अंतरात्मा की आवाज (The Voice of Conscience)

अंतरात्मा की आवाज

मानव की अन्तरात्मा एक गहन समुद्र की भाँति है। समुद्र की सतह पर अत्यधिक झाग और कूड़ा-करकट होते हैं तथा सतह के स्तर पर भीषण संक्षोभ भी होता है, किन्तु नीचे धरातल पर असंख्य रत्न होते हैं और जल शान्त और स्वच्छ होता है। इसी प्रकार अन्तरात्मा को आच्छादित करनेवाली गन्दगी की तहें होती हैं, किन्तु गहरे नीचे तल पर शांति और प्रकाश के रत्न होते हैं। दिव्य सत्ता स्वच्छ अन्तरात्मा के द्वारा स्पष्टतः बोलती है, यद्यपि उसे सुनना कठिन होता है। प्रायः हम अपनी इच्छाओं की वाणी को और कभी कभी किसी अपराधबोध के मिथ्या दण्डात्मक निर्णयों को भी सुनते हैं, जिन्हें हम भूल से अन्तरात्मा की वाणी मान बैठते हैं। स्वच्छ अन्तरात्मा की वाणी परमात्मा की वाणी होती है।

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The Voice of Conscience

Human Conscience is like a deep ocean. There lies a lot of froth and scum on the surface of the ocean and there is also a terrific commotion on the surface level.

But at the floor there lie innumerable gems and the waters are still and clear. So also, there are layers of filth shrouding the Conscience but deep down inside, there lie the gems of Peace and Light. Divinity speaks clearly through the pure Conscience although it is difficult to listen to it. Generally we hear the voice of our own desires and sometimes also the false verdicts of punishment arising out of some sense of guilt which we mistake for the voice of Conscience. The Voice of the clear Conscience is the Voice of God.

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