वेद-वाणी…. वेदों के इन सूत्रों में है असली सनातन दर्शन

वेद-वाणी…. वेदों के इन सूत्रों में है असली सनातन दर्शन

                                                                                  वेद-वाणी

 

यजुर्वेद

१- भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम।

हम कानों से सदा भद्र-मङ्गलकारी वचन ही सुनें।

२- मा गृध: कस्य स्विद्धनम् ॥

किसी के धन पर न ललचाओ।

३- मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे ॥

हम सब परस्पर मित्र की दृष्टि से देखें।

४- ऋतस्य पथा प्रेत॥ 

सत्य के मार्ग पर चलो।

५- तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ||

मेरा मन उत्तम संकल्पों वाला हो।

वेद वाणी

अथर्ववेद 

१- सं श्रुतेन गमेमहि ॥ 

हम वेदादि शास्त्रों से सदा सम्पन्न रहें।

२- परैतु मृत्युरमृतं न ऐतु। 

हमसे मृत्यु दूर रहे और हमें अमृत-पद प्राप्त हो।

३- सर्वा आशा मम मित्रं भवन्तु॥

हमारे लिये सभी दिशाएँ कल्याणकारिणी हों।

ऋग्वेद

१- सं गच्छध्वं सं वदध्वम्। 

मिलकर चलो और मिलकर बोलो।

२- न स सखा यो न ददाति सख्ये। 

वह मित्र ही क्या, जो अपने मित्र को सहायता नहीं देता।

३- सत्यस्य नावः सुकृतमपीपरन् ॥ 

धर्मात्मा को सत्य की नाव पार लगाती है।

४- देवानां सख्यमुप सेदिमा वयम् । 

हम देवताओं की मैत्री प्राप्त करें।

५- माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः ॥

हमारे लिये ओषधियाँ मधुरता से परिपूर्ण हों।

६- स्वस्ति पन्थामनु चरेम।

हे प्रभो! हम कल्याण-मार्ग के पथिक बनें।


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