सामाजिक तानेबाने के लिए नया ख़तरा, इंटरनेट की ऑनलाइन कम्युनिटी “इनसेल मूवमेंट”

सामाजिक तानेबाने के लिए नया ख़तरा, इंटरनेट की ऑनलाइन कम्युनिटी “इनसेल मूवमेंट”
ज़बरिया ब्रम्ह्चारियों की नयी जमात, हिंसा में बदलता महिला विरोध:

किसी शायर ने कहा है:-

न पूछ मेरे सब्र की इन्तहा कहाँ तक है, तू सितम कर ले तेरी हसरत जहाँ तक है|

वफ़ा की उम्मीद जिन्हें होगी उन्हें होगी, हमे तो देखना है तू बेवफा कहाँ तक है||


ये शायरी पुरुष और महिला दोनों के लिए हो सकती| प्यार में बेवफा कोई भी हो सकता है| शायरीयों में महबूबा की बेवफाई की बातें भरी पड़ी है| शायर बेवफा महबूबा से नफरत की बजाय प्यार करता है? दुनिया में एक कम्युनिटी आकार ले रही है जो सिर्फ महिलाओं को बेवफाई के लिए जिम्मेदार मानती है| इतना तो ठीक है लेकिन इसका सदस्य शायरों की तरह बेवफा प्रेमिका से मरते दम तक प्यार नहीं करता|

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ये वो कम्युनिटी है जो अपने एक तरफा विचारों से ऐसे लोगों को भ्रमित कर रही है जो किन्हीं कारणों से मैरिज, लव और सेक्स से महरूम रह गए| ये आन्दोलन औरतों को बेवफा मानने तक सीमित रहता तो चल भी जाता लेकिन ये विचार अब जहर बनता जा रहा है, एक नए तरह का महिला विरोधी आतंकवाद इंटरनेट पर नफरत का जाल बुन रहा है|


आज हम बात करने जा रहे हैं दुनिया के उन लोगों की, जो खुदको “जबरिया ब्रह्मचारी” कहते हैं, इंटरनेट की दुनिया में इन्हें “इन्सेल” नाम से जाना जाता है|

औरतों पर पुरुषों ने कितने जुल्म किए| कितने मासूम दिलों के अरमान तोड़े| इतिहास में पुरुषों ने महिलाओं के आन बान शान से खूब खिलवाड़ की| आज भी महिलाओं के साथ पुरुषों के अत्याचार कम नहीं हैं| कैसे पुरुष अपनी ही करनी के कारण “इन्सेल” बन गए इन कारणों का खुलासा हम वीडियो के आखिर में करेंगे|

वक्त बदल रहा है| दुनिया नारी को सम्मान और उन्हें बराबरी का दर्जा देने की तरफ आगे बढ़ रही है दूसरी ओर ऐसे संगठन और डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार हो रहे हैं जो पूरी तरह स्त्री विरोध पर खड़े हैं| ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महिलाओं के प्रति जहरीले विचार रखने वाले लोगों का एक समूह खड़ा हो गया है|

ये समूह है जो मानता है कि महिलाएं खुद को मिले अधिकारों का दुरुपयोग कर रही हैं| इस समूह में वो लोग शामिल हो रहे हैं जो खुद को औरतों का शिकार मानते हैं| ये लोग हैं जो खुद को जबरिया ब्रह्मचारी कहते हैं| ये कम्युनिटी महिलाओं के प्रति विचारों से हिंसा फैलाती हैं| नफरत की ये आग कई जगह हिंसा का रूप ले चुकी है|

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यूं तो महिलाओं की बेवफाई पर अनेक फिल्में गाने और गजलें बने हैं| बात कुछ महिलाओं को बेवफा मानने तक सीमित रहती तो चलता लेकिन ये बात बहुत आगे बढ़ चुकी है| इंटरनेट की ऑनलाइन कम्युनिटी “इनसेल मूवमेंट” महिलाओं के प्रति बेहद नफरत से भरी है|

ये मर्दों की वो दुनिया है जिसमे कहा जाता है कि महिलाएं अब दुनिया को चला रही हैं| लेकिन वो इसकी जिम्मेदारी नहीं लेती, वो पुरुषों को प्रताड़ित करती हैं| उन्हें “जबरिया ब्रह्मचारी” बनाती है लेकिन पुरुषों को इस प्रताड़ना के खिलाफ शिकायत करने तक का हक नहीं है।

