निद्रा और ध्यान (Sleep and Meditation)

निद्रा और ध्यान

निद्रा तब अभिप्रेरित होती है, जब आप दोनों दुःख और सुख के सभी विचारों को नियंत्रित कर लेते हैं तथा उन्हें विस्मृति में दबा देते हैं। इसी प्रकार आपको ध्यान में गहरे उतर जाने के लिए दोनों दुःख और सुख की स्मृति-तरंगों से परे जाना होगा तथा विचारों की सम्पूर्ण उलझन को बाहर ही रोक देना होगा। ध्यान का अर्थ अपने भीतर संस्थित और विराजमान दिव्य सत्ता तक अन्तर्यात्रा करना है।

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निद्रा तथा ध्यान दोनों ही विश्रामपूर्ण अवस्थाएँ होती हैं, किन्तु ध्यान अल्प अवधि में ही निद्रा की अपेक्षा कहीं अधिक आराम और ताजगी दे देता है। ध्यान न केवल सहानुभूति स्नायविक सक्रियता को निम्न कर देता है, बल्कि अधिकतम विश्राम भी प्रदान कर देता है तथा अपने भीतर स्वस्थ और सुखी होने का एक गहन बोध उत्पन्न कर देता है।

Sleep and Meditation

Sleep is induced when you get over the thoughts of both pain and pleasure and bury them in oblivion. So also, you have to go beyond the ripples of memories. both unpleasant and pleasant, and shut out all the jumble of thoughts in order to go deep into Meditation which means an inward journey to Divinity, enshrined and enthroned deep within you.

Sleep and Meditation are both states of repose but meditation can furnish far greater relaxation and freshness than sleep in a short period. Meditation not only lowers the sympathetic nervous activity but also gives maximum rest along with a profound sense of well-being.

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