धूमकेतु, डायनासोर सहित जीवित जीवों के विलुप्त होने का मुख्य कारण

वैज्ञानिकों के नए शोध से पता चलता है कि धूमकेतु के गिरने के बाद आई अत्यधिक ठंड, उस समय डायनासोर सहित जीवित चीजों के विलुप्त होने का मुख्य कारण था। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि बर्फ से बना धूमकेतु सौर मंडल के किनारे पर बिखरा हुआ है और बृहस्पति के प्रभाव में पृथ्वी पर गिर गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह घटना हर 25 से 75 मिलियन वर्षों में एक बार होती है।

गाल शलभ प्रभाव (Cheekblow effect) एक धूमकेतु या अन्य खगोलीय पिंड का परिणाम है, जिसका व्यास 11-81 किमी है जो तेजी से जमीन पर गिरता है और प्रतिकूल प्रभाव डालता है। मेक्सिको के पास की जगह में एक खगोलीय पिंड के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद, डायनासोर सहित कई जीवित जीव धरती से गायब हो गए हैं। यही कारण है कि इस घटना को गाल शलभ प्रभाव कहा जाता है।

सबसे ठंडे क्षेत्र के धूमकेतु का पृथ्वी के पास के क्षुद्रग्रहों की तुलना में बहुत कम तापमान होगा। जैसे ही धूमकेतु सूर्य के पास पहुंचता है, वह वाष्पित हो जाता है, जिससे धूमकेतु के अंदर एक तीव्र चक्रीय बल पैदा होता है जिससे वह विघटित हो जाता है। अध्ययन से पता चलता है कि एक धूमकेतु के गिरने से, जो विस्फोट के कारण हजारों टुकड़े में विभक्त हुआ और डायनासोर के विनाश एवं जलवायु परिवर्तन का कारण बना।

अधिकांश धूमकेतुओं में कार्बोनिअस चोंडराईट (Carbonaceous chondrite) होता है। डायनासोर के विलुप्त होने की अवधि के दौरान कार्बोनिअस चोंडराईट की उपस्थिति पाई गई है। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि धूमकेतु पृथ्वी पर जीवन के विलुप्त होने का कारण बनता है।

 

Priyam Mishra



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