महिलाओं की बेवफाई पर पाकिस्तानी गायक “अत्ताउल्लाह खान” अपनी दर्द भरी आवाज से ऐसे मर्दों की आवाज़ बने थे जो खुद को प्रेमिका की बेवफाई का शिकार मानते थे| सभ्य समाज ने भी अताउल्ला के खान को खूब सुना| घरों में इस तरह के गाने बजाए जाने को गलत नहीं माना जाता था| भारत में भी बेवफाई की गजलें बहुत लोकप्रिय होती रही हैं|

अत्ताउल्लाह ने अपनी प्रेमिका की बेवफाई पर जो अल्फ़ाज़ अपनी आवाज में प्रस्तुत किए वो आज भी टूटे हुए दिल को राहत पहुंचाते हैं|

1. मुझको दफनाकर जब वो वापस जाएंगे|

2. वफा ना रास आई तुझे ओ हरजाई|

3. मेरा दर्द तुम ना समझ सके|

4. दिल तोड़ के हंसती हो मेरा|

कुछ इसी तरह का ख्याल दुनिया में अनेक मर्द रखते हैं| ये वो मर्द है जो औरतों के प्रति खास तरह का दुराग्रह रखते हैं| ये कहते हैं कि औरतें शिकारी की तरह हो गई है|

ये तब का मानता है कि एक सामान्य सा दिखने वाला आदमी औरत की वजह से कई बार “अनैच्छिक वर्जिन” बन जाता है| जिसे इंटरनेट की दुनिया में इंसेल कहा जाता है| वे सोचते हैं कि वो महिलाओं को आकर्षित नहीं कर सकते| वो एक खास तरह के कांपलेक्स में जीते हैं| खुद को ये पुरुष लैंगिक उत्पीड़न का शिकार मानते हैं|

ये बेहद निराश हैं और किसी लड़की का साथ ना पाने की वजह से खुद को उनके प्रति घृणा और क्रोध से भर लेते हैं| 

इनमें वो लोग भी शामिल है जिनका किसी लड़की से अफेयर हुआ, लेकिन उसने किसी दूसरे पुरुष के लिए उन्हें छोड़ दिया| हालांकि बेवफाई के लिए शायरों ने ये भी कहा, कुछ तो मजबूरियां रही होंगी यूं ही कोई बेवफा नहीं होता|

लेकिन इंटरनेट पर मौजूद यह कम्युनिटी इस बेवफाई के पीछे महिलाओं के स्वार्थ को मानती है| प्यार में धोखा खाए ये लोग नेट पर मौजूद ऐसे प्लेटफार्म से कनेक्ट हो जाते हैं, जो महिलाओं के प्रति नफरत और क्रोध से भरे हुए हैं|

द रेड पिल ये एक online community है जो  Reddit पर होस्टेड है| ये वो जगह है जहाँ पुरुष महिलाओं के प्रति अपने जहरीले विचार रखते हैं| यहाँ पुरुषों को उनकी कमजोर भावनाओं के कारण उकसाया जाता है| उन्हें इतना भड़काया जाता है कि ये हिंसा पर उतारू हो जाते हैं|

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इसी साल 12 अगस्त को ऐसे ही एक व्यक्ति ने ब्रिटिश शहर प्लायमाउथ में 5 लोगों की हत्या कर दी| ये व्यक्ति सोशल मीडिया और इंटरनेट पर महिला विरोधी ग्रुप सक्रिय सदस्य था| ऐसी ही अंधाधुंध फायरिंग की घटनाएं अमेरिका में सामने आई हैं| जहां पर खुद को इन्सेल मानने वाले व्यक्ति ने अंधाधुंध फायरिंग की|

इन ग्रुप पर कहा जाता है कि महिलाएं सेक्स के लिए “अल्फा” मेल से संबंध रखती हैं| इन्हें “चाड” कहा जाता है| पैसों की जरूरत के लिए ये  “बीटा” मेल से विवाह रचाती हैं| महिलाओं की इस प्रवृत्ति के कारण वो लोग अविवाहित या आजीवन ब्रह्मचारी रह जाते हैं जो अल्फा और बीटा “मेल” की तरह खूबी नहीं रखते|

