फिर बारिश, फिर रासायनिक कचरे के और नीचे धंस जाने का खतरा!

फिर बारिश, फिर रासायनिक कचरे के और नीचे धंस जाने का खतरा!

भोपाल. दुनिया की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी के बाद के साइड इफेक्ट से बचने की जद्दोजहद आज भी जारी है। जबकि गैस त्रासदी को 36 साल गुजर चुके हैं। इस दुर्घटना से निकला रासायनिक कचरा इस बारिश में भी जमीन के अंदर ही जहर खोल रहा है। पहले से ही यह कचरा आसपास की 48 कॉलोनियों के भू-जल को प्रभावित करता रहा है।

हालांकि हाल में गैस राहत विभाग ने इस कचरे को नष्ट करने के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। गुजरात की दो फर्म द्वारा कचरा नष्ट करने के संसाधनों व इंसीनेटर को देखने के लिए विशेषज्ञों की टीम का निरीक्षण होना बाकी है। हालांकि कचरा एकत्रित करने के पहले लिए जाने वाले सैंपलों की रिपोर्ट में भी समय लगेगा।

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गैस राहत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गुजरात की ऑयल फील्ड एनवायरो प्राइवेट लिमिटेड और चेतन कुमार वीरचंद भाईसा मल्टी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने गैस राहत विभाग के सामने इस काम को पूरा करने के लिये प्रेजेंटेशन दिया है। अब उसकी सत्यता को परखा जा रहा है। इनके पास संसाधनों का भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। 

इस प्रक्रिया पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार के विशेषज्ञ नजर रख रहे हैं। इस तरह कचरा कलेक्शन शुरू होने में चार महीने लगेंगे। माना जाता है कि यूका परिसर में आज भी सैकडों टन रासायनिक कचरा पड़ा हुआ है। जिससे आसपास की बस्तियों पर हमेशा खतरा रहा है। हालांकि इसे नष्ट करने के प्रयास काफी समय से चल रहे हैं लेकिन कई दिक्तों के चलते यह काम सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। इस बार उम्मीद बंधी है, उधर गैस पीड़ितों के संगठन लगातार इस मांग को बुलंद करते रहे हैं कि रासायनिक कचरे को जल्द हटाया जाए।

Priyam Mishra



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