धर्मांतरण:  धर्मांतरण की जड़ें गहरी हैं, सदियों से निशाने पर भारत

धर्मांतरण:  धर्मांतरण की जड़ें गहरी हैं, सदियों से निशाने पर भारत
धर्मांतरण पर बहस नयी नहीं है|  धर्मांतरण  एक ऐसा मुद्दा है जो कहा तो चुनावी कहा जाता है लेकिन वास्तव में इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं|

धर्म के विस्तार के लिए धर्मांतरण के लिए जोर जबरदस्ती भी बहुत हुई|

ईसाई और मुस्लिमों ने धर्मांतरण के लिए कई युद्ध लड़े| 

धर्म के विस्तार के लिए बहुत कुछ हुआ|  इससे क्रूसेड और जिहाद कहा जाता है| 

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण करने वाले रैकेट का भंडाफोड़, करीब 1000 लोगों का किया धर्म परिवर्तन 

dharmantaran
आज से लगभग 1000 साल पहले 1096 से 1099 के बीच पहला क्रूसेड हुआ|

इसी दौर में मुसलमान दमिश्क में एकजुट हुए और पहली बार अरबी भाषा के शब्द 'जिहाद' का इस्तेमाल किया गया जबकि उस दौर में इसका अर्थ संघर्ष हुआ करता था।

विश्व का द्वितीय  क्रूसेड 1144 ईस्वी में फ्रांस के राजा लुई और जैंगी के गुलाम नूरुद्‍दीन के बीच हुआ। 1191 में तीसरे क्रूसेड की लीडरशिप  उस काल के पोप ने इंग्लैड के राजा रिचर्ड प्रथम को सौंप दी जबकि यरुशलम पर सलाउद्दीन ने कब्जा कर रखा था।

पूरे विश्व में तीन धर्मों के कारण धर्मांतरण जैसा शब्द एक्जिस्टेंस में आया यह तीन बड़े धर्म है बौद्ध, ईसाई और इस्लाम|

तीनों ही धर्म के टारगेट पर थे हिंदू यहूदी और दुनिया के कई तमाम छोटे और बड़े धर्म|

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Religious Conversion
भारत की शुरुआत में 2 धर्म प्रमुख थे|  हिंदू धर्म और जैन धर्म|  धर्मांतरण के कारण सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं दो धर्मों को हुआ|

इतिहास गवाह है कि सदियों से भारतीय बड़े पैमाने पर धर्मांतरण होते आए हैं|  पहले हिंदू धर्म धर्मान्तरित होकर बौद्ध और जैन बने फिर इसके बाद ईसाई बौद्ध और  इस्लाम में धर्मांतरण शुरू हो गया|

कई जगह हिंदू मर्जी  से तो कई जगह मजबूरी में दूसरे धर्म में परिवर्तित हो गए|

बहरहाल इस काल में भी बौद्ध इस्लाम और ईसाइयत में भारतीय समाज का धर्मांतरण जारी है|

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कहा यह जा रहा है कि चुनावों के कारण इस मुद्दे को हवा दी जा रही है और उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के  जिस  रैकेट  का खुलासा हुआ है वह राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए है|

भारत की यदि बात करें तो मोहम्मद बिन कासिम ने हिंदुओं का धर्मांतरण शुरू किया|

सोलवीं शताब्दी से ईसाई मिशनरियों ने भारत आने के बाद हिंदुओं का धर्मांतरण शुरू किया|

इन धर्म परिवर्तनों में जोर जबरदस्ती ज्यादा थी|

Conversion
स्वतंत्रता के बाद भी यह सिलसिला जारी रहा| 

नियोगी समिति की रिपोर्ट 1956 और मीनाक्षीपुरम(1981) में धर्मांतरण को लेकर सच्चाई को उजागर किया गया है|

नियोगी(भवानी शंकर नियोगी) समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि मध्यप्रदेश में ईसाई मिशनरी  वनवासी बंधुओं का बड़े स्तर पर धर्मांतरण कर रही हैं| ‘ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों के लिए गठित  जांच समिति (क्रिश्चियिन मिशनरीज़ एक्टीविटिज़ इन्क्वायरी कमेटी)  की रिपोर्ट के आधार पर यह स्थापित हुआ कि साम, दाम, दंड, भेद द्वारा ईसाई मिशनरी हिंदू वनवासियों का बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कर रहे हैं. 

धर्मांतरण के लिए विदेशों से बड़ी मात्रा में धनराशि भारत आ रही है|  

आदिवासियों को प्रलोभन देकर ईसाई बनाया जा रहा है|

भारत में धर्मांतरण के लिए अनेक तरह के हथकंडे अपनाए जाते रहे हैं|

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कभी बच्चों को एजुकेशन किट देकर लुभाया गया तो कभी पैसे उधार देकर लोगों का धर्म परिवर्तन कराया गया|

जातिगत ऊंच-नीच का भेद बढ़ा चढ़ाकर प्रस्तुत करके भी धर्मांतरण किया गया|

भारत के बहुसंख्यक धर्म को विकृत करके पेश किया गया और कमजोर वर्ग के लोगों को साथ जोड़ने के लिए अनेक तरह के दुष्प्रचार का सहारा लिया गया|

धर्म परिवर्तन के लिए मनोवैज्ञानिक तकनीकों का सहारा भी लिया गया|

धर्म परिवर्तन की यह कोशिश किसी आध्यात्मिक लक्ष्य के लिए नहीं थी बल्कि अपना विस्तार करने के लिए थी| ये कोशिशें आज भी जारी हैं| 

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