क्या विंध्य में अजय सिंह को हाशिए पर धकेलने के लिए चौधरी राकेश सिंह बनाए गए प्रभारी: गणेश पाण्डेय

क्या विंध्य में अजय सिंह को हाशिए पर धकेलने के लिए चौधरी राकेश सिंह बनाए गए प्रभारी

सतना से सीधी तक अजय सिंह विरोधियों को मिल रही है तरजीह

गणेश पाण्डेय
भोपाल. 15 महीने में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस में घमासान थमने की संभावना दूर-दूर नजर नहीं आ रही है. दमोह उपचुनाव में मिली सफलता के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ आत्मविश्वास से लबरेज नजर आ रहे हैं. इसकी खनक भी सुनाई देने लगी है. पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के घोर विरोधी राज नेता चौधरी राकेश सिंह को रीवा का प्रभारी बना कर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने विंध्य के नेताओं को संकेत दे दिए हैं कि अब राहुल भैया के दिन लद गए हैं. कमलनाथ विरुद्ध अजय सिंह के बीच बयानी युद्ध की अनुगूंज दिल्ली हाईकमान तक सुनाई देने लगी है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मैहर यात्रा के बाद शुरू हुआ राजनीतिक बयान बाजी कांग्रेस दो खेमों में बंट गई है. एक खेमा पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ खड़ा हो गया है तो दूसरी खेमे की अगुवाई स्वयं प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ कर रहे हैं. दो बड़े नेताओं के बीच चल रहा है बयानी युद्ध से कांग्रेस का आम कार्यकर्ता हतप्रभ है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का सवाल वाजिब है कि बड़े नेता पार्टी को कितने रसातल में और ले जाएंगे? पिछले विधानसभा चुनाव में जैसे तैसे सरकार बनी और 15 महीने में अंतर्कलह के चक्कर में ढह गई. सत्ता से हटने के बाद भी कांग्रेस में खेमे बाजी बदस्तूर जारी रही. कभी विधानसभा समितियों के चयन को लेकर उठापटक हुई तो कभी 27 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में प्रत्याशी को लेकर घमासान हुआ. इसी वजह से विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को असफलता का स्वाद चखना पड़ा.

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kamal nath
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विधानसभा चुनाव के समय से ही निशाने पर थे अजय सिंह

विधानसभा सभा के आम चुनाव से ही पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के निशाने पर आ गए थे. इसकी वजह भी स्पष्ट थी कि कांग्रेस के बहुमत में आने पर अजय सिंह मुख्यमंत्री के सबसे प्रबल दावेदार थे. विंध्य और बुंदेलखंड में ढाक रखने वाले अजय सिंह को भी उम्मीद थी कि उनके क्षेत्र से सबसे अधिक विधायक विजयी होते हैं तो मुख्यमंत्री के लिए अपनी दावेदारी भी पेश कर सकेंगे. कांग्रेस के रणनीतिकारों ने ऐसी बिसात बिछाई की कि अजय सिंह राहुल भैया अपने ही गृह क्षेत्र में चुनाव हार गए. अजय सिंह स्वयं भी मानते हैं कि उन्हें कांग्रेस के बड़े नेताओं ने सुनियोजित ढंग से चुनाव हराया. वे आज भी अपनी हार पर आश्चर्यचकित होते हैं. चुनाव के बाद भी कांग्रेस ने उन्हें सत्ता और संगठन से दूर रखा. राजनीति में अजय सिंह के सबसे बड़ी कमजोरी चौधरी राकेश सिंह थे, जिसे कमलनाथ ने गले लगा कर राहुल भैया को राजनीतिक पटकनी देते आ रहे हैं.

ajay singh
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राजनीति का सुरक्षा से घिरे हैं नेता और विधायक

कांग्रेस मे मची भगदड़ पर प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ आत्ममंथन के बजाय भाजपा को कसूरवार ठहरा रहे हैं. जबकि दिल्ली से लेकर मप्र कांग्रेस संगठन में विभिन्न पदों पर रह चुके वरिष्ठ नेता का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस में विधायक हो या फिर पदाधिकारी वे राजनीतिक असुरक्षा महसूस कर रहे हैं. यही वजह है कि कांग्रेस छोड़कर सुरक्षित राजनीतिक भविष्य तलाशने के लिए दूसरे दलों में शरण ले रहे हैं. वरिष्ठ नेता का कहना है कि प्रदेश के नेताओं और विधायकों में यह बात 'घर' कर गई है कि प्रदेश की राजनीति करना है तो कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के दरबारी बनकर करना होगी. यही वजह रही कि संगठन के जानकार और संगठनात्मक क्षमता वाले कांग्रेस के कई बड़े नेता घर बैठ गए हैं.

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Choudhary Rakesh Singh
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अपीलीय अथॉरिटी की परंपरा समाप्त

कांग्रेस में अपीलीय अथॉरिटी दिल्ली से लेकर भोपाल तक समाप्त हो गई है. अपीलीय अथॉरिटी में प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई करता था. अब अथॉरिटी नहीं रहने की वजह से प्रदेश के नेता नेतृत्व के खिलाफ किससे शिकायत करें और कौन उनकी सुनवाई करेगा ? राष्ट्रीय राजनीति में कमलनाथ के प्रभाव को प्रदेश के नेता भली भांति से जानते हैं. अहमद पटेल से लेकर संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के प्रभाव में हैं. यही वजह है कि प्रदेश के नेता प्रदेश के उपेक्षित नेता उपचुनाव और उसके परिणामों का इंतजार कर रहे हैं. इन नेताओं को उम्मीद है कि प्रतिकूल चुनाव परिणाम आने पर प्रदेश से कमलनाथ की विदाई हो जाएगी.

कांग्रेस का अवसान कमलनाथ कांग्रेस का उदय

प्रदेश में कांग्रेस संगठन का अवसान होता दिखाई दे रहा है. सांगठनिक क्षमता रखने वाले नेता रामेश्वर नीखरा, महेश जोशी, अजय सिंह, अरुण यादव, मानक अग्रवाल, मुकेश नायक, रामेश्वर पटेल, राजा पटेरिया, ब्रज बिहारी पटेरिया, प्रभु सिंह ठाकुर, प्रताप भानु शर्मा, विनोद डागा, राजकुमार पटेल, जैसे दर्जनों नेता घर बैठ गए हैं. एक प्रकार से कांग्रेस अस्तित्वहीन हो गई है. कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपनी कांग्रेस को सक्रिय किया है. कमलनाथ ने अपनी पुरानी कार्यकारिणी को दरकिनार कर एक नई टीम तैयार की है. इस टीम में क्रिकेट की तरह 11 खिलाड़ी पूरे प्रदेश में बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग कर रहे हैं. इनमें कमलनाथ के अलावा सज्जन सिंह वर्मा एनपी प्रजापति, बाला बच्चन, विजयलक्ष्मी साधो, चंद्रप्रभाष शेखर, प्रकाश जैन, राजीव सिंह, प्रवीण कक्कड़, अर्चना जायसवाल, सांसद नकुल नाथ, जयवर्धन सिंह टीम में शामिल है. जीतू पटवारी कमलनाथ टीम के एक्स्ट्रा खिलाड़ी है.

Priyam Mishra



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