सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा 1 सितंबर को अगली सुनवाई में लोन मोरेटोरियम में ब्याज माफ़ी की स्थिति साफ करें

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा 1 सितंबर को अगली सुनवाई में लोन मोरेटोरियम में ब्याज माफ़ी की स्थिति साफ करें

The Supreme Court reprimanded the central government and said in the next hearing on September 1, clear the status of interest pardon in the loan moratorium

कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन पीरियड में लोन मोरेटोरियम मामले में supreme court ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए बोला है के 7 दिन में जानकारी देकर ब्याज माफी पर स्थिति साफ करें । सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई में कहा "लोगों की परेशानियों की चिंता छोड़कर आप सिर्फ बिजनेस के बारे में नहीं सोच सकते। सरकार आरबीआई के फैसले की सपोर्ट ले रही है, जबकि सरकार के पास खुद फैसला लेने के राइट्स है। यह बीमारी एक आपदा से कम नहीं है तो Disaster Management Act के तहत सरकार बैंकों को ब्याज पर ब्याज वसूलने से रोक सकती है।" इस मामले में अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
supreme court
क्या है मोरेटोरियम मामला (What is Moratorium case ?)
कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन की वजह से आरबीआई ने मार्च में लोगों को मोरेटोरियम यानी लोन की EMI 3 महीने के लिए आगे बदने की सुविधा दी थी। लेकिन देश में कोरोना की स्थिति को देखते हुए बाद में इसे 3 महीने और बढ़ाकर 31 अगस्त तक के लिए कर दिया गया। आरबीआई के अनुसार लोन की किश्त 6 महीने नहीं चुकाएंगे, तो इसे डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा। लेकिन, मोरेटोरियम के बाद बकाया पेमेंट पर पूरा ब्याज देना पड़ेगा। इसकी को लेकर ये सुनवाई चल रही है| 

मोरेटोरियम 31 अगस्त से आगे बढ़ाने की भी मांग
ब्याज देने वाली शर्त को कुछ ग्राहकों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी दलील है कि मोरेटोरियम में इंटरेस्ट पर छूट मिलनी चाहिए, क्योंकि EMI में जो अमाउंट रहता है उसमें बहुत सा हिस्सा ब्याज का रहता है| अब अगर सरकार ब्याज पर ब्याज वसूलती है तो गलत है। एक पिटीशनर की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बुधवार की सुनवाई में यह मांग भी रखी कि जब तक ब्याज माफी की अर्जी पर फैसला नहीं होता, तब तक मोरेटोरियम पीरियड बढ़ा देना चाहिए।

सरकार ने क्या कहा?
सरकार की तरफ से Solicitor General तुषार मेहता ने कहा कि हम आरबीआई के साथ को-ऑर्डिनेशन कर रही है। सभी समस्याओं का एक जैसा सॉल्यूशन नहीं हो सकता।

इस मामले की पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि सरकार इसे बैंकों और कस्टमर के बीच का मामला बताकर पल्ला नहीं झाड़ सकती। साथ ही कमेंट किया था कि बैंक हजारों करोड़ रुपए एनपीए में डाल देते हैं, लेकिन कुछ महीने के लिए टाली गई ईएमआई पर ब्याज वसूलना चाहते हैं।

 


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