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जब श्रीकृष्ण से डर गए थे अंग्रेज….. विद्रोह के आरोप में कृष्ण को हिरासत में लिए जाने की दिए थे आदेश|

अतुल विनोद:

श्री कृष्ण की लिखी गीता के प्रभाव से अंग्रेज भी डर गए, 1940 में गोरखपुर के एक अंग्रेज अधिकारी ने हाईकमान को लिखी एक रिपोर्ट में लिखा कि “कृष्ण” नाम का कोई शख्स गीता नाम की किताब से विद्रोह के भाव फैला रहा है, उस व्यक्ति को फौरन गिरफ्तार करके उसकी किताब को जप्त कर प्रतिबंधित कर देना चाहिए| 


आजादी के आंदोलन को लेकर आपने बहुत सारी बातें सुनी और पढ़ी होगी, लेकिन शायद ही आप इस बात को जानते हो कि आजादी के आंदोलन में “श्रीमद्भागवत गीता” क्रांतिकारियों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा थी| १८५७  के विद्रोह से लेकर 1947 तक जो भी क्रांतियां हुई उनमें शामिल होने वाले क्रांतिकारी श्रीमद्भागवत गीता से प्रेरित थे|


रोचक बात यह है कि ज्यादातर  नए-नए आने वाले अंग्रेज अफसर श्रीकृष्ण के बारे में ज्यादा नहीं जानते थे और जब उन्हें पता चलता कि क्रांतिकारी कृष्ण की गीता से प्रभावित है और गीता के श्लोक पढ़ कर ही वह क्रांति में भाग लेने और मरने मारने से नहीं डरते तब उनके कान खड़े हो जाते| वे अपने पहले से रहने वाले अफसरों या भारतीयों से कृष्ण की जानकारी लेते तो अपनी मुर्खता समझ आती, ख़ास बात ये थी कि कोई भी भारतीय ये न कहता कि कृष्ण जीवित नहीं हैं| 



गीता से विरोध और विद्रोह की चेतना तिलक और जयप्रकाश सभी पा रहे थे| महात्मा गांधी के गीता भाष्य से साफ था कि उनकी प्रेरणा का स्रोत कहां था|

इधर गीता का महत्व समझ कर ही लोकमान्य तिलक गीता रहस्य लिखने बैठे थे| 

हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।

तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः।।

हे कौन्तेय युद्धके लिये निश्चय करके खड़ा हो जा अर्थात् मैं या तो शत्रुओं को जीतूँगा या मर ही जाऊँगा ऐसा निश्चय करके खड़ा हो जा।

या तो उनके द्वारा मारा जाकर स्वर्गको प्राप्त करेगा अथवा कर्णादि शूरवीरोंको जीतकर पृथिवीका राज्य भोगेगा। दोनों तरह से तेरा लाभ ही है।

गीता का कर्मयोग तत्कालीन स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन की धूरी रहा है लोकमान्य तिलक की गीता रहस्य के कर्मयोग ने क्रांतिकारी योद्धाओं  में नई जान फूंक दी|

1905 में बंगाल से शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन के हर कार्यकर्ता के  हाथ में गीता होती थी| एक बार तो लगभग 50,000 लोग अपने हाथ में गीता रखकर ब्रिटिश सामान और फोर्स का विरोध करने पहुंच गए|

ATUL VINOD



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