दिव्य सत्ता-The Divine

दिव्य सत्ता-
  • दिव्य सत्ता विशुद्ध चेतना है। दिव्य सत्ता शाश्वत है तथा अनादि और अनन्त है। केवल दिव्य सत्ता का ही अस्तित्व है|
  • मैं वह हूँ, वास्तव में मैं वही (दिव्य त्त्व) हूँ। अहं ब्रह्मास्मि।
  • दिव्य सत्ता ही वास्तव में सत् (अस्तित्ववान्) है और आनन्दमय है।
  • अन्य सब कुछ क्षणभंगुर है तथा क्षय और विनाश के अधीन है। जब कि अन्य सब कुछ निरन्तर परिवर्तनशील है, दिव्य सत्ता परिवर्तन रहित है।
  • अतः दिव्य सत्ता सत् चित् आनन्द है। ध्यान में मनुष्य यह अनुभूति कर सकता है कि उसका यथार्थ स्वरूप वही है जो, विश्वसत्ता का है।
The Divine
  • The Divine is Pure Consciousness. The Divine is Eternal and without a beginning or an end.
  • The Divine alone exists. All else is transitory and subject to decay and destruction.
  • While all else undergoes constant change, the Divine is changeless. The Divine is truly existent and is All Bliss.
  • So, the Divine is Existent Reality, Pure Consciousness and Absolute Bliss.
  • In Medistation one can realize that one's true Self is the same as the Universal Self.
  • I am He, verily I am He.

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