ये  लोग खुद को कमजोर मानते हैं| ये लोग सोचते हैं इस सेक्स, प्यार और खुशी उनकी पहुंच से बाहर है| इसकी जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ महिलाएं हैं| हकीकत भले ही ऐसी ना हो लेकिन खास तरह का ये ग्रुप पुरुषों के अधिकार के लिए बड़ी-बड़ी बातें करता है| इन लोगों की ये कम्युनिटी वैसे तो आम लगती है| लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि समाज में ये कड़वा जहर घोल रही है|

मनोचिकित्सक कहते हैं कि ये एक खास तरह का “मनोविकार” है जो अपनी असफलता का शिकार दूसरों को मानने से पैदा होता है| ये मनोविकार तब और बढ़ जाता है जब इस तरह के विचारों का पोषण मिलने लगता है| इनके विचार किसी आतंकी संगठन से कम नहीं हैं|

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इंसेल का एक चरमपंथी वर्ग महिलाओं के खिलाफ हिंसा की भी वकालत करता है। हालांकि अपसंस्कृति के सभी मेंबर्स हिंसक नहीं हैं।

‘रेड पिल’ (Red pill) और ‘ब्लैक पिल’ (Black Pill) थ्योरी क्या है?

ब्लैक पिल’ थ्योरी, जो अक्सर इंसेल्स से जुड़ी है, पराजयवादी विचार (Defeatist Idea) को उकसाती है| ये मानते हैं कि जन्म के समय ही आपका भाग्य निर्धारित कर दिया जाता है और आप जो भी बदलाव करने की कोशिश करते हैं, उससे आपकी यौन पूंजी (Sexual Capital) को बदला नहीं जा सकता है।

दूसरी ओर ‘रेड पिल’ थ्योरी मानने वालों का भरोसा हैं कि विश्व महिलाओं के प्रति पक्षपाती है और नारीवाद को महिला वर्चस्व के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि महिलाओं के पक्ष में एक व्यवस्थित पूर्वाग्रह विद्यमान है।

ये एक नया चरमपंथी वर्ग है जो महिलाओं के खिलाफ हिंसा की वकालत करता है| ये अप -संस्कृति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है| समय रहते समाज में पनप रही इस संस्कृति को एक्सपोज करना जरूरी है|

विशेषज्ञ मानते हैं कि वे लोग जो किन्ही कारणों से सेक्स, मैरिज या स्त्री प्रेम से वंचित रह गये हैं उसका मूल कारण समाज की महिला विरोधी सोच ही है| दरअसल स्त्रियों को कमजोर मानने के कारण भ्रूण हत्या, गर्भपात, और अन्य तरीकों ने महिला पुरुष अनुपात में बड़ा अंतर ला दिया| महिलाओं की संख्या बेहद कम हो गई और पुरुषों की संख्या बढ़ती रही|

भारत में औसतन एक हजार पुरुषों पर 850 महिलाएं हैं| स्वाभाविक सी बात है कि 1000 में से डेढ़ सौ पुरुषों को अविवाहित रहना होगा| 100 में से 15 पुरुष महिलाओं की कमी के कारण ”आजीवन अनैच्छिक ब्रह्मचारी” रह जाएंगे या शादी से महरूम| समाज में यदि बड़ी संख्या में इंसेल यानी “ज़बरिया ब्रह्मचारी” पुरुषों की संख्या बढ़ रही है तो स्त्री इसके लिए कतई दोषी नहीं है|

भारत में ये अपसंस्कृति पैर ना पसारे इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना पड़ेगा| जब तक समाज में समानता नहीं आएगी हर व्यक्ति को विवाह का अधिकार मिलना संभव नहीं है| खास तौर पर पुरुषों के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण होने वाला है क्योंकि समाज ने पुरुषों को तवज्जो दी और लड़कियों को पैदा होने से रोका|

समाज में यदि स्त्रियों को दोयम दर्जे कम काम ना मिला होता तो उनके हक के लिए इतने कानून भी ना बनाने पड़ते| ये बात भी जहन में रखनी होगी कि कहीं स्त्रियों के पक्ष में बने कानून का किसी भी स्तर पर दुरुपयोग तो नहीं हो रहा| अदालत ने भी इस बारे में सजग और सक्रिय हैं वे इस बात पर पैनी निगाह रखी हुई है कि कहीं पुरुषों के मौलिक अधिकारों  का हनन तो नहीं हो रहा|

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आने वाले समय में जब दोनों ही बराबरी पर होंगे तो दोनों की संख्या भी समान होने लगेगी और समाज पुरुषों के “अनैच्छिक ब्रह्मचारी” बनने का सिलसिला थमेगा|


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