ओजोन परत का छेद फिर से बड़ा हुआ अंटार्कटिका के ऊपर, इस साल कितना है अंतर

ओजोन परत का छेद फिर से बड़ा हुआ अंटार्कटिका के ऊपर, इस साल कितना है अंतर

ओजोन परत में बड़ते हुए छेद ने दुनिया के सभी वैज्ञानिकों को चिंता में दाल रखा है. इस छेद ने सबसे ज्यादा असर अंटार्कटिका में किया है. इंसानों द्वारा फेहलाये गए प्रदूषण के कारण यह छेद बढ़ता जा रहा है. देखा जा रहा है पिछले कुछ सालों में इसके बढ़ने की दर घटी है. इस साल की बात करें तो यह छेद ठंडे के मौसम में फिर से बनने लगा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार ठंडे तापमान और तेज ध्रवीय हवाओं से अंटार्टिका के ऊपर गहरा ओजोन छेद होने में मदद मिली है. यह छेद नवंबर तक बने रहने की उम्मीद है.
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कितना बड़ा हो गया है ये छेद
अमेरिका के नेशनल Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) और नासा के वैज्ञानिकों का मनना है कि इस साल अंटार्कटिका का ओजोन छेद अपने वार्षिक आकार के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. 20 सितंबर को इसका आकार 2.48 करोड़ वर्ग किलोमीटर हो गया था जो अमेरिका महाद्वीप के बराबर है. रिसर्च से पता चला है कि दक्षिणी ध्रुव के ऊपर Stratosphere में चार मील ऊंचे स्तंभ में ओजोन पूरी तरह से गायब हो गई है.

पिछले 40 चालीस सालों में कितना अंतर आया है 
वैज्ञानिकों का बोलना है कि इस इलाके में पिछले 40 साल के मुताबिक साल 2020 में ओजोन छेद का यह 12वां सबसे बड़ा क्षेत्रफल है. वहीं गुब्बारों के उपकरणों से लिए गए मापन के अनुसार यह पिछले 33 सालों में 14वीं सबसे कम ओजोन की मात्रा है. ओजोन के स्तरों में लगातार हो रही कमी में Montreal protocol के लागू होने से कंट्रोल हुआ है. अगर पिछले दशकों के जैसे हालात अब भी होते तो यह और भी ज्यादा बड़ा हो जाता है.

ये दो तत्व हैं जिम्मेदार
मैरीलैंड के ग्रीनबेल्ट स्थित नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में अर्थ साइंसेस के प्रमुख वैज्ञानिक पॉल न्यूमैन का कहना है कि वर्ष 2000 के उच्चतम स्तर से Stratosphere में क्लोरीन और ब्रोमीन के स्तर सामान्य स्तर की ओर 16 प्रतिशत गिरा है.” यह क्लोरीन और ब्रोमीन के अणु ही होते हैं जो ओजोन अणुओं को ऑक्सीजन के अणुओं में बदलते रहे है.

ओजोन परत कितनी जरुरी है पृथ्वी के लिए 
Stratosphere पृथ्वी की सतह से करीब 25 मील की ऊंचाई पर है. ओजोन परत ऑक्सीजन के तीन परमाणों से मिल कर बनती है और बहुत ही तेजी से प्रतिक्रिया करती है. यही ओजोन की परत पृथ्वी के जीवन के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है. ये परत सूरज से आनेवाली UV radiation को रोकती है. इस रेडिएशन से त्वचा कैंसर, कैट्रैक्ट, प्रतिरोधी समस्याओं में कमी जैसी समस्याओं के साथ पेड़-पौधों एवं संवेदनशील छोटे समुद्री पौधों को नुकसान पहुंचाती है. ये और भी कई प्रकार की बिमारियों के कारण बनती है. जिससे वैश्विक खाद्य शृखंला को प्रभावित होती है.

खत्म होती है ओजोन
लेकिन ओजोन परत में सूरज कि किरणों की मौजूदगी में वाहनों और अन्य स्रोतों से निकले प्रदूषण उत्सर्जन की फोटोकैमिकल प्रतिक्रियाएं होती हैं जिससे निचले वायुमंडल में हानिकारक स्मॉग बनता है. अंटार्कटिका में ओजोन होल Southern hemisphere में सर्दियों के अंत में सूर्य की वापसी के बाद ओजोन खत्म करने वाली प्रतिक्रियाओं के कारण बनती हैं.

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किस कारण से कम हुई ओजोन घटने की दर
इन प्रतिक्रियाओं के कारण Stratosphere के बादलों में ठंडी परतें बन जाती है. यहीं ये प्रतिक्रियाएं ओजोन अणुओं को नष्ट करती हैं. गर्मी के तापमान में Stratosphere में बादल कम बनते हैं और वे लंबे समय तक नहीं रहते जिससे ओजोन के खत्म होने की प्रक्रिया सीमित रह जाती है. पिछले कुछ सालों में देखा जाये की सितंबर में 20 साल पहले की तुलना में जिस दर से ओजोन के घटने की दर कम हुई है उसका कारण वायुमंडल में कम क्लोरीन होना है.


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