तो यंत्र भी एक प्रकार से बेकार ही माने जाते है

यंत्र जहाँ हमारे तंत्रो और मंत्रो को ऊध्र्वगति प्रदान करते है वही यंत्र भी तभी अभिमंत्रित होते है जब उनके ऊपर मंत्रो का प्रयोग किया जाए, विभिन्न प्रकार के मंत्रो द्वारा विभिन्न प्रकार के यंत्रो को अभिमंत्रित कर उन्हें कार्य करने योग बनाया जाता है, इनके विशेष प्रकार के सौंदर्य शास्त्र और समरूपता के कारण मंदिरो और पूजा घरो में इनका बहुतायत प्रयोग किया जाता है, विभिन्न यंत्र विभिन्न देवी देवताओ को समर्पित होते है और विशेषतः उन्ही देवियो या देवताओ के कार्यो में लिए जाते है उदाहरण के लिए श्रीयंत्र माँ लक्ष्मी कि पूजा और उनकी कृपा प्राप्ति हेतु प्रयोग किये जाते है, यंत्रो का प्रयोग विशेषतः ध्यान, बुरी बलो से खुद को दूर रखने हेतु, विभिन्न शक्तियों को जागृत करने हेतु, धन और समृद्धि को आकर्षित करने हेतु प्रयोग किये जाते है, इनका प्रयोग कई जगहों पर रोज कि पूजा प्रार्थना में भी किया जाता है
तांत्रिक साधनाओं में यंत्र साधना का बड़ा महत्व है।  जिस तरह देवी-देवताओं की मूर्ति पूजा की जाती है और उन मूर्तियों से लोगों की आस्था और श्रद्धा जुड़ी होती है। उसी तरह यंत्र भी किसी देवी या देवता के प्रतीक होते हैं। इनकी रचना ज्यामितीय होती है। यह बिन्दू, रेखाओं, वर्गों, वृत्तों और पद्ददलों (फूल जैसी आकृति) से मिलाकर बनाए जाते हैं। इन यंत्रों को अलग-अलग प्रकार से इन्हें बनाया जाता हैं। कुछ यंत्रों को बनाना बहुत सरल होता है और कुछ को बनाना कठिन।

यंत्र देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। किसी लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करने के लिए यंत्र साधना को सबसे सरल विधि माना जाता है। तंत्र के अनुसार यंत्र में चमत्कारिक दिव्य शक्तियों का निवास होता है। यंत्र सामान्यत: ताम्रपत्र पर बनाए जाते हैं। इसके अलावा यंत्रों को तांबे, चांदी, सोने और स्फटिक से बनाया जाता है। ये चारों ही पदार्थ कास्मिक तरंगे उत्पन्न करने और ग्रहण करने की सर्वाधिक क्षमता रखते हैं।

कुछ यंत्र भोज पत्र पर भी बनाए जाते हैं। यंत्र में सारी दैवीय शक्तियां सूक्ष्म रुप से विद्यमान होती हैं। यंत्र आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विभिन्न देवी-देवताओं के रंग-रूप के रहस्य होते हैं। इसीलिए साधनाओं के माध्यम से इनमे जितनी शक्ति उत्पन्न की जाती है। यंत्र उतने ही चमत्कारी होते हैं।

विब्भिन्न प्रकार के यंत्र और उनका उपयोग:

१. अनुष्ठानों को लागू करने हेतु: ये यंत्र विभिन्न प्रकार के ज्यामितीय रूप होते है जिन पर अनुष्ठानों को पूर्ण किया जा सके|

२. रोजाना पूजा में इस्तेमाल होने वाले यंत्र: इन यंत्रो में ज्यामितीय स्वरूपो को मंत्रो कि सहायता से विभिन्न देवी देवताओ के अनुरूप जागृत किया जाता है, और कई बार लिखित मन्त्र भी इन ज्यामितीय रूपो में देखने को मिलते है|

३.विशेष कामनापूर्ति यंत्र: इन यंत्रो को विभिन्न प्रकार कि कामना पूर्ति हेतु विशेष पत्तो या कागज़ पर बनाया जाता है और कई बार विशेष पदार्थो जैसे कि चावल, भस्म इत्यादि के साथ धारण कराया जाता है|


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