भोपाल: राज्य सरकार ने रेत का खनन करने वाले ठेकेदारों पर कड़े प्रावधान लागू किये हैं तथा अब खदान न चलाने और उसे वापस करने पर ऐसे ठेकेदारों को ब्लेक लिस्ट किया जायेगा। इसके लिये खनिज विभाग के माध्यम से मप्र रेत खनन, परिवहन, भण्डारण एवं व्यापार नियम 2019 में संशोधन कर दिया गया है।
नये संशोधन के अनुसार, अब रेत खदान की नीलामी के लिये अपसेट प्राइज, समूह की निविदा में सम्मिलित समस्त खदानों में पृथक-पृथक उपलब्ध रेत मात्रा (घनमीटर) के कुल योग का रुपये में 250 गुना के बाराबर होगी। लेकिन राज्य सरकार चाहगी तो अपसेट प्राइज की गणना, रेत की मांग के आंकलन के आधार पर, समस्त खदानों की मात्रा के कुल योग से भिन्न मात्रा भी निर्धारित कर सकेगी। इसी प्रकार, अब बैंक गारंटी निविदा प्रस्तुत करने की तिथि से 180 दिन की अवधि के स्थान पर निविदा आमंत्रित करने वाली सूचना की तिथि से 240 दिन की अवधि के लिये वैध रहेगी।
सफल निविदाकार को खदान स्वीकृत होने पर ठेकेदार को 7 कार्य दिवस में राशि जमा करना होगी जिसे 10 दिन और बढ़ाया जा सकेगा। इस पर भी राशि जमा न करने पर निविदा निरस्त कर सुरक्षा राशि जब्त कर पुन: ई-निविदा जारी की जायेगी और बकाया कर की राशि भूराजस्व के तौर पर वसूली जायेगी।
ठेके की शर्तों का उल्लंघन करने पर ठेका निरस्त कर दिया जायेगा और ठेकेदार को ब्लेक लिस्ट कर तीन साल तक किसी भी ठेके में भाग नहीं लेने दिया जायेगा। खनन का अनुबंध करने के बाद एक वर्ष तक खदान वापस नहीं की जा सकेगी। अनुबंध समाप्ति की तिथि के छह माह पूर्व खदान वापस करने का आवेदन स्वीकार नहीं किया जायेगा। खदान वापस करने पर पुन: ई-निविदा करने पर यदि कोई हानि नहीं होती है तो ठेकेदार को सुरक्षा निधि बिना ब्याज के वापस कर दी जायेगी।
डॉ. नवीन आनंद जोशी