श्रीलंका ने चीन को सौंपा 540 एकड़ का हंबनटोटा बंदरगाह

श्रीलंका ने चीन को सौंपा 540 एकड़ का हंबनटोटा बंदरगाह
कोरोना काल में भी चीन ने भारत को चारों तरफ से घेरने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब चीन ने श्रीलंका के साथ मिलकर भारत की टेंशन बढ़ा दी है।

पोर्ट सिटी आर्थिक आयोग विधेयक हाल ही में श्रीलंकाई संसद में पारित किया गया है। इस बिल को पास कर, श्रीलंका ने अपने हंबनटोटा बंदरगाह की 540 एकड़ जमीन चीन को सौंप दी है। बंदरगाह भारत में कन्याकुमारी से केवल 550 किमी दूर है। इस प्रकार, चीन ने हमेशा के लिए भारत पर नजर रखने के लिए एक रणनीतिक स्थान पाया है। दूसरे शब्दों में, चीन और भारत के बीच की दूरी दक्षिण में केवल 550 किमी है।

hambantota port of shri Lanka
श्रीलंकाई सरकार ने भारत को आश्वासन दिया कि हम ऐसा कोई निर्णय नहीं लेंगे। इससे भारत के हितों को नुकसान होता है और फिर भी इस बिल को पास कर श्रीलंका ने चीन को 540 एकड़ जमीन दी है। इस तरह चीन, जो लद्दाख में भारत के खिलाफ लामबंद हुआ था, अब श्रीलंका के रास्ते भारत को घेरने की तैयारी कर रहा है।

इससे पहले 2018 में, श्रीलंका सरकार ने हंबनटोटा बंदरगाह पर एक नौसैनिक अड्डा बनाने का फैसला किया था। क्योंकि चीन को डर था कि विदेशी ताकतें यहां चीन के हितों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

हंबनटोटा का बंदरगाह वह जगह है जहां एशिया और यूरोप के बीच शिपिंग मार्ग गुजरता है। चीनी कंपनी ने बंदरगाह को 99 साल के लिए पट्टे पर लिया है। यह बंदरगाह चीन की वन बेल्ट एंड वन रोड परियोजना में अहम भूमिका निभा सकता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने बंदरगाह के बारे में चिंता व्यक्त की है। जापान को भी यह डर है कि चीन बंदरगाह का इस्तेमाल अपने नौसैनिक अड्डे के रूप में करेगा। हालांकि, श्रीलंकाई सरकार का कहना है कि चीन को सैन्य उद्देश्यों के लिए बंदरगाह का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।



Priyam Mishra



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