मन को स्थिर करने के लिए स्वामी विवेकानंद की विधि .. धारणा

 

Swami Vivekananda-mind-Newspuranयदि मन को किसी स्थान में बारह सेकेंड धारण किया जाए तो उसे एक धारणा होगी। यह धारणा द्वादशगुणित होने पर एक ध्यान और यह ध्यान द्वादशगुणित होने पर एक समाधि होगी।


सूखे पत्तों से ढकी हुई जमीन पर,चौराहे पर,अत्यंत कोलाहल पूर्ण या डरावने स्थान में दीमक के ढेर के समय अथवा जहाँ अग्नि या जल से किसी भय की आशंका हो,जहाँ जंगली जानवर हो, जो स्थान दुष्ट लोगों से भरा हो,ऐसे स्थानों में योग की साधना करना उचित नहीं। यह बात विशेषकर भारत के बारे में लागू होती है। जब शरीर अत्यंत आलसी या बीमार मालूम होता है अथवा जब मन अत्यंत दुख पूर्ण रहता हो तब भी साधना नहीं करनी चाहिए। किसी गुप्त और निर्जन स्थान में जाकर साधना करो जहां लोग तुम्हें बाधा पहुँचाने ना आ सके। अपवित्र जगह में बैठकर साधना मत करना बल्कि सुँदर दृश्य वाले स्थान में या अपने घर के एक सुँदर कमरे में बैठकर साधना करना। साधना में प्रवृत होने के पहले समस्त प्राचीन योगियों अपने गुरुदेव तथा भगवान को प्रणाम करना और फिर साधना में प्रवृत्त होना। 

ध्यान का विषय पहले ही कहा जा चुका है। अब ध्यान की कुछ प्रणालियाँ वर्णित की जाती हैं। सीधे बैठकर अपनी नाक के ऊपरी भाग पर दृष्टि रखो। तुम देखोगे कि उससे मन की स्थिरता में विशेष रुप से सहायता मिलती है। आँख के दो स्नायुओं को वश में लाने से प्रतिक्रिया के केंद्र स्थल को काफी वश में लाया जा सकता है। अतः उसे इच्छाशक्ति भी बहुत अधीन हो जाती है। अब ध्यान के कुछ प्रकार कहे जाते हैं। सोचो सिर के कुछ ऊपर एक कमल है धर्म उसका मध्य भाग है ज्ञान उसकी नाल है योगी की अष्ट-सिद्धियाँ उस कमल के आठ दलों के समान है और वैराग्य उसके अंदर की कर्णिका यानी बीजकोष है। जो योगी अष्ट-सिद्धियाँ आने पर भी उनको छोड़ सकते हैं वही मुक्ति प्राप्त करते हैं। इसलिए अष्ट सिद्धियों का बाहर के आठ दलों के रूप में तथा अंदर की कर्णिका का परवैराग्य अर्थात अष्ट-सिद्धियाँ आने पर भी उनके प्रति वैरागय के रूप में वर्णन किया गया है।

इस कमल के अंदर हिरण्यमय सर्व शक्तिमान और अस्पर्श ओंकारवाच्य अव्यक्त किरणों से परिव्याप्त परम ज्योति का चिंतन करो। उस पर ध्यान करो। स्वामी विवेकानंद

संकलन M ममता


हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



न्‍यूज़ पुराण



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