प्रार्थना का हमारे जीवन में क्या योगदान है? -भगीरथ पुरोहित

प्रार्थना का हमारे जीवन में क्या योगदान है ?
भगीरथ पुरोहित
BHAGIRATH PUROHIT 2दोस्तों प्रार्थना के ज़रिए हम विश्व शांति और लोगों की चेतना को उच्चतम स्तर तक ले जा सकते है. पूरे देश में कोरोना महामारी के प्रकोप को देखते हुए मेरा देशवासियों से नम्र निवेदन है कि हमारे देश के प्रत्येक निवासी को अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर इस महामारी के उन्मूलन और इसके प्रभाव को कम करने के लिए परम पिता परमात्मा से दिन में एक बार तीन मिनट यह प्रार्थना ज़रूर करनी चाहिए.

लगातार सात दिन तक यह प्रार्थना ज़रूर करनी चाहिए. प्रार्थना-हे परम पिता मेरे और मेरे परिवार के साथ मेरे पूरे देश को इस बीमारी से सुरक्षा के लिए आंतरिक और बाह्य शक्ति प्रदान करे. इस बीमारी के अंत के लिए हे करुणा निदान परमेश्वर हमें शक्ति और ज्ञान दे. जिसकी मदद से हम इस मानव सभ्यता को क़ायम रख सके. हे ईश्वर हमारी इस प्रार्थना को स्वीकार करके, हमारी रक्षा करे करुणा निदान परमेश्वर हम सब अपने अलग -अलग अस्तित्व की चिंता छोड़कर निजी स्वार्थ व अहंकार त्याग कर द्वेष भाव त्यागकर, परनिंदा का त्याग करते हुए अपनी निजी सदगुणों करुणा, दया, क्षमाशीलता, प्रेम, कृतज्ञता, सहिष्णुता, त्याग और परोपकार के भावों द्वारा सब जने मिलकर समाज कल्याण और विश्व कल्याण के लिए इस सुंदर अनुपम प्रकृति की रक्षा करे.

prayer
विज्ञान को प्रार्थना की शक्ति के बारे में बहुत ही कम जानकारी है लेकिन दुनिया के सारे लोग एक ही जगह पर एक ही समय इकट्ठे होकर दो मिनट प्रार्थना कर ले तो विश्व युद्ध तक टल सकता है. यह दो मिनट की प्रार्थना ऐसे चमत्कार कर सकती है जिसकी आप कल्पना भी नहीं की जा सकती. एक प्रार्थना ही विश्व की सारी समस्याओं को मिटा सकती है. जब बहुत से लोग मिलकर प्रार्थना करते है तो उसमें अपार शक्ति होती है सामूहिक और एकाग्र विचार तथा शुद्ध भावनाएँ विश्व में हिंसा, ग़रीबी, अकाल और महामारी जैसी तमाम समस्याओं को मिटा सकती है. सामूहिक प्रार्थना की शक्ति गहन है सामूहिक शक्ति, सामूहिक बल, सामूहिक सम्बंध और सामूहिक भावनाओं के फलस्वरूप सकारात्मक शक्तिशाली तरंगे उत्पन्न होती है जो बढ़ती जाती है फिर ये तरंगे इन भावनाओं को पूरे वातावरण में भर देती है.

 ऐसे वातावरण में भेदभाव ,नकारात्मक शक्तियाँ और नास्तिकता की भावनाएँ जड़ से ख़त्म हो जाती है इनकी जगह पर प्रेम ,शांति ,करुणा,भाईचारे ,एकता और भक्ति की भावनाएँ बढ़ती है. इसलिए सामूहिक प्रार्थना लगभग सभी धर्मों में लोकप्रिय है दूसरों के साथ और दूसरों के लिए प्रार्थना करना बड़ा ही पवित्र कार्य है. जिसमें मन शुद्ध होता है शुद्ध और संतुलित मन जल्द ही समर्पण करने और अहंकार मिटाने के लिए तत्पर हो जाता है, अहंकार के मिटने के बाद ही आत्मसाक्षात्कार होता है और आत्मसाक्षात्कार के बाद ही शांति, समृद्धि, सहिष्णुता की स्थापना होती है.

भगीरथ पुरोहित (अहमदाबाद, मो.9825173001)

Priyam Mishra



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