अष्टविनायक की कथा, गणपति के आठ स्वयंभू मंदिर का है अपना ही महत्व

अष्टविनायक की कथा, गणपति के आठ स्वयंभू मंदिर का है अपना ही महत्व

मयूरेश्र्वर, सिद्धिविनायक, बल्लालेक्ष्वर, वरदविनायक, चिंतामणि, गिरिजात्मक, विघ्नेश्वर और महागणपति। अष्टविनायक के तौर पर जाने जाते इन सभी गणपति और उनके मंदिरों की महिमा अपरम्पार है। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर इन अष्टविनायक के दर्शन की अपनी ही महिमा है। अत्यंत पौराणिक और प्राचीन मंदिर में शामिल इस अष्टविनायक का ज़िक्र हमारे गणेश और हिन्दू धर्म के पुराणों के समूह मुद्रल पुराण में भी है। अगर आप भी इन सभी अष्टविनायकों के दर्शन करना चाहते हैं तो आप मुंबई और पुणे से दो दिन में इन सभी मंदिरों में दर्शन कर सकते हैं।


क्या है अष्टविनायक की कथा
हर युग में जन्म लेने का वरदान ब्रह्मा ने उन्हें दिया था| दरअसल, सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रहमा ने श्री गणपति के लिए भविष्यवाणी की थी कि वो हर युग में अलग-अलग रुपों में प्रकट होंगे। सतयुग में विनायक बन, त्रेतायुग में मयूरेश्वर बन, तो गजानन रुप वो द्वापर युग में धारण करेंगे, वहीं कलयुग में धुम्रकेतु नाम से उनकी उपासना किए जाने की भविष्यवाणी की गई थी। श्री गणेश के इन्ही कई रुपों को, अथार्त इन आठ गणपति के धामों को गणपति के आठ शक्तिपीठ के तौर पर भी जाना जाता है और इन आठों मंदिरों की यात्रा को अष्टविनायक यात्रा कहा जाता है। । कहा जाता है कि गणपति की स्वमभू प्रकट हुई इन मूर्तियों के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।


अष्टविनायक मंदिर के दर्शन का अपना ही है क्रम
गणपति महोत्सव के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भीड़ होती हैं| अष्टविनायक की यात्रा का अपना ही एक क्रम है। माना जाता है कि महाराष्ट्र के पुणे, सिद्धटेक, अहमदनगर, रायगढ़, कोल्हापुर, ओझर और राजणगांव में स्थित इन अष्टविनायक के दर्शन करने का अपना ही एक क्रम है| और इसी क्रम से किए गए दर्शन से लाभ की प्राप्ति होती हैं। पुणे के मोरगांव में स्थित मयूरेश्वर यानी मोरेश्वर मंदिर से शुरु हुई अष्टविनायक यात्रा राजणगांव के महागणपति मंदिर पर खत्म होती हैं। हालांकि इन तरह की कथा भी प्रचलित है कि अष्टविनायक की यात्रा के अंत में पहले मंदिर यानी की मयूरेक्ष्वर मंदिर के दर्शन लेने आवश्यक है और उसी के बाद इस यात्रा को पूर्ण माना जाता है।

अगर आप भी अष्टविनायक यात्रा करना चाहते हैं तो आपको यह यात्रा मोरगांव के मयूरेश्वर से शुरु करनी होगी, इसके बाद अहमदनगर का सिद्धीविनायक मंदिर, रायगढ़ के पाली गांव का बल्लालेश्वर मंदिर, रायगढ़ के कोल्हापुर का वरदविनायक मंदिर, थेऊर गांव का चिंतामणि मंदिर, लेण्याद्री गांव का गिरिजात्मज मंदिर और आखिर में ओझर का विघ्नेश्वर मंदिर है।
इन सभी अष्टविनायकों के दर्शन आप पुणे पहुंचने के बाद आसानी से दो दिन में कर सकते हैं। इन दर्शनों के लिए कई ट्रेवल कम्पनी बहुत सी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाती है।


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