वैदिक शांतिपाठ

वैदिक शांतिपाठ

 

shnati-mantra-Newspuran

ॐ वाङ्मे मनसि प्रतिष्ठिता, मनो मे वाचि प्रतिष्ठित माविरा विर्म एधि वेदस्य म आणीस्थः भुर्त मे मा प्रहासीः । अनेनाधीतेनाहोरात्रान् संदधाम्युतं बदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि तन्मामवतु । तद् वक्तारमवतु । अवतु माम् अवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

(त्र ग्वेदीय शान्तिपाठ) हे सच्चिदानन्दस्वरूप परमात्मन्। मेरी वाणी मनमें स्थित हो जाय और मन वाणीमें स्थित हो जाय अर्थात् मेरे मन वाणी दोनों एक हो जाये। हे प्रकाश स्वरूप परमेश्वर! आप मेरे लिये प्रकट हो जाइये। हे मन और वाणी। तुम दोनों मेरे लिये वेद विषयक ज्ञान की प्राप्ति करानेवाले बनो। मेरा गुरुमुखसे सुना हुआ और अनुभव में आया हुआ ज्ञान मेरा त्याग न करे मैं उसे कभी न भूलें। मेरी इच्छा है कि अपने अध्ययनद्वारा मैं दिन और रात एक कर दें। अर्थात् रात-दिन निरन्तर ब्रह्म- विद्या का पठन और चिन्तन ही करता रहूँ। मैं वाणीसे श्रेष्ठ शब्दों का उच्चारण करूँगा, सर्वथा सत्य बोलूँगा। वे परब्रह्म परमात्मा मेरी रक्षा करेंगे मुझे ब्रह्मविद्या सिखाने वाले आचार्य की रक्षा करें। वे मेरी रक्षा करें और मेरे आचार्य की रक्षा करें, आचार्य की रक्षा करें। आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक-तीनों तापोंकी शान्ति हो।'

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।

पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

(शुक्लयजुर्वेदीय शान्तिपाठ) 'वह सच्चिदानन्दघन परब्रह्म पुरुषोत्तम सब प्रकारसे सदा सर्वदा परिपूर्ण है। यह जगत् भी उस परब्रह्मसे पूर्ण ही है; क्योंकि यह पूर्ण उस पूर्ण पुरुषोत्तम से ही उत्पन्न हुआ है। इस प्रकार परब्रह्म की पूर्णता से जगत् पूर्ण होनेपर भी वह परब्रह्म परिपूर्ण है। उस पूर्ण पूर्ण को निकाल लेनेपर भी वह पूर्ण ही बच रहता है। आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक तीनों तापोंकी शान्ति हो।'

ॐ सह नाववतु॥ सह नौ भुनक्तु॥ सह वीर्य करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु, मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

(कृष्णयजुर्वेदीय शान्तिपाठ) है परमात्मन्! आप हम गुरु-शिष्य दोनोंकी साथ-साथ सब प्रकारसे रक्षा करें, हम दोनों को आप साथ-साथ समुचितरूपसे पालन-पोषण करें, हम दोनों साथ-ही-साथ सब प्रकारसे बल प्राप्त करें, हम दोनों के अध्ययन की हुई विद्या तेज पूर्ण हो

कहीं किसीसे हम विद्या में परास्त न हों और हम दोनों जीवनभर परस्पर स्नेह-सूत्रसे बंधे रहें; हमारे अंदर परस्पर कभी द्वेष न हो। हे परमात्मन्! आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक तीनों तापोंकी निवृत्ति हो।'

ॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक् प्राणशक्षुः श्रोत्र मथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि। सर्वं ब्रह्मोपनिषद माह ब्रह्म निराकुर्या मा मा ब्रह्म निराकरोत्, अनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु। तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु, ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

(सामवेदीय शान्तिपाठ) 'हे परमात्मन्! मेरे सारे अङ्ग, वाणी, नेत्र, स्तोत्र आदि सभी कर्मेन्द्रियाँ और ज्ञानेन्द्रियाँ, प्राणसमूह, शारीरिक और मानसिक शक्ति तथा ओज-सब पुष्टि एवं वृद्धिको प्राप्त हों। उपनिषदों में सर्वरूप ब्रह्म का जो स्वरूप वर्णित है, उसे मैं कभी अस्वीकार न करें और वह ब्राह्मण भी मेरा कभी प्रत्याख्यान न करे, मुझे सदा अपनाये रखे। मेरे साथ ब्रह्म और ब्रह्म के साथ मेरा नित्य सम्बन्ध बना रहे। उपनिषदों में किन धर्मों का प्रतिपादन किया गया है, वे सारे धर्म, उपनिषदों के एकमात्र लक्ष्य परब्रह्म परमात्मा में निरन्तर लगे हुए मुझ साधकमें सदा प्रकाशित रहें, मुझमें नित्य-निरन्तर बने रहें और मेरे आध्यात्मिक, आधिदैविक, आधिभौतिक त्रिविध तापोंकी निवृत्ति हो।'

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवा सस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । विश्ववेदाः॥ स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः ॥ स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ यदायुः॥ स्वस्ति नः पूषा ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

(अथर्ववेदीय शान्तिपाठ) ‘हे देवगण! हम अपने कानोंसे शुभ-कल्याणकारी वचन ही सुनें। नेत्रोंसे भी हम अग्निहोत्री सदा कल्याणका ही दर्शन करें। हमारा शरीर, हमारा एक-एक अवयव सुदृढ़ एवं सुपुष्ट हो-वह भी इसलिये कि हम उनके द्वारा भगवान का स्तवन करते रहें। हमें ऐसी आयु मिले, जो भगवान्के कार्यमें आ सके। जिनका सुयश सब ओर फैला है, वे देवराज इन्द्र, सर्वज्ञ पूषा, अरिष्टनिवारक ताक्ष्य्य (गरुड़) और बुद्धि के स्वामी बृहस्पति-ये सभी देवता भगवान की दिव्य विभूतियाँ हैं। ये सदा हमारे कल्याण का पोषण करें। इनकी कृपासे हमारे साथ प्राणिमात्रका कल्याण होता रहे। आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक-तीनों तापोंकी शान्ति हो।’


हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



न्‍यूज़ पुराण



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